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        <title><![CDATA[ Igrain India ]]></title>
        <link><![CDATA[ https://igrain.in/feeds ]]></link>
        <description><![CDATA[ Igrain India ]]></description>
        <language>en</language>
        <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:19:39 +0530</pubDate>
  
                    <item>
                <title><![CDATA[मई तक ओएमसी को 6 अरब लीटर एथनॉल की आपूर्ति]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-6-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। डिस्टीलर्स द्वारा 2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन के शुरूआती 7 महीनों में यानी नवम्बर 2025- मई 2026 के दौरान तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को कुल 6.15 अरब लीटर एथनॉल की आपूर्ति की गई जो सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन के लिए दिए गए ऑर्डर 10.50 अरब लीटर का करीब 59 प्रतिशत है।&nbsp;</span></p><p>इसमें से अधिकांश एथनॉल का उत्पादन अनाज से हुआ जबकि शेष का निर्माण गन्ना अवयवों से किया गया था। तेल-विपणन कंपनियां (ओएमसी) पेट्रोल में मिश्रण के लिए डिस्टीलर्स से निश्चित मूल्य पर एथनॉल की खरीद करती हैं। </p><p>जिस 6.15 अरब लीटर एथनॉल की आपूर्ति की उसमें 4.06 अरब लीटर या 66 प्रतिशत एथनॉल का निर्माण मक्का एवं चावल सहित अन्य क्षतिग्रस्त अनाजों से तथा 2.10 अरब लीटर या 34 प्रतिशत का उत्पादन गन्ना अवयवों से हुआ था। </p><p>वैसे इस बार गन्ना अवयवों से निर्मित एथनॉल की आपूर्ति का कम कोटा नियत किया गया है इसलिए डिस्टीलर्स 2.90 अरब लीटर के कुल ऑर्डर के 73 प्रतिशत भाग की आपूर्ति करने में सफल हो चुके हैं। </p><p>जहां तक अनाज आधारित एथनॉल का सवाल है तो इसके लिए 7.60 अरब लीटर की आपूर्ति का ऑर्डर दिया गया था जिसमें से महज 53.4 प्रतिशत या 4.06 अरब लीटर की ही सप्लाई हो सकी। ओएमसी द्वारा शीघ्र ही 1.50 अरब लीटर अतिरिक्त एथनॉल की आपूर्ति के लिए टेंडर जारी किए जाने की संभावना है। नवम्बर-मई में गन्ना की अच्छी आपूर्ति हुई।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34014</guid>				
                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:51:03 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[महाराष्ट्र में मुख्य फसलों के साथ-साथ चारा उत्पादन पर भी जोर देने की सलाह]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। महाराष्ट्र सरकार ने इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव तथा कमजोर मानसून की संभावना को देखते हुए राज्य के किसानों को दलहन, तिलहन एवं कपास सहित अन्य मुख्य फसलों के साथ-साथ चारे की फसल के लिए भी विशेष प्लान बनाने का सुझाव दिया है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश कम होने पर राज्य में हरे चारे का अभाव हो सकता है जिससे किसानों एवं पशुपालकों की कठिनाई बढ़ जाएगी। इस समस्या से निपटने के लिए चारे की फसल उगाने पर किसानों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है।&nbsp;</span></p><p>पशुपालन आयुक्त का कहना है कि निकट भविष्य में चारे के अभाव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। पशुधन एवं दुग्ध उत्पादन पर इसका प्रतिकूल असर न पड़े, इसके लिए महाराष्ट्र के सभी पशुपालकों को अभी से सावधान रहने तथा चारा उत्पादन पर विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया जा रहा है। </p><p>उन्हें पौष्टिक एवं बहुउद्देश्यीय चारा फसलों की खेती करने की सलाह दी गई है ताकि गाय-भैंस सहित अन्य पशुओं का अच्छा स्वास्थ्य बरकरार रखा जा सके। हालांकि मुख्य फसलों से भी चारा प्राप्त किया जा सकता है। इसमें ज्वार-बाजरा तथा गन्ना आदि शामिल है। चारा फसलों का&nbsp; अधिशेष उत्पादन होने पर उसका सुरक्षित भंडारण किया जाना चाहिए।&nbsp;</p><p>महाराष्ट्र में इस वर्ष 15 जून तक मानसून की बारिश सामान्य औसत से करीब 75 प्रतिशत कम हुई तथा आगे भी वर्षा की स्थिति में ज्यादा सुधार आने की उम्मीद कम है। मानसून अभी पूर्वी क्षेत्र की ओर सक्रिय हो रहा है जिससे महाराष्ट्र एवं गुजरात जैसे पश्चिमी राज्यों में बारिश का भारी अभाव देखा जा रहा है। महाराष्ट्र में तुवर, सोयाबीन, कपास एवं गन्ना के साथ-साथ मोटे अनाजों का भी भारी उत्पादन होता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34012</guid>				
                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:28:02 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[नई फसल पर खरीदारों का ध्यान होने से मटर का भाव स्थिर]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">सस्काटून। कनाडा में मटर की बिजाई पूरी होने के बाद अब फसल की प्रगति पर सबका ध्यान केन्द्रित हो गया है। अगस्त से इसकी कटाई-तैयारी आरंभ होने वाली है और उस मटर के लिए खरीद-बिक्री का अनुबंध पहले ही बड़े पैमाने पर हो चुका है। खरीदारों का ध्यान अगली फसल पर केन्द्रित है इसलिए मौजूदा स्टॉक के लिए कारोबार कुछ सुस्त पड़ गया है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">पीली मटर का भाव पिछले कुछ सप्ताहों से 8.00-8.50 डॉलर प्रति बुशेल पर स्थिर बना हुआ है जो जून-अगस्त डिलीवरी के लिए एफओबी फार्म मूल्य है। लेकिन मांग कमजोर रहने से हरी मटर का दाम कुछ नरम पड़कर 9.00-9.50 डॉलर प्रति बुशेल पर आ गया है।&nbsp;</span></p><p>लेकिन पश्चिमी कनाडा और खासकर सस्कैचवान प्रान्त के उत्पादक निचले मूल्य स्तर पर अपनी हरी मटर की बिक्री करने में नगण्य दिलचस्पी दिखा रहे हैं। मापले मटर का मूल्य भी 9.50 से 11.00 डॉलर प्रति बुशेल के बीच घूम रहा है। आगामी नई फसल की मटर का अग्रिम अनुबंध मूल्य काफी हद तक स्थिर बना हुआ है।&nbsp;</p><p>कनाडा के मटर निर्यातकों का ध्यान चीन तथा भारत के बाजार पर केन्द्रित है। चीन में शुल्क काफी घटा दिया गया है जबकि भारत में प्रतिकूल मौसम से खरीफ कालीन दलहनों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। 30 जून को सरकारी एजेंसी- स्टैट्स कैन की रिपोर्ट आने वाली है जिसमें मटर के बिजाई क्षेत्र का विवरण शामिल होगा।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34010</guid>				
                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 12:58:02 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[पाकिस्तान में बासमती चावल के निर्यात पर ड्यूटी ड्रॉ बैक की अवधि बढ़ाने की संभावना]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। पाकिस्तान सरकार द्वारा बासमती चावल के निर्यात पर शुल्क वापसी (ड्यूटी ड्रॉ बैक) के लाभ की समय&nbsp; सीमा आगे बढ़ाने का प्लान बनाया जा रहा है जिससे भारतीय निर्यातकों की चिंता बढ़ गई। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान क्षेत्र के वाणिज्य मंत्रालय ने 23 जनवरी 2026 को एक आदेश जारी करके चावल क्षेत्र से वसूले जाने वाले स्थानीय शुल्क तथा लेवी की वापसी का लाभ उपलब्ध करवाने की घोषणा की थी। इसकी समय सीमा 30 जून 2026 तक के लिए निश्चित की गई थी। ऐसा प्रतीत होता है कि इस अवधि के समाप्त होने से पूर्व ही समय सीमा आगे बढ़ाने की घोषणा की जा सकती है।&nbsp;</span></p><p>इससे पाकिस्तानी निर्यातकों को अपने बासमती चावल के निर्यात ऑफर मूल्य को प्रतिस्पर्धी स्तर पर रखने में सहायता मिलेगी। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौती बढ़ सकती है और उसकी निर्यात आय में गिरावट आने की आशंका बढ़ जाएगी। </p><p>खाड़ी क्षेत्र के देशों में भारतीय बसमती चावल का निर्यात प्रदर्शन बेहतर होने की उम्मीद की जा रही है लेकिन यदि पाकिस्तान में ड्यूटी ड्रॉ बैक का कायदा बरकरार रखा गया तो भारत को कुछ कठिनाई हो सकती है। ध्यान देने की बात है कि ड्यूटी ड्रॉ बैक स्कीम के कारण पाकिस्तानी बासमती चावल के निर्यात में कुछ सुधार आ गया।&nbsp;</p><p>पाकिस्तान के निर्यातक अगर मूल्य घटाकर अपने बासमती चावल का निर्यात करेंगे तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भाव घटकर नीचे आ जाएगा जिससे भारतीय निर्यातकों को भी दाम घटाना पड़ सकता है। इसके फलस्वरूप निर्यात आय में स्वाभाविक रूप से कमी आ जाएगी। </p><p>पाकिस्तानी वाणिज्य मंत्रालय के आदेश में कहा गया था कि यदि निर्यातक 750 डॉलर प्रति टन या उससे ऊंचे मूल्य पर लम्बे दाने वाले खुशबूदार बासमती चावल का शिपमेंट करते हैं तो वे निर्यातित चावल के कुल फ्री ऑन बोर्ड मूल्य का 9 प्रतिशत दाम हासिल करने का दावा कर सकते हैं जबकि 750 डॉलर प्रति टन से नीचे मूल्य पर निर्यात होने वाले बासमती चावल के लिए ड्यूटी ड्रॉ बैक का स्तर 3 प्रतिशत नियत किया गया है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34008</guid>				
                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 12:39:24 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[राजस्थान में खरीद जारी रहने से गेहूं का स्टॉक और बढ़ने की संभावना]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक पहले ही बढ़कर वर्ष 2021 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है जबकि राजस्थान में खरीद की प्रक्रिया जारी रहने से इसमें कुछ और वृद्धि होने की संभावना है। चालू रबी मार्केटिंग सीजन में गेहूं की सरकारी खरीद 357 लाख टन पर पहुंच चुकी है जो पिछले साल की इस अवधि में 300 लाख टन के करीब रही थी।&nbsp;</span></p><p>राजस्थान को छोड़कर अन्य सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में गेहूं की सरकारी खरीद लगभग बंद हो गई है। इस बार मध्य प्रदेश तथा हरियाणा के साथ-साथ राजस्थान में भी नियत लक्ष्य से अधिक गेहूं खरीदा गया है जबकि पंजाब और उत्तर&nbsp; प्रदेश में गेहूं की खरीद नियत लक्ष्य से कुछ पीछे रह गई। </p><p>राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य मंत्रालय ने इस बार करीब 346 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है जबकि वास्तविक खरीद इससे 11 लाख टन अधिक हो चुकी है।&nbsp;</p><p>लेकिन इस 357 लाख टन की कुल खरीद में हल्की क्वालिटी के यानी चमकहीन, बदरंग एवं टूट-चिपटे दाने वाले गेहूं की&nbsp; भागीदारी 68 प्रतिशत या 242 लाख टन बताई जा रही है इसलिए सरकार पर इस गेहूं की जल्दी से जल्दी निकासी का दबाव रहेगा। </p><p>वैसे इस गेहूं में प्रोटीन का अंश कम नहीं हुआ है और यह केवल देखने में ही खराब लगता है। राजस्थान में 23.50 लाख टन के नियत लक्ष्य के सापेक्ष 26 लाख टन से अधिक गेहूं खरीदा जा चुका है जो गत वर्ष की तुलना में 27 प्रतिशत ज्यादा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34005</guid>				
                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 12:02:31 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[उत्तरी राज्यों में कमजोर बिजाई से कपास का क्षेत्रफल गत वर्ष से पीछे]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि इस वर्ष 12 जून तक कपास का कुल घरेलू उत्पादन क्षेत्र 9.53 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सका जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 13.19 लाख हेक्टेयर से 28 प्रतिशत कम था। कर्नाटक, गुजरात एवं राजस्थान सहित अन्य प्रांतों के कुछ हिस्सों में कपास की बिजाई आरंभ हो चुकी है।&nbsp;</span></p><p>उत्तरी भारत में कपास का क्षेत्रफल करीब 22 प्रतिशत घट गया है। इसके तहत खासकर पंजाब और हरियाणा में रकबा काफी सीमित रहा है क्योंकि वहां किसान धान की खेती को प्राथमिकता देना चाहते हैं। </p><p>पंजाब-हरियाणा में विभिन्न कारणों से कपास की खेती किसानों के लिए नुकसान दायक साबित हो रही है। दूसरी ओर धान एक ऐसा उत्पाद है जिसकी बिक्री के प्रति किसान निश्चिंत रहते हैं और उसे बेहतर आमदनी भी प्राप्त होती है। सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर किसानों से विशाल मात्रा में प्रति वर्ष धान की खरीद करती है।&nbsp;</p><p>उत्तरी संभाग के तीनों उत्पादक प्रांतों- पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान में इस बार कपास का उत्पादन क्षेत्र 9 लाख हेक्टेयर के करीब ही पहुंच सका जबकि पिछले साल 11.56 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया था। </p><p>उत्तरी क्षेत्र में कपास की अगैती खेती अप्रैल-मई में होती है और अब वहां बिजाई की प्रक्रिया लगभग समाप्त हो चुकी है। पंजाब में 11 जून तक कपास का उत्पादन क्षेत्र एक लाख हेक्टेयर से भी घटकर 80 हजार हेक्टेयर के करीब रह गया जबकि गत वर्ष 1.19 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया था।</p><p> इसी तरह हरियाणा में बिजाई क्षेत्र पिछले साल के 3.94 लाख हेक्टेयर से गिरकर इस बार 2.92 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। राजस्थान में भी क्षेत्रफल गत वर्ष के 6.43 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस वर्ष 5.28 लाख हेक्टेयर तक ही पहुंच सका जबकि वहां रकबा बढ़ने की उम्मीद की जा रही थी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33992</guid>				
                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 10:25:11 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए समेकित प्रयास जरूरी]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2025-26 सीजन के दौरान तिलहनों का कुल घरेलू उत्पादन बढ़कर 430.60 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">तिलहन उत्पादन में मुख्य रूप से सोयाबीन सरसों एवं मूंगफली का योगदान रहता है क्योंकि इसमें से प्रत्येक का उत्पादन 100 लाख टन से ज्यादा होता है।&nbsp;</span></p><p>तिलहन उत्पादन में इस शानदार उपलब्धि के हासिल होने के बावजूद देश में खाद्य तेलों की 60 प्रतिशत मांग एवं जरूरत को विदेशों से आयात के जरिए पूरा करना पड़ रहा है। </p><p>इससे स्पष्ट संकेत मिलता कि खाद्य तेल-तिलहन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने के लिए भारत को अभी बहुत लम्बा रास्ता तय करना पड़ेगा। जनसंख्या में वृद्धि, लोगों की आमदनी में बढ़ोत्तरी एवं बदलती खाद्य शैली के कारण देश में खाद्य तेलों की मांग एवं खपत लगातार बढ़ती जा रही है। </p><p>रसोई घरों के साथ-साथ अन्य खपतकर्ता क्षेत्रों के लिए खाद्य तेल एक महत्वपूर्ण अवयव बना हुआ है। यदि भारत वर्ष 2030 तक खाद्य तेलों का सालाना आयात घटाकर 95-100 लाख टन पर लाना चाहता है तो एक तरफ मुख्य तिलहन फसलों की औसत उपज दर को बढ़ाना और दूसरी ओर वैकल्पिक तेल धारक जिंसों का अधिक से अधिक दोहन करना आवश्यक है। इसमें राइस ब्रान एवं बिनौला भी शामिल है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33982</guid>				
                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:52:18 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[खरीफ कालीन दलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से काफी पीछे]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। मौसम एवं मानसून की हालत अनुकूल नहीं होने से इस वर्ष खरीफ कालीन दलहन फसलों की बिजाई की धीमी शुरुआत हुई है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात एवं मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में बिजाई की गति को बढ़ाने&nbsp; के लिए किसान मानसूनी वर्षा का इंतजार कर रहे हैं। इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के विभिन्न भागों में न केवल देरी से पहुंचने की संभावना है बल्कि कमजोर भी रहने का अनुमान है।&nbsp;</span></p><p>आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान 12 जून तक दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र करीब 43 प्रतिशत पीछे चल रहा था। खरीफ सीजन में मुख्यतः अरहर (तुवर), मूंग एवं उड़द के साथ-साथ कुलथी एवं खेसारी तथा मोठ जैसे दलहन का भी उत्पादन होता है।&nbsp;</p><p>पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान तुवर का उत्पादन क्षेत्र 57 प्रतिशत लुढ़ककर 9 हजार हेक्टेयर, मूंग का बिजाई क्षेत्र 1.54 लाख हेक्टेयर से 55 प्रतिशत घटकर 69 हजार हेक्टेयर तथा उड़द का रकबा 35 हजार हेक्टेयर से 22 प्रतिशत गिरकर 27 हजार हेक्टेयर रह गया।</p><p>कलबुर्गी स्थित कर्नाटक प्रदेश रेड ग्राम ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि राज्य के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में अभी तक बारिश नहीं हुई है और यह भी निश्चित नहीं है कि आगामी दिनों में समय पर वर्षा होगी या नहीं। </p><p>बरसात में देरी से किसान चिंतित है। महाराष्ट्र में भी लगभग ऐसी ही स्थिति देखी जा रही है। वहां कृषि विभाग किसानों को सुझाव दे रहा है कि जब तक मानसून की अच्छी बारिश न हो जाए तब तक फसलों की बिजाई करने में जल्दबाजी न दिखाएं। लातूर एवं सोलापुर में बिजाई अटकी हुई है। तेलंगाना में तुवर की बिजाई प्रभावित हो रही है।</p><p>राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य औसत के मुकाबले 1-15 जून के दौरान 32 प्रतिशत कम बारिश हुई। लातूर में वर्षा नहीं होने से तुवर की बिजाई आरंभ नहीं हो पाई है। कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के कुछ भागों में कुछ सप्ताह पूर्व वर्षा हुई थी और वहां मूंग की बिजाई शुरू हो गई है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33980</guid>				
                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:49:24 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[होर्मुज स्ट्रेट के खुलने की उम्मीद बढ़ी]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">तेहरान। इजरायल के विरोध एवं असंतोष के बावजूद अमरीका और ईरान के बीच शांति समझौता हो जाने से होर्मुज स्ट्रेट के खुलने तथा वहां से जहाजों की सुरक्षित एवं निर्बाध आवाजाही शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">अमरीका ने कहा है कि अगले दो महीने (60 दिन) तक ईरान इस जल डमरू मध्य से आने-जाने वाले जहाजों से कोई टोल टैक्स वसूल नहीं करेगा और उसके बाद इस स्ट्रेट का संचालन ईरान तथा ओमान द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा। ईरान भी इस शर्त पर सहमत हो।</span></p><p>भारत के लिए यह खबर काफी राहत देने वाली है क्योंकि होर्मुज का रास्ता अवरुद्ध होने से आयात-निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था। </p><p>पश्चिम एशिया भारतीय कृषि उत्पादों का महत्वपूर्ण बाजार है जबकि भारत वहां से पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस एवं रासायनिक उर्वरकों का बड़े पैमाने पर आयात करता है। जल मार्ग खुलने से भारत को राहत मिलेगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33978</guid>				
                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:11:10 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[महाराष्ट्र में किसानों को खरीफ फसलों की बिजाई में जल्दबाजी नहीं दिखाने का सुझाव]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">पुणे। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के किसानों को खरीफ फसलों की बिजाई में जल्दबाजी नहीं दिखाने तथा मानसून की अच्छी बारिश होने तक इंतजार करने का सुझाव दिया है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">जून के शुरूआती 15 दिनों के दौरान राज्य में सामान्य औसत से 75 प्रतिशत कम बारिश हुई और इसका दायरा भी सीमित रहा। अधिकांश क्षेत्रों में खेतों की मिटटी में नमी का अभाव देखा जा रहा है और उसमें बिजाई करना जोखिमपूर्ण साबित हो सकता है।&nbsp;</span></p><p>महाराष्ट्र कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत की गई एक फसल स्थिति समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार 1-15 जून के दौरान राज्य में केवल 27.4 मि०मी० वर्षा हुई जो दीर्घकालीन औसत 103.8 मि०मी० से बहुत कम थी।&nbsp;</p><p>रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के विभिन्न भागों में कृषि कार्यों के लिए तैयारी आरंभ हो गई है। धान तथा फिंगर मिलेट के लिए नर्सरी लगाई जा रही है तथा बिजाई से पूर्व खेतों को तैयार किया जा रहा है। चूंकि अभी मानसून की स्थिति कमजोर है और बारिश का अभाव बना हुआ है </p><p>इसलिए किसानों से कहा गया है कि वे खरीफ फसलों की खेती में जल्दबाजी न दिखाएं और अनुकूल स्थिति की प्रतीक्षा करें। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोंकण एवं मध्य महाराष्ट्र में कहीं-कहीं छिटपुट बारिस हो सकती है जबकि विदर्भ एवं मराठवाड़ा संभाग में 18 जून से वर्षा की हालत में सुधार आने के आसार हैं।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33976</guid>				
                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:05:37 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[चावल और गेहूं के रिकॉर्ड स्टॉक से खाद्य सुरक्षा को खतरा नहीं]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्रीय पूल में चालू माह (जून) के आरंभ में चावल का स्टॉक 15 प्रतिशत बढ़कर एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जबकि गेहूं का स्टॉक भी बढ़कर पिछले पांच साल के ऊंचे स्तर पर पहुंचा। दोनों अनाज की अच्छी खरीद होने तथा पहले से बढ़ा भंडार मौजूद रहने के कारण स्टॉक में भारी वृद्धि हुई है।&nbsp;</span></p><p>भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश है। विशाल स्टॉक उपलब्ध होने से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा&nbsp; समाप्त हो गया है। इस बार अल नीनो के प्रभाव एवं कमजोर मानसून के कारण धान-चावल के उत्पादन में कुछ कमी आने की संभावना व्यक्त की जा रही है </p><p>लेकिन घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा कीमतों में किसी भी संभावित तेजी पर अंकुश लगाने के लिए सरकार के पास चावल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसी तरह गेहूं का भारी-भरकम स्टॉक मौजूद रहने से आपूर्ति के स्टॉक सीजन में सरकार खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के माध्यम से कीमतों को नियंत्रित करने का प्रयास कर सकती है।&nbsp;</p><p>केन्द्रीय पूल में धान और चावल का कुल स्टॉक 1 जून 2026 को तेजी से बढ़कर 684.30 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जो इस तिथि के लिए निर्धारित न्यूनतम बफर मात्रा 135 लाख टन से बहुत अधिक है। 1 जून 2026 को केन्द्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक भी उछलकर 534.10 लाख टन के उच्च स्तर पर पहुंच गया जो वर्ष 2021 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर तथा न्यूनतम आवश्यक बफर मात्रा 276 लाख टन से काफी अधिक है।&nbsp;</p><p>उद्योग-व्यापार समीक्षकों के अनुसार चावल का सरकारी स्टॉक पर्याप्त से भी ज्यादा है। इससे सरकार काफी हद तक निश्चिंत हो रही है। ऐसा लगता है कि 2026-27 सीजन के दौरान घरेलू उत्पादन में कुछ गिरावट आने के बावजूद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगने की आवश्यकता शायद नहीं पड़ेगी। आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन में भी धान-चावल की सरकारी खरीद जारी रहेगी।</p><p> सरकार अभी गेहूं के निर्यात को भी रोकने के बारे में नहीं सोच रही है। चावल का निर्यात तो पूरी तरह नियंत्रण मुक्त है जबकि गेहूं के लिए निर्यात का कोटा (50 लाख टन) नियत किया गया है इसके अलावा 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति भी दी गई है। चालू रबी मार्केटिंग सीजन में गेहूं की सरकारी खरीद 357 लाख टन के करीब पहुंच गई है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33975</guid>				
                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 17:54:08 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[एथनॉल निर्माण में चीनी का डायवर्जन हो सकता है कम]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक का कहना है कि एथनॉल के निर्माण में चीनी के डायवर्जन के प्रति भारतीय मिलर्स में दिलचस्पी घटती जा रही है क्योंकि इसका बिक्री मूल्य ज्यादा लाभदायक नहीं है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"> सरकार गन्ना अवयवों से निर्मित एथनॉल का दाम बढ़ाने से हिचक रही है। हालांकि चीनी के एक्सफैक्टरी न्यूनतम बिक्री मूल्य में भी फरवरी 2019 के बाद में कोई इजाफा नहीं हुआ है लेकिन फिर भी यह अपेक्षाकृत उचित स्तर पर बरकरार है।</span></p><p>गन्ना अवयवों गन्ना जूस, शुगर सीरप, बी हैवी शीरा एवं सी-हैवी शीरा से निर्मित एथनॉल का उत्पादन एवं विपणन धीरे-धीरे चीनी मिलों के लिए अनाकर्षक होता जा रहा है। </p><p>गन्ना से निर्मित एथनॉल का मूल्य अब मक्का आधारित एथनॉल के दाम से भी नीचे आ गया है। गन्ना अवयवों से निर्मित एथनॉल के दाम में कम से कम 5 रुपए प्रति लीटर का इजाफा होना आवश्यक है तभी मिलर्स इसका उत्पादन बढ़ाने में दिलचस्पी दिखा सकते हैं। </p><p>इसके अलावा गन्ना अवयवों का पर्याप्त स्टॉक भी उपलब्ध होना चाहिए और इसके उपयोग की कोई सीमा नियत नहीं होनी चाहिए। इस बार अल नीनो के कारण गन्ना की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है जिससे चीनी का उत्पादन घटने तथा भाव मजबूत रहने की संभावना है। ऐसी स्थिति में मिलर्स द्वारा एथनॉल के बजाए चीनी के उत्पादन को प्राथमिकता दी जा सकती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33971</guid>				
                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 13:36:38 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[गुजरात में खरीफ फसलों के बिजाई क्षेत्र में 25 प्रतिशत का इजाफा]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-25-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">गांधीनगर। देश के पश्चिमी प्रान्त- गुजरात में किसान खरीफ फसलों की खेती में अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं जिससे वहां इसका क्षेत्रफल गत वर्ष से आगे चल रहा है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार गुजरात में खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 3,41,188 हेक्टेयर से करीब 25 प्रतिशत बढ़कर इस बार 4,27,152 हेक्टेयर पर पहुंच गया है। दक्षिण पश्चिम मानसून के आने में देर होने के बावजूद खरीफ फसलों का रकबा बढ़ने से स्पष्ट संकेत मिलता है कि खेती के प्रति किसानों का आकर्षण कायम है।</span></p><p>वर्तमान खरीफ सीजन के लिए गुजरात में फसलों का सामान्य औसत क्षेत्रफल 85.30 लाख हेक्टेयर आंका गया है जिसके करीब 5 प्रतिशत भाग में बिजाई पूरी हो चुकी है। जब किसानों को मानसूनी वर्षा का सहारा मिलेगा तब फसलों की बिजाई की रफ्तार और भी बढ़ जाएगी।</p><p>एक खास बात यह है कि इस बार गुजरात के किसान कपास तथा मूंगफली की खेती पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। इन दोनों फसलों के उत्पादन में गुजरात देश का सबसे अग्रणी राज्य है जबकि अरंडी का सबसे ज्यादा उत्पादन भी गुजरात में ही होता है। 15 जून 2026 तक गुजरात में मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र 1,22,471 हेक्टेयर से बढ़कर 1,36,541 हेक्टेयर तथा तथा कपास का बिजाई क्षेत्र 1,87,681 हेक्टेयर से उछलकर 2,39,48 हेक्टेयर पर पहुंच गया। </p><p>अनाजी फसलों का क्षेत्रफल 282 हेक्टेयर से उछलकर 3612 हेक्टेयर, दलहनों का रकबा 232 हेक्टेयर से बढ़कर 673 हेक्टेयर तथा तिलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र 1,22,728 हेक्टेयर से सुधरकर 1,37,473 हेक्टेयर पर पहुंचा। ग्वार का रकबा भी तेजी से बढ़ा है।&nbsp;</p><p>उम्मीद की जा रही है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून 22-23 जून तक गुजरात के दक्षिणी तट पर पहुंच सकता है। इसके बाद खरीफ फसलों की बिजाई की गति और भी तेज हो जाएगी। केन्द्र सरकार ने मूंगफली तथा कपास के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भारी बढ़ोत्तरी कर दी है जिससे गुजरात के किसान काफी उत्साहित है। अन्य फसलों का रकबा भी बढ़ने के आसार हैं।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33969</guid>				
                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 13:08:16 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में 8 प्रतिशत का इजाफा]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-8-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। पिछले साल की तुलना में चालू वित्त वर्ष के शुरूआती दो महीनों में यानी अप्रैल-मई 2026 के दौरान देश से कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात 8 प्रतिशत बढ़कर 4.51 अरब डॉलर पर पहुंच गया। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">हालांकि इस अवधि के दौरान पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देशों में खासकर बासमती चावल, फलों एवं सब्जियों का शिपमेंट प्रभावित हुआ मगर अन्य क्षेत्रों में तथा दूसरे उत्पादों के निर्यात में अच्छी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। इसमें समुद्री उत्पाद भी शामिल है।&nbsp;</span></p><p>वाणिज्यिक सतर्कता एवं सांख्यिकी महानिदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल-मई 2026 के दौरान बासमती एवं गैर बासमती चावल के निर्यात से होने वाली आमदनी कुछ घटकर 2.04 अरब डॉलर पर अटक गई। ध्यान देने की बात है कि भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता देश है। </p><p>भारत से होने वाले कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के सकल निर्यात में सबसे बड़ा योगदान चावल का ही रहता है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से बासमती चावल का निर्यात कुछ घट गया। </p><p>वित्त वर्ष 2025-26 की सम्पूर्ण अवधि में भारत से इन उत्पादों का सकल निर्यात 2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 25.71 अरब डॉलर पर पहुंचा था मगर चावल का निर्यात 7.5 प्रतिशत गिरकर 11.53 अरब डॉलर रह गया था।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33967</guid>				
                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:38:49 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[गेहूं की सरकारी खरीद में 19 प्रतिशत की भारी वृद्धि]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-19-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। रबी सीजन के सबसे प्रमुख खाद्यान्न- गेहूं की सरकारी खरीद बिलकुल अंतिम चरण में पहुंच गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चालू रबी मार्केटिंग सीजन में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) तथा उसकी सहयोगी प्रांतीय एजेंसियों द्वारा अभी तक कुल 3,56,91517 टन गेहूं खरीदा जा चुका है जो पिछले सीजन की समान अवधि की कुल खरीद 2,99,36003 टन से 19.20 प्रतिशत तथा कुल नियत लक्ष्य 345.90 लाख टन से करीब 11 लाख टन ज्यादा है।&nbsp;</span></p><p>पिछले साल की तुलना में मौजूदा रबी मार्केटिंग सीजन के दौरान केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की सरकारी खरीद पंजाब में 1,19,23689 टन से सुधरकर 1,21,63233 टन, हरियाणा में 70,82,919 टन से बढ़कर 81,20,596 टन, मध्य प्रदेश में 77,74,491 टन से उछलकर 1,04,36,803 टन,</p><p> राजस्थान में 20,93,135 टन से बढ़कर 26,47,142 टन तथा उत्तर प्रदेश में 10,27,321 टन से उछलकर 21,56,420 टन पर पहुंच गई। इसके अलावा बिहार, गुजरात, उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश तथा चंडीगढ़ में भी केन्द्रीय पूल के लिए थोड़ी-बहुत मात्रा में गेहूं खरीदा गया।&nbsp;</p><p>उल्लेखनीय है कि मौजूदा रबी मार्केटिंग सीजन के लिए गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य पंजाब में 122 लाख टन, हरियाणा में 72 लाख टन, मध्य प्रदेश में 100 लाख टन, राजस्थान में 23.50 लाख टन तथा उत्तर प्रदेश में 25 लाख टन नियत किया। </p><p>मध्य प्रदेश, हरियाणा एवं राजस्थान में निर्धारित लक्ष्य से काफी अधिक गेहूं खरीद गया और पंजाब में यह नियत लक्ष्य के अत्यन्त निकट पहुंच गया लेकिन उत्तर प्रदेश में लक्ष्य से लगभग 3.50 लाख टन पीछे रह गया। औपचारिक तौर पर गेहूं की सरकारी खरीद का सीजन 30 जून 2026 को समाप्त होगा जबकि इसकी खरीद की वास्तविक प्रक्रिया लगभग बंद हो चुकी है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33965</guid>				
                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:29:07 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अल नीनो की आशंका के बावजूद खरीफ फसलों का उत्पादन लक्ष्य ऊंचा]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। हालांकि अल नीनो मौसम चक्र की आशंका को देखते हुए इस बार मानसून सीजन के दौरान देश में दीर्घकालीन औसत के सापेक्ष महज 90 प्रतिशत बारिश होने की संभावना व्यक्त की जा रही है </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">लेकिन इसके बावजूद केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने मौजूदा खरीफ सीजन के लिए खाद्यान्न के उत्पादन का लक्ष्य बढ़ाकर 1761.60 लाख टन निर्धारित किया है जो 2025-26 के कुल वास्तविक (संशोधित) उत्पादन 1760.40 लाख टन से कुछ अधिक है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">2026-27 के खरीफ कालीन खाद्यान्न के उत्पाद लक्ष्य में 1231.50 लाख टन चावल, 84 लाख टन दलहन, 310.40 लाख टन मक्का एवं 135.60 लाख टन पोषक अनाज (ज्वार, बाजरा, रागी आदि) का उत्पादन शामिल है। इसके अलावा 289.20 लाख टन तिलहनों के उत्पादन का लक्ष्य भी नियत किया।&nbsp;</span></p><p>&nbsp;मानसून की चाल अभी धीमी है और खरीफ फसलों की बिजाई गत वर्ष से पीछे चल रही है। मानसून के कमजोर रहने पर खासकर चावल एवं मक्का का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। दलहनों एवं तिलहनों की पैदावार बढ़ाने की कोशिश तो हो रही है मगर कम से कम चालू खरीफ सीजन में इसमें ज्यादा सफलता मिलने में संदेह है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33963</guid>				
                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:06:25 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[खाद्यान्न का सरकारी स्टॉक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। 2025-26 के खरीफ एवं रबी सीजन के दौरान धान तथा गेहूं की अच्छी खरीद होने तथा पिछला बकाया स्टॉक भी ऊंचा रहने से सरकारी गोदामों में खाद्यान्न का कुल स्टॉक बढ़कर एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 1 जून 2026 को केन्द्रीय पूल में करीब 12.20 करोड़ टन खाद्यान्न का भंडार मौजूद था जिसे अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। यह स्टॉक चावल की सम्पूर्ण वार्षिक घरेलू खपत के समतुल्य है।</span></p><p>खाद्यान्न के इस विशालकाय स्टॉक के सहारे सरकार आगामी समय में घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह&nbsp; सक्षम एवं सफल हो जाएगी। इस बार अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर पड़ने की आशंका है जिससे देश में खरीफ कालीन फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।&nbsp;</p><p>भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के आंकड़ों से पता चलता है कि 1 जून 2026 को केन्द्रीय पूल में उपलब्ध 1226.40 लाख टन खाद्यान्न के कुल स्टॉक में 683.40 लाख टन चावल, 534.10 लाख टन गेहूं तथा 9 लाख टन मोटे अनाज की मात्रा शामिल है। जहां तक चावल की बात है तो उसमें 287 लाख टन चावल के समतुल्य धान का स्टॉक भी सम्मिलित है। </p><p>2025-26 के दौरान राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून सहित अन्य तमाम सरकारी योजनाओं एवं कल्याणकारी कार्यक्रमों के अंतर्गत कुल 560.90 लाख टन खाद्यान्न का उपयोग होने का अनुमान है जिसमें 381 लाख टन चावल तथा 179.90 लाख टन गेहूं की निकासी शामिल है। </p><p>यदि 2026-27 में भी खपत की यही स्थिति रही तो सरकार के पास खाद्यान्न का भारी-भरकम स्टॉक बचा रह सकता है जिससे खरीफ उत्पादन में आने वाली थोड़ी-बहुत गिरावट से खाद्यान्न के कुल अधिशेष स्टॉक पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33961</guid>				
                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:26:50 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[देश के 9-10 राज्यों पर अल नीनो का गंभीर असर पड़ने की आशंका]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-9-10-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने चालू खरीफ सीजन के दौरान देश के उन 9-10 राज्यों के लिए विशेष एवं व्यापक प्रबंध करने का निर्देश दिया है जहां अल नीनो का प्रकोप अत्यन्त गंभीर रहने की आशंका है। कृषि मंत्री जिला स्तर के अधिकारियों, कृषि विभागों, कृषि विज्ञान केन्द्रों तथा अन्य विस्तार एजेंसियों को नियमित रूप से मीटिंग करने तथा पूरे समन्वय के साथ काम करने के लिए कहा है।&nbsp;</span></p><p>कृषि मंत्री ने वर्षा की कमी वाले जिलों के लिए अग्रिम आपदा कालीन योजना तैयार करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि कपास तथा दलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। </p><p>राज्यों को भी बारिश की दृष्टि से संवेदनशील जिलों की पहचान करने के लिए कहा गया है ताकि वहां फसल वार आपातकालीन प्लान पहले से तैयार किया जा सके। किसानों के पास विकल्प भी होना चाहिए कि यदि प्राकृतिक आपदाओं के कारण एक फसल का प्रदर्शन कमजोर पड़ जाए तो यथाशीघ्र दूसरी ऐसी फसल की खेती की जाए जो वहां उपयुक्त हो।&nbsp;</p><p>कृषि मंत्री का कहना था कि सरकार राज्यों को हर संभव सहयोग-समर्थन एवं प्रोत्साहन देने के लिए तैयार है। मानसून की स्थिति इस बार अच्छी नजर नहीं आ रही है। देश के विभिन्न भागों में वर्षा का अभाव देखा जा रहा है। इससे खरीफ फसलों की बिजाई एवं प्रगति पर असर पड़ सकता है। दलहन-तिलहन के महत्वपूर्ण उत्पादक राज्यों में वर्षा कम हो सकती है। </p><p>धान की खेती भी प्रभावित होने की आशंका है। सभी राज्यों को अपना अलग प्लान बनाना चाहिए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात एवं उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण दलहन-तिलहन उत्पादक राज्यों पर विशेष नजर रखी जा रही है। पूर्वी भारत एवं दक्षिणी प्रायद्वीप के साथ-साथ पश्चिमोत्तर भारत में धान का उत्पादन ज्यादा होता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33934</guid>				
                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:56:28 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मई में वस्तुओं का निर्यात बढ़कर 45 अरब डॉलर पर पहुंचा]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-45-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। भारत से वाणिज्यिक वस्तुओं का निर्यात मई 2025 की तुलना में मई 2026 के दौरान 18 प्रतिशत बढ़कर 45.20 अरब डॉलर पर पहुंचा जिससे पेट्रोलियम उत्पादों, इंजीनियरिंग सामानों तथा इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं के निर्माताओं को राहत मिली। तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद इस निर्यात प्रदर्शन को उत्साहवर्धक माना जा रहा है।</span></p><p>उधर विदेशों से इसी अवधि में वाणिज्यिक वस्तुओं का आयात भी 20.62 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 73.41 अरब डॉलर के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसके तहत खासकर पेट्रोलियम, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सोना तथा खाद्य तेलों के आयात खर्च में बढ़ोत्तरी हुई।</p><p> इसके फलस्वरूप भारत का विदेश व्यापार घाटा मई 2025 के 22.56 अरब डॉलर से उछलकर मई 2026 में 28.21 अरब डॉलर हो गया।&nbsp;</p><p>आयात में जबरदस्त इजाफा होने से देश के बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ गया। विदेशी निवेशकों ने भी डॉलर को भारत से बाहर भेजने की गति तेज कर दी। इससे मई में रुपया का जबरदस्त अवमूल्यन हो गया। </p><p>आयात पर भारतीय मुद्रा में खर्च और भी बढ़ गया। पश्चिम एशिया में संकट के कारण भारत से कई महत्वपूर्ण कृषि एवं खाद्य उत्पादों का निर्यात अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया। वैसे कुल मिलाकर निर्यात में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33932</guid>				
                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:31:16 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मई में सोयामील के उत्पादन एवं निर्यात में गिरावट]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">इंदौर। एक अग्रणी उद्योग संस्था- सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि मई 2026 में देश से केवल 50 हजार टन सोयामील का निर्यात हो सका जो मई 2025 के शिपमेंट 1.37 लाख टन से 64 प्रतिशत कम रहा। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इसी तरह सोयामील का निर्यात अक्टूबर 2025- मई- 2026 के आठ महीनों में लुढ़ककर 8.72 लाख टन पर अटक गया जबकि 2024-25 के मार्केटिंग सीजन की समान अवधि में यह 14.60 लाख टन पर पहुंच गया था।&nbsp;</span></p><p>सोपा की रिपोर्ट के अनुसार मई 2025 में 7.10 लाख टन सोयामील का घरेलू उत्पादन हुआ था जो मई 2026 में गिरकर 6.31 लाख टन रह गया। </p><p>2025-26 के आरम्भिक 8 महीनों (अक्टूबर-मई) में 57.60 लाख टन सोयामील का घरेलू उत्पादन हुआ जो 2024-25 सीजन के उत्पादन 62.30 लाख टन से काफी कम रहा।&nbsp;</p><p>घरेलू मंडियों में सोयाबीन की आवक मई 2025 के 6 लाख टन से घटकर मई 2026 में 5 लाख टन रह गई जबकि आठ माह की कुल आपूर्ति भी 83.50 लाख टन से गिरकर 72.50 लाख टन पर सिमट गई। </p><p>घरेलू प्रभाग में स्टॉक कम होने तथा भाव ऊंचा रहने से सोयाबीन का कुल आयात बढ़कर 9 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। अफ्रीकी देशों से भारी मात्रा में सोयाबीन का आयात हो रहा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33930</guid>				
                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:06:52 +0530</pubDate>
            </item>
                
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