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        <title><![CDATA[ Igrain India ]]></title>
        <link><![CDATA[ https://igrain.in/feeds ]]></link>
        <description><![CDATA[ Igrain India ]]></description>
        <language>en</language>
        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 09:05:41 +0530</pubDate>
  
                    <item>
                <title><![CDATA[सितम्बर के सूखे से कश्मीर के केसर पर खतरा]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">श्रीनगर। कश्मीर में तापमान सामान्य स्तर से ऊंचा चल रहा है जबकि वर्षा की कमी भी वहां चिंता का कारण बनी हुई है। केसर की फसल में फूल लगने की प्रक्रिया आरंभ होने वाली है और उससे पूर्व इस तरह का मौसम किसानों को विचलित कर रहा है। आमतौर पर अक्टूबर से केसर के पौधे में फूल लगना आरंभ हो जाता है।&nbsp;</span></p><p>उत्पादकों का कहना है कि केसर की फसल अब महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है जब इसे अनुकूल मौसम की जरूरत है सितम्बर का महीना किसानों की उम्मीदों को संवारने या बिगड़ने का साबित होता है। गर्मी के दिनों में पौधे अक्सर संकुचित हो जाते हैं लेकिन मानसून की वर्षा का सहारा मिलने के बाद इसका तेजी से विकास होता है और अक्टूबर तक आते आते इसमें फूल निकलने लगते हैं।&nbsp;</p><p>फ्लावरिंग के चरण में केसर के खेतों में नमी का पर्याप्त अंश मौजूद रहना आवश्यक है। इसके साथ-साथ तापमान भी सामान्य स्तर पर होना चाहिए। चालू माह के दौरान प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में वर्षा का अभाव एवं ऊंचा तापमान देखा जा रहा है जो फसल के लिए अनुकूल नहीं है। यद्यपि अभी हालात ज्यादा खराब नहीं हुए हैं और अगर अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश हो जाती है तो फसल की हालत बेहतर हो जाएगी और उत्पादन बढ़ने की उम्मीद भी रहेगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37595</guid>				
                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 19:28:46 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अगस्त में चावल का निर्यात बढ़ा- बागानी उत्पादों में मिश्रित रुख]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई में चावल का निर्यात प्रदर्शन कुछ कमजोर रहा था मगर अगस्त में यह सुधर गया। अगस्त 2025 के मुकाबले अगस्त 2026 के दौरान भारत से चावल के निर्यात में मात्रा एवं आमदनी की दृष्टि से 4 प्रतिशत का इजाफा हुआ। जबकि बागानी उत्पादों के निर्यात में मिश्रित रुख देखा गया। इसके तहत कॉफी एवं काजू के निर्यात में बढ़ोत्तरी हुई जबकि चाय, तम्बाकू एवं मसालों के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई।&nbsp;</span></p><p>आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अगस्त में चावल का निर्यात 4 प्रतिशत बढ़कर 91.782 करोड़ डॉलर पर पहुंचा। इसी तरह चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 5 महीनों में यानी अप्रैल-अगस्त 2026 के दौरान भी इसका निर्यात 2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 4.81 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे पूर्व जुलाई 2025 की तुलना में जुलाई 2026 के दौरान चावल का निर्यात 7 प्रतिशत घटकर 86.034 करोड़ डॉलर पर अटक गया था।&nbsp;&nbsp;</p><p>जहां तक बागानी उत्पादों का सवाल है तो काजू का निर्यात अगस्त में करीब 4 प्रतिशत बढ़कर 269.70 लाख डॉलर तथा&nbsp; अप्रैल-अगस्त में 2 प्रतिशत सुधरकर 1107.40 लाख डॉलर पर पहुंच गया। कॉफी के निर्यात में भी बढ़ोत्तरी हुई लेकिन मसालों का निर्यात अगस्त में 13 प्रतिशत से ज्यादा घटकर 28.875 करोड़ डॉलर तथा अप्रैल-अगस्त 2026 के पांच महीनों में 7 प्रतिशत से अधिक गिरकर 1.70 अरब डॉलर पर सिमट गया। उल्लेखनीय है कि भारत दुनिया में चावल तथा मसालों का सबसे प्रमुख निर्यातक देश बना हुआ है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37593</guid>				
                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 19:26:26 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[दक्षिणी राज्यों में भारी वर्षा होने की उम्मीद]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">तिरुअनन्तपुरम। उपग्रह से प्राप्त चित्र के अवलोकन-विश्लेषण से पता चलता है कि मानसून की वर्षा से मुक्त बादलों का एक शील्ड दक्षिण दिशा की ओर बढ़ रहा है जबकि बादलों का एक सघन क्षेत्र लक्ष्यदीप केरल तथा श्रीलंका के आसपास दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के ऊपर फैला हुआ है। लक्ष्य का यह झुण्ड बंगाल की खाड़ी तक देखा जा रहा है। श्रीलंका से लेकर अडंमान निकोबार द्वीप समूह तक इसका विस्तार हो चुका है।&nbsp;</span></p><p>बादलों का एक अन्य झुण्ड या समूह (क्लस्टर) उत्तरी पूर्वी अरब सागर के ऊपर भी दक्षिण-पूर्वी पाकिस्तान एवं गुजरात के उत्तरी तटीय क्षेत्रों के ऊपर सक्रिय अवस्था में हैं। दक्षिण-पूर्वी पाकिस्तान के ऊपर कम दाब का एक क्षेत्र बन रहा है जो अब गुजरात के सौराष्ट्र संभाग तथा उसके समीपवर्ती पूर्वोत्तर अरब सागर के अंदर पहुंच गया है।&nbsp;</p><p>मानसून का ट्रफ फिलहाल अपने केन्द्र बिंदु से आगे निकल कर डीसा, गुणा, सतना, डाल्टेन गंज, जमशेदपुर तथा दीघा से होते हुए बंगाल की खाड़ी में समाता प्रतीत हो रहा है। उत्तरी तटवर्ती उड़ीसा, मध्यवर्ती आसाम तथा दक्षिणी तटवर्ती आसाम तक इसका सिरा फैला हुआ है। उधर दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक से होते हुए एक अन्य वर्षा सहित ट्रफ तमिलनाडु एवं मन्नार की खाड़ी की तरफ सक्रिय होकर जा रहा है।&nbsp;</p><p>उपरोक्त सभी सिस्टम को देखते हुए अगले 5-6 दिनों के अंदर दक्षिण भारत के राज्यों- कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल एवं पांडीचेरी में भारी वर्षा होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इन प्रांतों में वर्षा की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है क्योंकि बारिश की कमी के कारण वहां खरीफ फसलों पर संकट बढ़ गया है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37591</guid>				
                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 18:02:31 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[तिलहन फसलों को भी बारिश की सख्त जरूरत]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। खरीफ कालीन तिलहन फसलों की बिजाई लगभग समाप्त हो चुकी है और तिल तथा सूरजमुखी का रकबा बढ़ने के बावजूद इसके कुल उत्पादन क्षेत्र में थोड़ी गिरावट आई है क्योंकि सोयाबीन, मूंगफली तथा अरंडी का क्षेत्रफल&nbsp; पीछे हो गया है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 193.90 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा है जो गत वर्ष के बिजाई क्षेत्र 194.07 लाख हेक्टेयर से सिर्फ 17 हजार हेक्टेयर कम है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 123.06 लाख हेक्टेयर से घटकर 122.08 लाख हेक्टेयर, </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">अरंडी का रकबा 9.31 लाख हेक्टेयर से गिरकर 8.36 लाख हेक्टेयर तथा मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 50.66 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 50.45 लाख हेक्टेयर रह गया। दूसरी ओर सूरजमुखी का उत्पादन क्षेत्र 67 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 1.29 लाख हेक्टेयर और तिल का क्षेत्रफल 9.64 लाख हेक्टेयर से उछलकर 11.02 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।</span></p><p>हालांकि मध्य प्रदेश एवं राजस्थान जैसे प्रांतों में सामान्य बारिश होने से तिलहन फसलों की हालत बेहतर बताई जा रही है लेकिन महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना तथा गुजरात के कुछ भागों में फसलों को भारी वर्षा की जरूरत है। वहां तिलहनों की फसल को खतरा बना हुआ है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37589</guid>				
                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 17:50:34 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मक्का के लिए पशु आहार पॉल्ट्री फीड उद्योग एवं एथनॉल निर्माण के बीच रहेगी प्रतिस्पर्धा]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">हैदराबाद। मानसून की कम बारिश के कारण इस वर्ष गन्ना की फसल कुछ कमजोर रहने की संभावना है जबकि सरकार का इरादा चीनी का अधिक से अधिक उत्पादन सुनिश्चित करने का है। इसके फलस्वरूप एथनॉल निर्माण में गन्ना जूस एवं बी-हैवी शीरा के उपयोग को अत्यन्त सीमित किया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो एथनॉल के उत्पादन में मक्का का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो सकता है। उधर पशु आहार एवं पॉल्ट्री फीड निर्माण उद्योग में मक्का की मांग पहले की भांति मजबूती बनी रहेगी। इस बार खरीफ सीजन में मक्का के बिजाई क्षेत्र में 3 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई है और मानसून की पर्याप्त वर्षा भी नहीं हुई है जिससे इस महत्वपूर्ण मोटे अनाज के उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है।&nbsp;</span></p><p>कम्पाउण्ड लिव स्टॉक फीड मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के चेयरमैन का कहना है कि यदि एथनॉल निर्माण में गन्ना अवयवों का इस्तेमाल घटाया अथवा रोका गया तो मक्का का उपयोग तेजी से बढ़ सकता है। इससे पशु आहार एवं पॉल्ट्री फीड उद्योग की कठिनाई बढ़ेगी क्योंकि उसे एथनॉल निर्माताओं की कठिन चुनौती एवं सख्त प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। चेयरमैन ने सरकार से पशु आहार (फीड) उद्योग के लिए मक्का की पर्याप्त आपूर्ति एवं उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कहा है। फीड निर्माण में मक्का का सर्वाधिक उपयोग होता है।&nbsp;</p><p>एसोसिएशन के चेयरमैन ने कहा है कि एथनॉल निर्माण में सरकारी अधिशेष चावल सहित अन्य अनाजों का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन पशु आहार / पॉल्ट्री फीड उद्योग को मक्का का स्टॉक अच्छा मिलना चाहिए क्योंकि उसके बगैर उसका काम ठीक ढंग से नहीं चल सकता है। सरकार को संतुलन की स्थिति बनाने के लिए कदम उठाना होगा। लिव स्टॉक फीड निर्माताओं के पास मक्का के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचेगा। </p><p>मक्का की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार के साथ लगातार सम्पर्क किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर मक्का का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 94.10 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 91.60 लाख हेक्टेयर रह गया है। कर्नाटक में भयंकर सूखा पड़ने से मक्का का रकबा गत वर्ष के 17 लाख हेक्टेयर से 21 प्रतिशत घटकर इस बार 13.38 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। महाराष्ट्र सहित कुछ अन्य राज्यों में भी मक्का के बिजाई क्षेत्र में गिरावट आई है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37587</guid>				
                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 17:30:21 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[महाराष्ट्र में सहकारी चीनी मिलों को मिलेगा आसान ऋण]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की सहकारी चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति मजबूत बनाने के लिए 750 करोड़ रुपए का आसान एवं सस्ता ऋण मंजूर किया है। राज्य में गन्ना की क्रशिंग अगले कुछ सप्ताहों में आरंभ होने वाली है। राज्य मंत्रिमंडल ने 15 सितम्बर की अपनी बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।&nbsp;</span></p><p>इस सस्ते ऋण से महाराष्ट्र की सहकारी चीनी मिलों को 2025-26 सीजन के गन्ना मूल्य बकाए का भुगतान करने तथा 2026-27 के सीजन में सुचारु ढंग से अपनी गतिविधियां संचालित करने में सहायता मिलेगी। चीनी मिलों पर गन्ना उत्पादकों का भारी-भरकम बकाया मौजूद है।&nbsp;</p><p>आधिकारिक सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र में चीनी मिलों को गन्ना के उचित एवं लाभकरी मूल्य (एफआरपी) का भुगतान करना पड़ता है जिसका निर्धारण केन्द्र द्वारा किया जाता है। इस सॉफ्ट ऋण से बकाया मूल्य का भुगतान सुनिश्चित होने पर गन्ना उत्पादकों को राहत मिलेगी। इसी तरह चीनी मिलों की वित्तीय कठिनाइयां भी दूर होंगी जिसे अगले सीजन में गन्ना क्रशिंग में सुविधा होगी।&nbsp;</p><p>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस स्कीम के अंतर्गत सरकारी चीनी मिलों के लिए ऋण प्राप्त के तरीके को आसान बनाया गया है और इस कर्ज पर लगने वाले ब्याज का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।</p><p>महाराष्ट्र की चीनी मिलों द्वारा किसानों को गन्ना के 99.5 प्रतिशत एफआरपी का भुगतान किया जा चुका है और इस तरह एफआरपी के क्लीयरेंस के मामले में महाराष्ट्र देश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है। ज्ञात हो कि महाराष्ट्र भारत में चीनी का सबसे प्रमुख तथा गन्ना का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। गन्ना उत्पादन में उत्तर प्रदेश पहले नम्बर पर रहता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37585</guid>				
                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 16:25:44 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अल नीनो की ताकत बढ़ी लेकिन आईओडी में सकारात्मक सुधार]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">सिडनी। अल नीनो मौसम चक्र की तीव्रता एवं ताकत लगातार बढ़ती जा रही है जिससे आगामी महीनों के दौरान मौसम के परिदृश्य में बदलाव का सिलसिला बरकरार रहेगा। प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान बढ़कर सामान्य स्तर से काफी ऊपर पहुंच गया है। नवीनतम नीनो 3.4 सूचकांक बढ़कर 2.51 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है जबकि आगामी महीनों के दौरान इसकी सघनता और भी बढ़ने की संभावना है।</span></p><p>लेकिन इसके साथ-साथ हिन्द महासागर का डायपोल (आईओडी) सामान्य घनात्मक आधार स्तर से ऊपर पहुंच गया है जो भारत सहित दक्षिण एशिया में अल नीनो के प्रभाव को सीमित रखने में सक्षम हो सकता है। अभी तक इस सकारात्मक आईओडी में निरंतरता का अभाव देखा जा रहा था लेकिन अब यह मूल आधार से ऊपर चला गया है।</p><p>ऑस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो का कहना है कि अल नीनो का प्रभाव मार्च 2027 तक कायम रहेगा। ब्यूरों की दक्षिणी गोलार्द्ध&nbsp; निगरानी रिपोर्ट में कहा गया है कि वसंतकाल तक अगर आईओडी का नया स्वरूप विकसित हुआ तो हिन्द महासागर के आसपास अवस्थित देशों में अल नीनो का प्रभाव घट सकता है।&nbsp;</p><p>उधर सभी मौसम मॉडल्स से संकेत मिलता है कि ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर की समुद्री सतह की गर्माहट सितम्बर-नवम्बर की अवधि में बढ़ने वाली है जिससे दक्षिणी गोलार्द्ध में अल नीनो का ज्यादा असर पड़ सकता है। इससे ब्राजील-अर्जेन्टीना में कृषि उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका रहेगी।&nbsp;</p><p>भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून का समय अब समाप्त होने वाला है और 19 सितम्बर से इसकी वापसी यात्रा शुरू होने की संभावना है। प्रस्थान के क्रम में मानसून देश के कुछ भागों को बारिश की सौगात दे सकता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37583</guid>				
                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 16:22:54 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[गन्ना की कमी से उत्तर प्रदेश में एक एथनॉल प्लांट की कठिनाई बढ़ी]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मेरठ। उत्तर प्रदेश के खड्डा में एक लाख लीटर की दैनिक उत्पादन क्षमता वाली एक एथनॉल निर्माण इकाई को लांच&nbsp; करने की योजना को कुछ खास कारणों से धक्का लग रहा है। हालांकि इसे सभी तकनीकी अनुमोदन प्राप्त हो चुका है। इसके सभी कागजात (दस्तावेज) दुरुस्त हो गए हैं और धनराशि की व्यवस्था भी हो गई है लेकिन फिर भी इसमें कार्य शुरू होने में संदेह बना हुआ है। इसका पहला और प्रमुख कारण आईपीएल शुगर मिल को गन्ना की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होना है। इसके फलस्वरूप एथनॉल निर्माण के लिए आवश्यक मात्रा में शीरा मिलना मुश्किल हो रहा है।&nbsp;</span></p><p>इस चीनी मिल की कुल गन्ना क्रशिंग क्षमता 45 लाख क्विंटल की है जबकि 2025-26 के सीजन में इसे महज 27 लाख क्विंटल गन्ना प्राप्त हो सका। विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या केवल क्षेत्रीय स्तर पर गन्ना फसल की कमी नहीं है बल्कि स्थानीय खरीद केन्द्रों एवं मिल गेट तक गन्ना की पहुंच में बाधा भी है। अन्य चीनी मिलों के साथ गन्ना की आपूर्ति के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। जो मिल किसानों को ज्यादा दाम देती है उसे किसान अधिक मात्रा में गन्ना की आपूर्ति करते हैं।&nbsp;</p><p>इस व्यवस्था से चीनी मिलों के बीच गन्ना की आपूर्ति के मोर्चे पर असंतुलन पैदा होता है। दिलचस्प तथ्य यह है कि खड्डा फैक्टरी के लिए फरवरी 2020 में पहल शुरू की गई थी और उस समय जिला प्रसाशन तथा पर्यावरण विशेषज्ञों के साथ-साथ गन्ना उत्पादकों के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की गई थी। पहले इसकी एथनॉल उत्पादन क्षमता 60 हजार लीटर की आंकी गई थी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37580</guid>				
                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 15:36:48 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[भारत में चावल का उत्पादन 1470 लाख टन होने का उस्डा का अनुमान]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-1470-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) ने अपनी अगस्त की रिपोर्ट में 2026-27 सीजन के दौरान भारत में 1500 लाख&nbsp; (15 करोड़) टन चावल के उत्पादन का अनुमान लगाया था जिसे सितम्बर की रिपोर्ट में 30 लाख टन घटाकर 1470 लाख टन निर्धारित किया है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इस वर्ष खरीफ सीजन में धान का क्षेत्रफल करीब 17 लाख हेक्टेयर या 4 प्रतिशत घट गया है और कई क्षेत्रों में मानसून की वर्षा का भी अभाव देखा जा रहा है। भारत में लगभग 80-85 प्रतिशत धान-चावल का उत्पादन खरीफ सीजन में होता है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">दिलचस्पी तथ्य यह है कि अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) की विदेश कृषि सेवा (फास) के भारत स्थित कार्यालय (उस्डा पोस्ट) ने भी 2026-27 सीजन के दौरान 1470 लाख टन चावल का उत्पादन होने का अनुमान लगाया है। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक 2025-26 के सीजन में चावल का घरेलू उत्पादन तेजी से उछलकर 1540 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।&nbsp;</span></p><p>उस्डा ने भारत में चावल का आरम्भिक स्टॉक 585 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है जो अगस्त रिपोर्ट के अनुमान 540 लाख टन से 45 लाख टन ज्यादा है इसलिए उत्पादन में गिरावट आने के बावजूद इसकी कुल उपलब्धता में कमी नहीं आएगी। </p><p>लेकिन खपत में बढ़ोतरी होने के कारण मार्केटिंग सीजन के अंत में चावल का बकाया अधिशेष स्टॉक कुछ घटकर 555 लाख टन पर आ सकता है। वैसे यह स्टॉक अगस्त के अनुमान 510 लाख टन से 45 लाख टन ज्यादा है।&nbsp;</p><p>बेहतर उपलब्धता एवं मजबूत वैश्विक मांग के कारण भारत से चावल के शानदार निर्यात का सिलसिला 2026-27 सीजन के दौरान भी जारी रहेगा और घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति की स्थिति सामान्य बनी रहेगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37578</guid>				
                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 15:31:52 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[केन्द्रीय पूल में खाद्यान्न का स्टॉक ऊंचे स्तर पर बरकरार]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। गेहूं की सरकारी खरीद बंद होने तथा गोदामों से अनाज की नियमित निकासी जारी रहने के कारण 1 नवम्बर 2026 को केन्द्रीय पूल में खाद्यान्न (चावल एवं गेहूं) का स्टॉक घटकर 870.45 लाख टन रह गया जो 1 अगस्त 2026 को उपलब्ध स्टॉक 907.32 लाख टन से 36.87 लाख टन कम मगर सितम्बर 2025 के स्टॉक 702.03 लाख टन से 168.42 लाख टन ज्यादा है। सितम्बर 2024 में केवल 574.57 लाख टन खाद्यान्न का स्टॉक मौजूद था जिसके मुकाबले सितम्बर 2026 का स्टॉक 295.88 लाख टन अधिक है।&nbsp;</span></p><p>अगस्त की तुलना में सितम्बर के दौरान केन्द्रीय पूल में चावल का स्टॉक 402.01 लाख टन से गिरकर 390.53 लाख टन तथा गेहूं का स्टॉक 505.31 लाख टन से घटकर 479.92 लाख टन रह गया। चावल के स्टॉक में कम गिरावट आने का कारण यह है कि राइस मिलर्स द्वारा भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को नियमित रूप से कस्टम मिलिंग चावल की आपूर्ति की जा रही है।&nbsp;</p><p>इसके अलावा धान का स्टॉक अगस्त के मुकाबले सितम्बर में 353.47 लाख टन से घटकर 307.51 लाख टन तथा मोटे अनाजों का स्टॉक 9.58 लाख टन से गिरकर 7.14 लाख टन पर आ गया। अगले महीने (अक्टूबर) से धान की नई फसल की कटाई-तैयारी एवं सरकारी खरीद आरंभ होने वाली है जिससे चावल के स्टॉक में क्रमिक रूप से सुधार हो सकता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37575</guid>				
                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 13:17:55 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[यूपीआई से भुगतान पर लगने वाले चार्ज का समझना आवश्यक]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। यूपीआई से चुनिंदा लेन देन पर 15 अक्टूबर 2026 से एक मर्चेन्ट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने का निर्णय लिया गया है जिससे कारोबारियों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। यह जानने समझने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या यूपीआई से भुगतान करने के क्रम में यूजर्स (उपयोगकर्ताओं) को शुल्क या चार्ज का भुगतान करना आवश्यक होगा ? इसका संक्षिप्त उत्तर है- नहीं।&nbsp;</span></p><p>वस्तुतः नया एमडीआर व्यापारिक भुगतान (मर्चेंट-पेमेंट) इकोसिस्टम के अंतर्गत वसूला जाने वाला एक चार्ज है। यह कोई ऐसा शुल्क (फीस) नहीं है जिसका भुगतान ग्राहकों को यूपीआई से कारोबारी (आपसी) लेन-देन वाले समय चुकाना पड़ता है। व्यक्ति से व्यक्ति के बीच यूपी आई से राशि का हस्तांतरण चार्ज से बिल्कुल मुक्त रहेगा जबकि व्यापारियों को किए जाने वाले 2000 रुपए तक के भुगतान पर भी कोई चार्ज नहीं लगेगा। सरकार का कहना है कि इस नए प्रावधान से लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन अप्रभावित रहेगा।</p><p>लेकिन 2000 रुपए से ऊपर के कुछ खास मर्चेंट्स ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट साइड के खर्च में बदलाव हो जाएगा। मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) डिजीटल पेमेंट को स्वीकार करने से सम्बन्धित फीस है। नए फ्रेमवर्क के अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति किसी व्यापारी को 2000 रुपए से अधिक करोबार के लिए यूपीआई से भुगतान करता है तो इस पर 0.4 प्रतिशत का मानक एमडीआर प्रभावित होगा।&nbsp;</p><p>75 हजार रुपए या इससे अधिक के लेन देने के लिए एमडीआर की उच्चतम सीमा 300 रुपए प्रति ट्रांजैक्शन निर्धारित की गई है। यह नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने वाला है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37573</guid>				
                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 12:56:22 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[चीनी आयातकों के लिए कोटा सरेंडर करने की समय सीमा बढ़ी]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने इस वर्ष टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) प्रणाली के अनर्गत 10 लाख टन कच्ची चीनी (रॉ शुगर) के आयात की अनुमति मिलर्स / रिफाइनर्स को दी थी और उसे इसकी अधिकांश मात्रा का आवंटन भी कर दिया था। लेकिन कई मिलें अब इसके आयात की इच्छुक नहीं हैं। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इसे देखते हुए विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने चीनी आयातकों के लिए कोटा सरेंडर करने (सरकार को वापस लौटाने) की समय सीमा को 30 सितम्बर तक बढ़ा दिया है।&nbsp;</span></p><p>टीआरक्यू के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की स्वीकृति प्रदान की गई थी। डीजीएफटी ने कहा है कि जो आयातक अभी तक कोटे का उपयोग नहीं कर पाए हैं और आगे भी इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं वे अपने आवंटित कोटे को 30 सितम्बर तक वापस लौटा सकते हैं। </p><p>यदि आयातकों के कोटे का कुछ भाग भी बाकी रह गया है तो उसे वापस लौटाया जा सकता है। इसके लिए आयातकों को कुछ राशि का भुगतान करना पड़ेगा। यह राशि आवंटित कोटे वाली चीनी के मूल्य, निर्यात खर्च (शिपमेंट चार्ज) एवं बीमा व्यय की अनुमानित रकम का 0.5 प्रतिशत होगी। </p><p>उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की स्वीकृति देने के लिए जो अधिसूचना जारी की गई थी उसमें इस बात का जिक्र था कि कोटा लौटाने की स्थिति में आयातकों को कुछ राशि का भुगतान करना आवश्यक होगा। </p><p>अगले महीने से देश में गन्ना की क्रशिंग आरंभ होने वाली है जबकि वैश्विक बाजार में चीनी का भाव ऊंचा और मजबूत होने लगा है इसलिए कुछ मिलर्स अपने कोटे को सरेंडर करना चाहते हैं।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37571</guid>				
                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 12:18:27 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[बारिश की भारी कमी से आंध्र प्रदेश में फसलों को नुकसान]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">विजयवाड़ा। दक्षिण भारत के एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक राज्य- आंध्र प्रदेश को फिलहाल भयंकर सूखे के संकट का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वहां दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में सामान्य औसत से बहुत कम वर्षा हुई है। राज्य के विभिन्न भागों में खेतों की मिटटी में नरमी का भारी अभाव होने से खरीफ फसलों के सूखने का खतरा पैदा हो गया है।&nbsp;</span></p><p>आंध्र प्रदेश में खरीफ फसलों की बिजाई तो लगभग सामान्य ढंग से हुई है लेकिन वर्षा की कमी से उसकी प्रगति में काफी बाधा पड़ रही है। खरीफ सीजन के दौरान वहां धान, मक्का, कपास एवं तुवर आदि की खेती बड़े पैमाने पर होती है। वर्षा के अभाव में धान का रकबा काफी घट गया है।&nbsp;</p><p>जून-अगस्त की तिमाही के दौरान आंध्र प्रदेश में केवल 197.6 मि०मी० बारिश हुई जो दीघकालीन औसत 424.10 मि०मी० के आधे से भी काफी कम है। वर्षा में 53.4 प्रतिशत की भारी गिरावट आने तथा बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक कम रहने से खरीफ फसलों की सिंचाई नहीं हो सकी। </p><p>इससे उत्पादन घटने तथा किसानों की आय में कमी आने की आशंका बढ़ गई है। सामान्य औसत के मुकाबले मानसूनी वर्षा में कमी जून में 25.2 प्रतिशत थी जो जुलाई में बढ़कर 67.9 प्रतिशत पर पहुंच गई। अगस्त में भी बारिश की कमी 55.9 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बरकरार रही।&nbsp;</p><p>इस बार रायल सीमा संभाग और दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश में वर्षा का भारी अभाव देखा जा रहा है जबकि उत्तरी तटीय भाग के कुछ क्षेत्रों में बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। आंध्र प्रदेश में खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष की तुलना में तथा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल के मुकाबले पीछे है और इसका ठीक से विकास भी नहीं हो रहा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37568</guid>				
                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 11:29:03 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[रिकॉर्ड फ्री सेल कोटा से चीनी बाजार पर दबाव बढ़ने की संभावना]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्र सरकार द्वारा चालू माह (सितम्बर) के लिए कुल मिलाकर 26.50 लाख टन चीनी का रिकॉर्ड फ्री सेल कोटा नियत किया गया है जिससे घरेलू बाजार में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ने एवं कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना है। अब चीनी का फ्री सेल कोटा मासिक आधार पर नहीं बल्कि पाक्षिक आधार पर नियत किया जाता है।&nbsp;</span></p><p>सितम्बर के प्रथम पखवाड़े (1-15 सितम्बर) के लिए 13 लाख टन एवं दूसरे पखवाड़े (16-30 सितम्बर) के लिए 13.50 लाख टन चीनी की घरेलू बिक्री का कोटा नियत किया गया जिससे सितम्बर 2026 का पूरा कोटा बढ़कर 26.50 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जो अगस्त के सम्पूर्ण कोटा 22.50 लाख टन से 4 लाख टन ज्यादा है।&nbsp;</p><p>हालांकि अभी महाराष्ट्र सहित कुछ अन्य राज्यों में गणेश चतुर्थी का त्यौहार काफी धूमधाम से मनाया जा रहा है जिससे वहां चीनी की मांग एवं खपत बढ़ रही है। लेकिन उसके मुकाबले 13.50 लाख टन का फ्री सेल कोटा काफी बड़ा प्रतीत होता है। </p><p>चीनी के एक्स फैक्टरी मूल्य एवं थोक बाजार भाव में शीर्ष स्तर के मुकाबले काफी गिरावट आ चुकी है लेकिन खुदरा दाम अब भी काफी ऊंचा चल रहा है। सरकार इसे भी सामान्य स्तर (40-45 रुपए प्रति किलो) पर लाने की कोशिश कर रही है। जुलाई में चीनी का यही रेट चल रहा था। त्यौहारी सीजन अभी जारी है मगर इसका पीक समय अक्टूबर-नवम्बर में आएगा।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37566</guid>				
                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 10:34:48 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[सितम्बर के दूसरे हाफ के लिए 13.50 लाख टन चीनी का फ्री सेल कोटा जारी]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-13-50-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय ने त्यौहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए चालू माह के दूसरे पखवाड़े (16-30 सितम्बर) के लिए 13.50 लाख टन चीनी की घरेलू बिक्री का कोटा जारी किया है जबकि प्रथम पखवाड़े (1-15 सितम्बर) के लिए 13 लाख टन का कोटा घोषित किया गया था। इस तरह पूरे सितम्बर माह के लिए कुल 26.50 लाख टन चीनी का फ्री सेल कोटा निर्धारित किया गया है ताकि इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ सके।&nbsp;</span></p><p>पहले चीनी की घरेलू बिक्री का मासिक कोटा निर्धारित होता था लेकिन अब खाद्य मंत्रालय ने प्रत्येक पखवाड़े के लिए कोटा आवंटित करने का निर्णय लिया है। ध्यान देने की बात है कि अगस्त 2026 की पूरी अवधि के लिए कुल 22.50 लाख टन चीनी का फ्री सेल कोटा नियत किया गया था जबकि सितम्बर की पूरी अवधि का कोटा उससे 4 लाख टन ज्यादा है। अगस्त 2025 में भी 22.50 लाख टन का ही कोटा घोषित हुआ था जबकि जुलाई 2026 की सम्पूर्ण अवधि के लिए घोषित 26.50 लाख टन चीनी का कोटा इस माह के लिए अब तक का सबसे बड़ा कोटा माना जा रहा है।&nbsp;</p><p>सरकार को उम्मीद है कि इस विशाल कोटे की बदौलत बाजार में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति एवं उपलब्धता सुनिश्चित&nbsp; करने और कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाने में सहायता मिलेगी। राष्ट्रीय स्तर पर चीनी का औसत खुदरा मूल्य अब भी 60 रुपए प्रति किलो के आसपास चल रहा है जबकि एक्स फैक्टरी मूल्य में भारी कमी आ चुकी है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37556</guid>				
                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 19:20:49 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[नेपाल से रिफाइंड खाद्य तेलों का विशाल आयात होने से रिफाइनर्स चिंतित]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। भारत के उत्तरी पड़ोसी देश- नेपाल से सीमा सड़क मार्ग से जटिल शुल्क मुक्त खाद्य तेलों का विशाल आयात होने से भारतीय रिफाइनर्स की चिंता काफी बढ़ गई है। सस्ते दाम पर नेपाल से आयातित रिफाइंड खाद्य तेल की प्रतिस्पर्धा में स्वदेशी तेल का टिकना मुश्किल हो रहा है जबकि आयात की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है।&nbsp;</span></p><p>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्तमान मार्केटिंग सीजन के आरंभिक 10 महीनों में यानी नवम्बर 2025 से अगस्त 2026 के दौरान नेपाल से भारत में 5,98,594 टन खाद्य तेलों का आयात हुआ। इसमें 28,728 टन आरबीडी पामोलीन 5,31,557 टन रिफाइंड सोयाबीन तेल, 33,881 टन रिफाइंड सूरजमुखी तेल तथा 4428 टन रेपसीड या अन्य तेल का आयात शामिल रहा।&nbsp;</p><p>ध्यान देने की बात है कि नेपाल में तिलहन-तेल का उत्पादन बहुत कम होता है और वह विदेशों से क्रूड श्रेणी का खाद्य तेल मंगाकर उसकी रिफाइनिंग करता है। बाद में इस रिफाइंड तेल को भारतीय बाजार में भेज देता है। यह रिफाइंड खाद्य तेल खासकर उत्तरी भारत में बड़े पैमाने पर बिकता है जिससे स्वदेशी उद्योग को नुकसान होता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37554</guid>				
                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 19:17:06 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मटर बाजार में स्थिरता, सीमित उपलब्धता और आगामी मांग से तेजी की उम्मीद]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">बिक्री सुस्त रहने से मटर में लिवाली कमजोर बनी हुई है, जिसके चलते आज कीमतों में स्थिरता का रुख रहा। हालांकि, सीमित उपलब्धता और आगामी त्योहारी मांग को देखते हुए बाजार में आगे तेजी की संभावनाएं मजबूत नजर आ रही हैं। रूस से मार्च से पहले बड़ी मात्रा में मटर की सप्लाई आने की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इससे आने वाले महीनों में आयातित मटर की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, पोर्ट पर उपलब्धता लगातार घट रही है और कोलकाता पोर्ट पर कनाडाई मटर की उपलब्धता लगभग नगण्य बनी हुई है। बाजार के लिए एक और सकारात्मक पहलू यह है कि पुरानी देसी मटर का स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">वहीं, अक्टूबर से देसी मटर की नई फसल की बिजाई शुरू होने के साथ बीज की मांग में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है। इससे बाजार में उपलब्ध मटर पर अतिरिक्त मांग का दबाव बन सकता है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">आगामी त्योहारी सीजन और दिवाली की खरीदारी शुरू होने पर मटर की घरेलू मांग में सुधार की संभावना है। फिलहाल बिक्री कमजोर होने से तेजी सीमित है, लेकिन जैसे-जैसे त्योहारी मांग बढ़ेगी और आयातित माल की उपलब्धता घटेगी, बाजार में लिवाली मजबूत हो सकती है। और कीमतों को समर्थन मिल सकता है।</span></p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37552</guid>				
                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 18:42:37 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अर्जेन्टीना बना भारत को खाद्य तेलों की सर्वाधिक आपूर्ति करने वाला देश]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। लैटिन अमरीका में अवस्थित अर्जेन्टीना अब भारत को खाद्य तेलों का सबसे बड़ा निर्यातक देश बन गया है जबकि इंडोनेशिया को पीछे छोड़कर मलेशिया दूसरे नम्बर पर आ गया है। भारत से खाद्य तेलों का निर्यात करने के मामले में रूस चौथे एवं ब्राजील पांचवें नम्बर पर बरकरार है।&nbsp;</span></p><p>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि नवम्बर 2025 से अगस्त 2026 के 10 महीनों में भारत में करीब 136.20 लाख टन खाद्य तेल मंगाया गया जिसमें 94 हजार टन आर बी डी पामोलीन, 64.22 लाख टन क्रूड पाम तेल, 18 हजार टन क्रूड पाम कर्नेल तेल, 40.30 लाख टन क्रूड सोयाबीन तेल, 5.32 लाख टन रिफाइंड सोयाबीन तेल, 24.81 लाख टन क्रूड सूरजमुखी तेल, 34 हजार टन रिफाइंड सूरजमुखी तेल तथा 9 हजार टन से कुछ अधिक क्रूड रेपसीड तेल एवं अन्य तेलों का आयात शामिल रहा।&nbsp;</p><p>समीक्षाधीन अवधि के दौरान भारत में अर्जेन्टीना से 30.59 लाख टन, मलेशिया से 26.21 लाख टन, इंडोनेशिया से 25.68 लाख टन, रूस से 12.68 लाख टन तथा ब्राजील से 10.89 लाख टन खाद्य तेल मंगाया गया। ये पांच देश ऐसे हैं जहां से 10 लाख टन से अधिक खाद्य तेलों का आयात किया गया। इसके अलावा नवम्बर 2025- अगस्त - 2026 के दस महीनों के दौरान थाईलैंड से 7.35 लाख टन, नेपाल से 5.99 लाख टन, यूक्रेन से 3.60 लाख टन, चीन से 3.04 लाख टन, संयुक्त अरब अमीरात से 5 हजार टन और दुनिया के अन्य देशों से 10.53 लाख टन खाद्य तेलों का आयात हुआ।&nbsp;</p><p>इंडोनेशिया मलेशिया एवं थाईलैंड से मुख्यतः पाम तेल का आयात हुआ जबकि अर्जेन्टीना, ब्राजील एवं चीन से क्रूड सोयाबीन तेल तथा रूस, यूक्रेन तथा अर्जेन्टीना से क्रूड सूरजमुखी तेल मंगाया गया। नेपाल से बड़े पैमाने पर रिफाइंड खाद्य तेलों का आयात हुआ। यूएई से रेपसीड तेल आया।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37550</guid>				
                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 17:57:11 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[बिहार के 15 जिलों में भयंकर बाढ़ से खरीफ फसलों को नुकसान]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-15-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">पटना। चालू माह के दौरान सामान्य औसत से अधिक वर्षा होने तथा कई नदियों का जल स्तर बढ़ने से बिहार के 15 जिलों में भयंकर बाढ़ का प्रकोप देखा जा रहा है। इससे न केवल करीब 49 लाख लोग प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं बल्कि लाखों हेक्टेयर में खड़ी खरीफ फसलें भी जल मग्न हो गई हैं। स्थानीय मौसम कार्यालय के अनुसार सितम्बर 2026 में अभी तक बिहार में 111.7 मि०मी० बारिश हो चुकी है जो सामान्य स्तर से करीब 13 प्रतिशत ज्यादा है।&nbsp;</span></p><p>नेपाल के उद्गम वाले इलाकों में जबरदस्त बारिश होने से बिहार की नदियां उफान पर हैं। नदियों का पानी अपनी सीमा से आगे बढ़कर आसपास के क्षेत्रों में फैल गया है। जिन जिलों में भयंकर बाढ़ का प्रकोप देखा जा रहा है उसमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, बक्सर, भागलपुर, बेगूसराय, मुंगेर, समस्तीपुर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा एवं अररिया शामिल है। पहले सहरसा एवं सुपौल में भी भयंकर बाढ़ आती थी लेकिन इस बार वहां इसकी विभीषिका कम देखी जा रही है। </p><p>गंगा, कोशी, गंडक एवं बागमती सहित कई अन्य नदियों में जगह-जगह पानी का स्तर खतरे के निशाल से काफी ऊपर पहुंच गया है। हालांकि खरीफ सीजन के दौरान बिहार में दलहन-तिलहन फसलों की खेती अपेक्षाकृत कम क्षेत्रफल में होती है मगर धान, गन्ना एवं मक्का का रकबा बड़ा रहता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37547</guid>				
                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 17:19:05 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अगस्त में खाद्य तेलों के आयात में एक लाख टन से अधिक की गिरावट]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। स्वदेशी वनस्पति तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र एक अग्रणी संगठन- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि अगस्त 2026 के दौरान देश में 15.72 लाख टन खाद्य तेल का आयात हुआ जो जुलाई के आयात 15.50 लाख टन से 22 हजार टन ज्यादा मगर अगस्त 2025 के आयात 16.79 लाख टन से 1.07 लाख टन कम है।&nbsp;</span></p><p>उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक चालू मार्केटिंग सीजन के शुरूआती 10 महीनों में यानी नवम्बर 2025 से अगस्त 2026 के दौरान देश में खाद्य तेलों का कुल आयात बढ़कर 136.20 लाख टन पर पहुंच गया जो 2024-25 सीजन की समान अवधि के आयात 130.25 लाख टन से करीब 6 लाख टन अधिक रहा।&nbsp;</p><p>दिलचस्प तथ्य यह है कि मौजूदा मार्केटिंग सीजन में खाद्य तेलों का सर्वाधिक आयात अगस्त में ही हुआ। इससे पूर्व जुलाई में भी इसका भारी आयात हुआ था। त्यौहारी सीजन के दौरान खाद्य तेलों की मांग एवं खपत में होने वाली वृद्धि को देखते हुए रिफाइनर्स द्वारा विदेशों से इसका आयात बढ़ाया जा रहा है।&nbsp;</p><p>'सी' की रिपोर्ट के अनुसार 1 सितम्बर 2026 को बंदरगाहों पर 11.03 लाख टन तथा पाइप लाइन में 9.40 लाख टन के साथ कुल 20.43 लाख टन खाद्य तेलों का स्टॉक मौजूद था जो 1 अगस्त को उपलब्ध स्टॉक 20.12 लाख टन तथा 1 सितम्बर 2025 को मौजूदा स्टॉक 18.65 लाख टन से ज्यादा रहा। सितम्बर 2026 के आरंभ में भारतीय बंदरगाहों पर 4.02 लाख टन क्रूड पाम तेल एवं क्रूड पाम कर्नेल तेल, 18 हजार टन आरबीडी पामोलीन, 3.90 लाख टन क्रूड डिगम्ड सोयाबीन तेल तथा 2.93 लाख टन क्रूड सूरजमुखी तेल का स्टॉक मौजूद था। खाद्य तेलों का आयात नियमित रूप से जारी है।&nbsp;</p><p>2024-25 की तुलना में 2025-26 सीजन के आरंभिक 10 महीनों के दौरान भारत में रिफाइंड खाद्य तेल का आयात 16.36 लाख टन से घटकर 6.59 लाख टन पर अटक गया जबकि क्रूड खाद्य तेलों का आयात 113.88 लाख टन से उछलकर 129.61 लाख टन पर पहुंच गया।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37545</guid>				
                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 16:37:49 +0530</pubDate>
            </item>
                
    </channel>

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