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        <title><![CDATA[ Igrain India ]]></title>
        <link><![CDATA[ https://igrain.in/feeds ]]></link>
        <description><![CDATA[ Igrain India ]]></description>
        <language>en</language>
        <pubDate>Mon, 04 May 2026 09:51:16 +0530</pubDate>
  
                    <item>
                <title><![CDATA[महाराष्ट्र में ओएमएसएस के तहत चावल की बिक्री जारी]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के क्षेत्रीय कार्यालय ने महाराष्ट्र में खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के अंतर्गत अगस्त 2025 के प्रथम सप्ताह से ही ई-नीलामी एवं बल्क मूवमेंट के जरिए चावल की बिक्री आरंभ कर दी थी। इसका उद्देश्य चावल की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाना तथा कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाते हुए बाजार को स्थिर रखना था।&nbsp;</span></p><p>सरकारी चावल का ऑफर सप्ताहिक ई-नीलामी के माध्यम से दिया जा रहा है जबकि कुछ एजेंसियों एवं बल्क खरीदारों को सीधे गोदामों से भी यह उपलब्ध करवाया जा रहा है। 29 एवं 30 अप्रैल 2026 को आयोजित ई-नीलामी में 10 हजार टन चावल की बिक्री का ऑफर दिया गया जिसकी खरीद के लिए मिलर्स, व्यापारी एवं बल्क खरीदार पात्र माने गए। नियमानुसार प्रत्येक बिडर को कम से कम 1 टन तथा अधिक से अधिक 7000 टन चावल की खरीद की अनुमति दी&nbsp; जाती है।&nbsp;</p><p>जहां तक डेडिकेटेड मूवमेंट की बात है तो इसके तहत 50 हजार टन सामान्य चावल एवं 40 हजार टन गैर-एफ आर के&nbsp; कस्टम मिल्ड चावल की बिक्री का ऑफर दिया गया। इसमें टूट की मात्रा 10 प्रतिशत होती है। इसमें 10 हजार का ऑफर पंजाब से तथा शेष 30 हजार टन का ऑफर आंध्र प्रदेश से दिया गया। इसके बिडर को 2650 टन की बोली लगानी पड़ती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32138</guid>				
                <pubDate>Sat, 02 May 2026 17:47:19 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[तेलंगाना में रबी कालीन धान की सरकारी खरीद 10 लाख टन से ज्यादा]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-10-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">हैदराबाद। दक्षिण भारत के सबसे प्रमुख चावल उत्पादक राज्य- तेलंगाना में मौजूदा रबी मार्केटिंग सीजन के लिए 90 लाख टन धान की सरकारी खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें से 10 लाख टन से अधिक की खरीदारी पूरी हो चुकी है जिसमें 4.50 लाख टन फाइन क्वालिटी का तथा शेष मोटी श्रेणी का धान शामिल है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार धान की खरीद इस बार भी नियत लक्ष्य को हासिल करने की दृष्टि से उचित पटरी पर चल रही है। राज्य सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान की खरीद के लिए 500.20 करोड़ रुपए जारी किए है जिससे किसानों का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।</span></p><p>तेलंगाना में करीब 22.25 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है और 2025-26 के सम्पूर्ण सीजन में वह इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का उत्पादन बढ़कर 152 लाख टन पर पहुंच जाने का अनुमान है। सरकार ने रबी सीजन में 30 लाख टन फाइन&nbsp; वैरायटी का तथा 60 लाख टन किस्मों का धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है।&nbsp;</p><p>धान की खरीद के लिए तेलंगाना में 8575 क्रय केन्द्र खोले गए हैं और वहां खाद्य विभाग पूरे जोर शोर से उसकी खरीद में लगा हुआ है। राज्य में पैक्स द्वारा 4350 इंदिरा क्रांति पाथम द्वारा 3563 एवं अन्य एजेंसियों द्वारा 662 क्रय केन्द्रों का संचालन किया जा रहा है। धान की खरीदी गई मात्रा का उठाव नियमित रूप से हो रहा है और किसानों को नियत समय सीमा के अंदर इसके धान की कीमत का भुगतान किया जा रहा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32129</guid>				
                <pubDate>Sat, 02 May 2026 13:18:53 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[कम कोटा एवं बेहतर मांग से चीनी का भाव मजबूत रहने के आसार]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। चालू माह (मई) के लिए केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय ने घरेलू प्रभाग में बिक्री के वास्ते 22.50 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया है जो अप्रैल 2026 एवं मई 2025 के कोटे से काफी कम है। इस बीच यह खबर भी आई है कि मंत्रालय ने 16 चीनी मिलों का कोटा रोक दिया है क्योंकि इसने कथित तौर पर मार्च में नियत कोटे से अधिक चीनी की बिक्री की थी। इन 16 चीनी मिलों को संयुक्त रूप से करीब 70 हजार टन का कोटा दिया जा सकता था। यदि उसको स्थगित रखा गया तो मई 2026 के लिए केवल 21.80 लाख टन का ही कोटा उपलब्ध हो सकेगा बशर्तें सरकार कोई वैकल्पिक व्यवस्था न करे।&nbsp;</span><br></p><p>वैसे भी मई माह की संभावित मांग एवं खपत को देखते हुए 22.50 लाख टन चीनी के कोटे को ज्यादा बड़ा या भारस्वरूप नहीं माना जा रहा है। मई में भीषण गर्मी पड़ती है और तापमान काफी ऊंचा रहता है इसलिए चीनी की औद्योगिक मांग काफी बढ़ जाती है। आइसक्रीम एवं कोल्ड ड्रिंक्स आदि के निर्माण में विशाल मात्रा में चीनी की खपत होती है। इससे&nbsp; मांग एवं आपूर्ति के बीच समीकरण जटिल रहने की संभावना है जो बाजार को मजबूती प्रदान कर सकता है। मिलर्स को इस माह औने-पौने दाम पर जल्दबाजी में अपना स्टॉक बेचने के लिए विवश नहीं होना पड़ेगा।&nbsp;</p><p>चीनी के घरेलू उत्पादन में उम्मीद के अनुरूप बढ़ोत्तरी नहीं हो सकी। सीजन की शुरुआत के समय उत्पादन में 18-20 प्रतिशत का भारी इजाफा होने का अनुमान लगाया जा रहा था लेकिन अप्रैल 2026 के अंत तक उत्पादन में केवल 7 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो सकी और इसका आंकड़ा 275 लाख टन तक ही पहुंच सका जबकि पहले 300 लाख टन से ज्यादा चीनी के उत्पादन की संभावना व्यक्त की गई थी। मिलर्स के पास चीनी का इतना लम्बा-चौड़ा स्टॉक नहीं बचेगा कि उसे हड़बड़ाहट में उसकी बिक्री के लिए बाध्य होना पड़े। कुल मिलाकर चीनी का भाव आगामी सप्ताहों के दौरान मजबूत रहने की संभावना है और मौजूदा मूल्य स्तर के मुकाबले इसमें औसतन 100 रुपए प्रति क्विंटल तक की तेजी आ सकती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32125</guid>				
                <pubDate>Sat, 02 May 2026 12:36:50 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[गेहूं खरीद का परिदृश्य]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">इस वर्ष 30 अप्रैल तक केन्द्रीय पूल के लिए राष्ट्रीय स्तर पर 232.50 लाख टन गेहूं खरीदा गया जो पिछले साल की इसी अवधि की खरीद 256.30 लाख टन से करीब 9 प्रतिशत ज्यादा है। एक तरफ पंजाब और हरियाणा में गेहूं की जोरदार खरीद हो रही है तो दूसरी ओर मध्य प्रदेश में खरीद की स्थिति निराशाजनक तथा राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश में कमजोर देखी जा रही है। दिलचस्पी तथ्य यह है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश में गेहूं की खरीद का लक्ष्य बढ़ाया गया है जबकि हरियाणा में वास्तविक खरीद नियत लक्ष्य से काफी आगे निकल चुकी है लेकिन फिर भी वहां लक्ष्य में वृद्धि की अभी तक घोषणा नहीं हुई है। पंजाब में खरीद की स्थिति गत वर्ष से काफी बेहतर है और इसका आंकड़ा 100 लाख टन के पार पहुंच चुका है। वहां 15 मई तक गेहूं की खरीद होनी है और उम्मीद की जा रही है कि इस तिथि तक गेहूं की कुल सरकारी खरीद 122 लाख टन के नियत लक्ष्य तक या उससे ऊपर पहुंच जाएगी। हरियाणा में 72 लाख टन के निर्धारित लक्ष्य की तुलना में 76.60 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है जो गत वर्ष की समान अवधि की मात्रा 65.70 लाख टन से 17 प्रतिशत अधिक है।&nbsp;</span><br></p><p>मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद का परिदृश्य संतोषजनक नहीं है। वहां खरीद का लक्ष्य 78 लाख टन से बढ़ाकर 100 लाख टन निर्धारित किया गया है जबकि 30 अप्रैल 2026 तक वहां केवल 27.50 लाख टन की खरीद संभव हो सकी जो गत वर्ष की समान अवधि की खरीद 67.68 लाख टन से 59 प्रतिशत कम है। राजस्थान में भी गेहूं की खरीद गत वर्ष से काफी पीछे चल रही है जबकि उत्तर प्रदेश में धीरे-धीरे पिछले साल के करीब पहुंच रही है। सरकारी गोदामों में पहले से ही गेहूं का विशाल स्टॉक मौजूद है इसलिए मौजूदा रबी मार्केटिंग सीजन में यदि खरीद 5-10 प्रतिशत कम होती है तब भी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए कोई संकट पैदा नहीं होगा। सरकार 50 लाख टन साबुत गेहूं एवं 10 लाख टन मूल्य संवर्धित गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दे चुकी है मगर निर्यात के मोर्चे पर प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद कम है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32123</guid>				
                <pubDate>Sat, 02 May 2026 12:36:05 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मई के लिए 16 चीनी मिलों का फ्री सेल कोटा रोका गया]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-16-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने पिछले महीनों के दौरान स्टॉक धारिता सीमा के नियम का उल्लंघन करने तथा स्टॉक के सम्बन्ध में गलत जानकारी होने के कारण मई माह के लिए 16 चीनी मिलों का फ्री सेल कोटा रोक दिया है। इस कटौती के बाद अब मई 2026 के लिए राष्ट्रीय स्तर पर चीनी की कुल घरेलू बिक्री का कोटा घटकर 21.80 लाख टन रह गया है। यह पूर्व में घोषित 22.50 लाख टन चीनी के फ्री सेल कोटे से 70 हजार टन कम है।&nbsp;</span></p><p>एक सरकारी अधिसूचना के अनुसार मार्च 2026 के लिए पी- 2 फार्म में चीनी मिलों द्वारा क्लोजिंग स्टॉक का जो आंकड़ा भेजा गया उसका परीक्षण-आंकलन करने से पता चलता कि वास्तविक स्टॉक की तुलना में सूचित स्टॉक कम था। सरकार प्रत्येक चीनी मिल को किसी एक माह में बेचने के लिए जो कोटा प्रदान करती है वह उच्चतम स्तर का होता है और मिलर्स उस कोटे से अधिक मात्रा में चीनी की बिक्री नहीं कर सकता है। नियमानुसार यदि अधिक मात्रा में चीनी बेची गई तो अगले महीने के कोटे में उतनी मात्रा की कटौती हो जाती है। जरूरत से ज्यादा माल बेचने पर कोटा स्थगित भी किया जा सकता है। इन मिलों के साथ कुछ ऐसा ही मामला बना है।</p><p>सरकार ने मई 2026 में घरेलू प्रभाग में बेचने के लिए कुल 22.50 लाख टन चीनी का कोटा निर्धारित किया है जो आज से प्रभावी हो गया है। इससे पूर्व अप्रैल में 23 लाख टन का कोटा नियत किया गया था। </p><p>मई 2025 में 23.50 लाख टन चीनी का फ्री सेल कोटा जारी हुआ था। यह देखना आवश्यक होगा कि जिन मिलों का कोटा रोका गया है उसे वह दोबारा वापस मिलता है या उस कोटे को अन्य मिलों के बीच वितरित किया जाता है। तीसरा विकल्प कोटे को पूरी तरह वापस लेने का है।&nbsp;</p><p>अप्रैल की तुलना में मई माह के लिए चीनी के फ्री सेल कोटे में कर्नाटक में 19 प्रतिशत एवं महाराष्ट्र में 18 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है जबकि उत्तर प्रदेश में इसे 11 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32103</guid>				
                <pubDate>Fri, 01 May 2026 15:47:33 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[आधे से अधिक जलाशयों में पानी का स्तर 40 प्रतिशत से नीचे]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-40-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। बारिश की कमी, बढ़ती गर्मी एवं नियमित निकासी के कारण देश के जलाशयों में पानी का स्तर लगातार घटता जा रहा है। केन्द्रीय जल आयोग के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों से पता चलता है कि देश के 166 प्रमुख बांधों एवं जलाशयों में से 50 प्रतिशत से अधिक में पानी का स्तर घटकर उसकी कुल भडारण क्षमता के 40 प्रतिशत से नीचे आ गया है। दक्षिण भारत में तो यह 30 प्रतिशत से कम है।</span></p><p>आयोग की रिपोर्ट के अनुसार इन 166 प्रमुख जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 183.565 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) की है जबकि फिलहाल उसमें केवल 71.082 बीसीएम या 38.72 प्रतिशत पानी का स्टॉक मौजूस है। चार जलाशयों में 40 प्रतिशत से ज्यादा पानी का भंडार है। </p><p>दिलचस्प तथ्य यह है कि मौजूदा जल स्तर गत वर्ष की समान अवधि से 14 प्रतिशत एवं दस वर्षीय औसत से 26.5 प्रतिशत बिंदु ऊंचा है। पिछले साल जल स्तर काफी घट गया था।&nbsp;</p><p>मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 मार्च से 29 अप्रैल 2026 के दौरान देश के एक-तिहाई से अधिक भाग में वर्षा नहीं या नगण्य हुई। वैसे अब मानसून-पूर्व की बारिश आरंभ हो गई है और खासकर दक्षिण भारत में इसकी तीव्रता अधिक रहने की उम्मीद है। </p><p>इस वर्ष अल नीनो मौसम चक्र का खतरा बना हुआ है जिससे दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में वर्षा सामान्य औसत से कम होने की संभावना है। बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक उत्साहवर्धक नहीं है। इससे खरीफ फसलों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। इन फसलों की बिजाई जून से आरंभ होने वाली है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32101</guid>				
                <pubDate>Fri, 01 May 2026 13:49:46 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[आधे से अधिक जलाशयों में पानी का स्तर 40 प्रतिशत से नीचे]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-40-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। बारिश की कमी, बढ़ती गर्मी एवं नियमित निकासी के कारण देश के जलाशयों में पानी का स्तर लगातार घटता जा रहा है। केन्द्रीय जल आयोग के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों से पता चलता है कि देश के 166 प्रमुख बांधों एवं जलाशयों में से 50 प्रतिशत से अधिक में पानी का स्तर घटकर उसकी कुल भडारण क्षमता के 40 प्रतिशत से नीचे आ गया है। दक्षिण भारत में तो यह 30 प्रतिशत से कम है।</span></p><p>आयोग की रिपोर्ट के अनुसार इन 166 प्रमुख जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 183.565 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) की है जबकि फिलहाल उसमें केवल 71.082 बीसीएम या 38.72 प्रतिशत पानी का स्टॉक मौजूस है। चार जलाशयों में 40 प्रतिशत से ज्यादा पानी का भंडार है। </p><p>दिलचस्प तथ्य यह है कि मौजूदा जल स्तर गत वर्ष की समान अवधि से 14 प्रतिशत एवं दस वर्षीय औसत से 26.5 प्रतिशत बिंदु ऊंचा है। पिछले साल जल स्तर काफी घट गया था।&nbsp;</p><p>मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 मार्च से 29 अप्रैल 2026 के दौरान देश के एक-तिहाई से अधिक भाग में वर्षा नहीं या नगण्य हुई। वैसे अब मानसून-पूर्व की बारिश आरंभ हो गई है और खासकर दक्षिण भारत में इसकी तीव्रता अधिक रहने की उम्मीद है। </p><p>इस वर्ष अल नीनो मौसम चक्र का खतरा बना हुआ है जिससे दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में वर्षा सामान्य औसत से कम होने की संभावना है। बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक उत्साहवर्धक नहीं है। इससे खरीफ फसलों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। इन फसलों की बिजाई जून से आरंभ होने वाली है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32100</guid>				
                <pubDate>Fri, 01 May 2026 13:48:41 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[पंजाब के आठ जिलों में गेहूं की आवक गत वर्ष से ज्यादा]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">चंडीगढ़। फरवरी के अंतिम दिनों से ही मानसून की असामान्य स्थिति के कारण उपज दर में गिरावट आने की आशंका के बावजूद पंजाब की मंडियों में इस बार उम्मीद से ज्यादा गेहूं की आवक हो रही है। इससे अधिकारी सजग-सतर्क हो गए हैं और सम्पूर्ण स्थिति की गहन निगरानी कर रहे हैं। राज्य के आठ जिलों में गेहूं की आपूर्ति गत वर्ष से ज्यादा हुई है और नियत लक्ष्य से भी आगे निकल गई है। भारतीय खाद्य निगम के वरिष्ठ अधिकारियों का एक दल उन मंडियों का दौरा&nbsp; कर चुका है जहां गेहूं की भारी आवक हुई है।&nbsp;</span></p><p>सभी खरीद एजेंसियों के स्टॉक को सख्त निर्देश दिया गया है कि गेहूं के किसी भी ढेर की खरीद करने से पूर्व उसकी फोटोग्राफी की जाए, उसे उस दिन के समाचार पत्र में छपवाया जाए और सम्पूर्ण प्रक्रिया की वीडियो ग्राफी की जाए। ऐसे फोटोग्राफ को प्रत्येक दिन रखा जाएगा।</p><p>इस बात की आशंका व्यक्त की जा रही है कि कुछ मंडियों में जाली फर्मों द्वारा गेहूं की खरीद-बिक्री का प्रयास किया जा रहा है। कुछ लोग पंजाब से बाहर सस्ते दाम पर गेहूं की खरीद करके उसे राज्य की मंडियों में सरकारी एजेंसियों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बेच रहे हैं। गेहूं का एमएसपी इस बार 2585 रुपए प्रति क्विंटल नियत हुआ है।&nbsp;</p><p>जिन आठ जिलों में लक्ष्य से अधिक गेहूं की आपूर्ति हुई है उसमें मोहाली, संगरूर, लुधियाना पूर्व, फरीदकोट, कपूरथला, रूप नगर, (रोपड़), फतेह गढ़ साहिब, लुधियाना पश्चिम और पटियाला शामिल है। इन जिलों में नियत लक्ष्य की तुलना में 2 से 31 प्रतिशत तक अधिक गेहूं पहुंच चुका है जबकि नए स्टॉक का आना अभी जारी है।</p><p>समझा जाता है कि खाद्य निगम ने कुछ टीमें बनाई हैं जो इन जिलों की मंडियों में अचानक दौरा करेगी और वहां गेहूं की आवक का आंकलन करने के बाद अपनी रिपोर्ट दिल्ली मुख्यालय को भेजेगी। इस बार पंजाब में कुल 122 लाख टन&nbsp; गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जबकि अब तक करीब 114.13 लाख टन की खरीद हो चुकी है। राज्य में 15 मई तक गेहूं खरीद की समय सीमा निर्धारित की गई है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32098</guid>				
                <pubDate>Fri, 01 May 2026 13:44:53 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[कमजोर मांग एवं निर्यात में बाधा से नारियल तथा कोपरा का भाव नरम]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">कोच्चि। उत्पादन में बढ़ोत्तरी होने, घरेलू मांग कमजोर रहने तथा पश्चिम एशिया संकट के कारण निर्यात में बाधा पड़ने से नारियल तथा कोपरा की कीमतों में नरमी का माहौल बना हुआ है। नारियल तेल के दाम पर भी दबाव पड़ने लगा है। उल्लेखनीय है कि कुछ माह पूर्व इसका भाव तेजी से बढ़कर एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था मगर अब बाजार नरम होता जा रहा है।&nbsp;</span></p><p>कोचीन ऑयल मर्चेंट्स एसोसिएशन (कोमा) के अध्यक्ष का कहना है कि केरल में जुलाई 2025 के दौरान नारियल तेल का मूल्य 393 रुपए प्रति लीटर तथा कोपरा का मूल्य 259 रुपए प्रति किलो के शीर्ष स्तर पर पहुंचा था </p><p>जिसके मुकाबले अब नारियल तेल का दाम घटकर 266 रुपए प्रति लीटर तथा कोपरा का दाम 153 रुपए प्रति किलो पर आ गया है। इसी अवधि में साबुत नारियल का भाव भी करीब 36 रुपए प्रति किलो घट गया।&nbsp;</p><p>कॉर्पोरट स्तर पर तथा स्थानीय मंडी में मांग कमजोर पड़ गई है। खाड़ी क्षेत्र के देशों में नारियल का निर्यात करने में&nbsp; कठिनाई हो रही है। मानसूनी बारिश आरंभ होने पर नारियल एवं कोपरा की आपूर्ति घटेगी और तब कीमतों में कुछ सुधार आ सकता है। इस बीच बाजार नरम रहने की संभावना है। </p><p>कीमतों में आ रही गिरावट को देखते हुए तमिलनाडु के स्टॉकिस्टों ने अपने माल की बिक्री बढ़ा दी है जिससे वहां भी कीमतों में नरमी का माहौल बनने लगा है। इस बार केरल में नारियल एवं कोपरा के उत्पादन में भी अच्छी बढ़ोत्तरी होने के संकेत मिल रहे हैं जिससे बाजार पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ रहा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32093</guid>				
                <pubDate>Fri, 01 May 2026 12:32:19 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[पश्चिमी विक्षोप की सक्रियता से बारिश होने की संभावना]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा है कि एक ठंडा पश्चिमी विक्षोभ ईरान, अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान को पार करते हुए अब हिंदुस्तान में प्रवेश कर गया है। पिछले दिन यह उत्तरी पाकिस्तान से सटे कश्मीर के कुछ भागों के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन के रूप में मौजूद था। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इस पश्चिमी विक्षोभ के बाद एक अन्य विक्षोभ भी सक्रिय हो रहा है जिसके प्रभाव से पश्चिमोत्तर भारत के पर्वतीय इलाकों में 2 मई से बारिश हो सकती है। एक पूर्ववर्ती&nbsp; ऊपरी हवा का ट्रफ पिछले दिन (30 अप्रैल को) अमृतसर, मुदकी एवं भटिंडा से होकर गुजर रहा था इस विक्षोभ से पंजाब के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन का निर्माण हो गया है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">एक ट्रफ दक्षिण दिशा की ओर बढ़कर दक्षिणी पश्चिमी राजस्थान के ऊपर पहुंच गया है जबकि उत्तरी-पूर्वी राजस्थान के ऊपर एक अतिरिक्त अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय है।</span></p><p>इस ठंडे पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से तापमान में गिरावट आने की संभावना है। इसका असर आंतरिक महाराष्ट्र एवं तेलंगाना में भी देखा जा सकेगा। एक ट्रफ मध्य प्रदेश के उत्तरी-पूर्वी भाग से गुजर रहा है जो साइक्लोनिक सर्कुलेशन के रूप में बांग्ला देश, झारखंड तथा पश्चिम बंगाल के मैदानी इलाकों को प्रभावित कर सकता है। </p><p>एक ट्रफ आंतरिक कर्नाटक से&nbsp; होते हुए मन्नार की खाड़ी की तरफ बढ़ रहा है जिससे दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक एवं तमिलनाडु में मौसम पर असर पड़ सकता है।</p><p>इन घटनाक्रमों के फलस्वरूप देश के विभिन्न राज्यों में वर्षा होने अथवा गरज-चमक के साथ बौछार पड़ने की संभावना&nbsp; है। इसमें हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल के पहाड़ी एवं मैदानी क्षेत्र, सिक्किम, जम्मू-कश्मीर , पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान, पूर्वी एवं पश्चिमी मध्य प्रदेश, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ तथा तटीय आंध्र प्रदेश शामिल है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32091</guid>				
                <pubDate>Fri, 01 May 2026 12:06:04 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[राजस्थान में एमएसपी पर 100 प्रतिशत चना खरीदने की अपील]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-100-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">जयपुर। देश के पश्चिमी प्रान्त- राजस्थान की मंडियों में चना की जोरदार आवक के बीच कीमतों में नरमी आने से किसानों की चिंता काफी बढ़ गई है। एक अग्रणी किसान संगठन का कहना है कि प्रचलित नियम के अनुमान सभी पंजीकृत किसानों से चना की सम्पूर्ण मात्रा की खरीद होनी चाहिए मगर राज्य में इस नियम का उल्लंघन हो रहा है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इसे देखते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री को हस्तक्षेप करना चाहिए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर चना की 100 प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करनी चाहिए।</span></p><p>प्रत्यके किसान से अधिकतम 40 क्विंटल चना की सरकारी खरीद की जा रही है। राजस्थान में चना की बिक्री के लिए अब तक 5000 से अधिक किसान अपना रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं लेकिन अभी तक राज्य के सभी जिलों में खरीद की प्रक्रिया आरंभ नहीं होने से किसानों को अपना माल बेचने में सफलता नहीं मिल रही है। जहां इसकी प्रक्रिया शुरू हुई है वहां भी सरकारी एजेंसियां 40 क्विंटल से ज्यादा चना खरीदने से इंकार कर रही है।&nbsp;</p><p>फिलहाल केवल अजमेर जिले के किशन गढ़ में चना की सरकारी खरीद हो रही है। नोडल प्रांतीय एजेंसी- राजफेड में पंजीकृत किसानों से सिर्फ 40 क्विंटल तक चना खरीदा जा रहा है। </p><p>चना का न्यूनतम समर्थन मूल्य इस बार 5875 रुपए प्रति क्विंटल नियत हुआ है जबकि इसका थोक मंडी भाव 5000-5200 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। 40 क्विंटल से अधिक उत्पादन को नीचे दाम पर बेचने से किसानों को औसतन 775 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32089</guid>				
                <pubDate>Fri, 01 May 2026 11:10:56 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[सीजन के शुरूआती सात महीनों में चीनी का उत्पादन 7 प्रतिशत बढ़ा]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-7-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। शीर्ष उद्योग संस्था- इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि चालू मार्केटिंग सीजन के आरंभिक सात महीनों में यानी 1 अक्टूबर 2025 से 30 अप्रैल 2026 के दौरान देश में चीनी का उत्पादन बढ़कर 275.28 लाख टन पर पहुंच गया </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">जो 2024-25 सीजन की समान अवधि के उत्पादन 256.49 लाख टन से करीब 7 प्रतिशत अधिक है। 30 अप्रैल को केवल तमिलनाडु में पांच चीनी मिलें सक्रिय थीं जबकि देश की शेष सभी इकाइयां बंद हो चुकी थीं। पिछले साल 30 अप्रैल को 19 चीनी मिलों में गन्ना की क्रशिंग जारी थी।</span></p><p>इस्मा के आंकड़ों के अनुसार 2024-25 सीजन की तुलना में 2025-26 सीजन के दौरान चीनी का उत्पादन उत्तर प्रदेश में 92.40 लाख टन से घटकर 89.65 लाख टन पर अटक गया और वहां सभी इकाइयां बंद हो चुकी हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी गन्ना की क्रशिंग समाप्त हो गई है लेकिन वहां चीनी उत्पादन की स्थिति बेहतर रही।</p><p>महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन पिछले सीजन के 80.93 लाख टन से उछलकर इस बार 99.20 लाख टन तथा कर्नाटक में 40.40 लाख टन से बढ़कर 48.01 लाख टन पर पहुंचा। इस आंकड़े को महाराष्ट्र में अंतिम उत्पादन माना जा सकता है लेकिन कर्नाटक में आगामी महीनों के दौरान गन्ना क्रशिंग का विशेष सत्र आयोजित होगा इसलिए वहां चीनी के उत्पादन&nbsp; में कुछ सुधार हो सकता है। ऐसा लगता है कि कर्नाटक में कुल उत्पादन 50 लाख टन से ऊपर पहुंच जाएगा। </p><p>इसके अतिरिक्त तमिलनाडु की कुछ इकाइयों में भी गन्ना की क्रशिंग होगी। इन दोनों राज्यों में संयुक्त रूप से 3-4 लाख टन चीनी का उत्पादन हो सकता है। इस तरह 2025-26 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में चीनी का सकल उत्पादन 280 लाख टन के आसपास पहुंच सकता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32087</guid>				
                <pubDate>Fri, 01 May 2026 10:34:05 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[दक्षिण अमरीका महाद्वीप में सोयाबीन का उत्पादन बढ़ने के संकेत]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">साओ पाउलो। दक्षिण अमरीका महाद्वीप में 2025-26 सीजन के दौरान सोयाबीन का सकल उत्पादन तेजी से बढ़कर 25 करोड़ टन के आसपास पहुंच जाने का अनुमान है जो संयुक्त राज्य अमरीका के उत्पादन से करीब दोगुना है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इसके तहत ब्राजील में 17.90 करोड़ टन तथा अर्जेन्टीना में 4.80 करोड़ टन के उत्पादन की संभावना व्यक्त की गई है। इसके अलावा उरुग्वे तथा पराग्वे जैसे देशों में औसतन 100-100 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन होने की उम्मीद है। शेष उत्पादन अन्य देशों में हुआ है।&nbsp;</span></p><p>ब्राजील दुनिया में सोयाबीन का सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश है। वहां इस फसल की कटाई-तैयारी बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंच गई है और अगले 10 दिन में समाप्त हो सकती है। ध्यान देने वाली बात है कि ब्राजील में 15 मई से "सोयाबीन मुक्त अवधि" आरंभ हो जाएगी जो कमोबेश 15 सितम्बर तक जारी रहेगी। </p><p>इस अवधि के दौरान ब्राजील में सोयाबीन का एक भी जीवित पौधा नहीं छोड़ा जाता है। अर्जेन्टीना में अभी सोयाबीन फसल की कटाई-तैयारी जोर-शोर से जारी है जबकि उरुग्वे एवं पराग्वे सहित अन्य देशों में मुख्य सीजन की फसल काटी जा चुकी है। भारत में अर्जेन्टीना&nbsp; एवं ब्राजील से विशाल मात्रा में सोया तेल मंगाया जाता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32060</guid>				
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:41:34 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[ईरान-अमरीका युद्ध एवं अल नीनो से चावल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">हनोई। पश्चिम एशिया में इजरायल एवं अमरीका के साथ ईरान का युद्ध (तनावपूर्ण स्थिति) जारी रहने और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बंद होने से ऊर्जा स्रोतों (ईंधन) तथा रासायनिक उर्वरकों का आयात खर्च काफी ऊंचा बैठ रहा है जिससे दक्षिण एशिया एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रमुख चावल उत्पादक देशों में धान की खेती पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। वहां धान के उत्पादन क्षेत्र में गिरावट आने की संभावना है।</span></p><p>इसके अलावा चालू वर्ष के दौरान अल नीनो मौसम चक्र का गंभीर प्रकोप भी कई देशों पर पड़ने वाला है जिससे वहां बारिश कम हो सकती है और मौसम शुष्क तथा गर्म रह सकता है। धान की फसल के लिए यह स्थिति अनुकूल नहीं होगी और इससे उत्पादन में असर पड़ सकता है। </p><p>अगर उर्वरकों की कमी तथा ऊंची कीमत की समस्या आगे भी बरकरार रही तो 2026-27 सीजन के दौरान चावल के वैश्विक उत्पादन का परिदृश्य काफी कमजोर हो सकता है और थाईलैंड, वियतनाम, म्यांमार, पाकिस्तान तथा कम्बोडिया जैसे देशों में चावल के निर्यात योग्य अधिशेष स्टॉक में कमी आ जाएगी। </p><p>इससे वैश्विक स्तर पर आपूर्ति की जटिलता बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। एशिया एवं अफ्रीका के अनेक देशों को प्रति वर्ष अपनी घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विदेशों से विशाल मात्रा में चावल का आयात करने की आवश्कयता पड़ती है।&nbsp;</p><p>जहां तक भारत का सवाल है तो पश्चिम एशिया संकट तथा अल नीनो के संभावित प्रकोप से सरकार ज्यादा चिंतित नहीं है। सरकार का कहना है कि देश में सिंचाई की अच्छी सुविधा मौजूद है इसलिए कमजोर मानसून के बावजूद धान की खेती पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा </p><p>इसके साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। सरकार विदेशों से ऊंचे दाम पर उर्वरक मंगा रही है और स्वयं सब्सिडी का भार उठाकर किसानों को उचित मूल्य पर इसकी आपूर्ति कर रही है।&nbsp;</p><p>भारत दुनिया में चावल का सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश है इसलिए यहां अगर उत्पादन एवं निर्यात योग्य स्टॉक में गिरावट आई तो वैश्विक बाजार भाव तेजी से बढ़ सकता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32058</guid>				
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:38:21 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अच्छी क्वालिटी के माल की बेहतर मांग से काबुली चना का भाव मजबूत]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">वैंकुवर। प्रमुख आयातक देशों में अच्छी क्वालिटी एवं बड़े दाने वाले काबुली चना की मांग बेहतर होने से उत्तरी अमरीका महाद्वीप के तीन प्रमुख उत्पादक देशों- कनाडा, मैक्सिको एवं संयुक्त राज्य अमरीका (यूएसए) में इसका भाव लम्बे समय से मजबूत बना हुआ है। नंबर 2 ग्रेड के काबुली चना का दाम सुधरकर 27 सेंट प्रति पौंड (एलबी) पर पहुंच गया है जबकि इसकी अगली नई फसल का अनुबंध 25 सेंट प्रति पौंड के मुख्य स्तर पर हो रहा है।&nbsp;</span></p><p>दूसरी ओर भारतीय बाजार में खरीद- बिक्री की गति धीमी रहने से काबुली चना का भाव कमजोर या स्थिर देखा जा रहा है। हालांकि देश में इसका अत्यन्त विशाल स्टॉक मौजूद नहीं है जो उत्पादकों के लिए भारस्वरूप साबित हो मगर खपत का पीक सीजन नहीं होने से कारोबार कुछ सुस्त पड़ गया है।</p><p>पश्चिमी कनाडा में किसानों के पास हल्की क्वालिटी के काबुली चना का अच्छा खासा स्टॉक उपलब्ध है जिससे फीड मार्केट पर आपूर्ति का दबाव पड़ रहा है। पशु आहार में इस्तेमाल होने वाले चने का दाम घटकर 9-10 सेंट प्रति पौंड पर आ गया है। </p><p>उधर अमरीका में काबुली चना का बिजाई क्षेत्र 7 प्रतिशत घटकर 4.99 लाख एकड़ पर सिमटने का अनुमान लगाया जा रहा है। वहां उच्च क्वालिटी के माल की सीमित उपलब्धता के कारण कीमतों को अच्छा समर्थन मिल रहा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32056</guid>				
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:35:40 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[खाद्यान्न का सरकारी स्टॉक 746 लाख टन के पार]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-746-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्रीय पूल में खाद्यान्न का सकल स्टॉक बढ़कर 28 अप्रैल 2026 को 746.33 लाख टन पर पहुंच गया जबकि 1 अप्रैल को 602 लाख टन ही था। दरअसल अप्रैल माह के दौरान भारी मात्रा में गेहूं की खरीद होने से कुल भंडार में काफी बढ़ोत्तरी हो गई।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"> उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 1 अप्रैल को सरकारी गोदामों में 222 लाख टन गेहूं का स्टॉक मौजूद था जो 28 अप्रैल तक आते-आते उछलकर 390.27 लाख टन पर पहुंच गया। गेहूं की जोरदार खरीद अभी जारी है इसलिए आगामी समय में इसका स्टॉक और भी बढ़ सकता है। इस बार 345 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य रखा गया है।&nbsp;</span></p><p>जहां तक चावल का सवाल है तो केन्द्रीय पूल में इसका स्टॉक 1 अप्रैल को 380 लाख टन से घटकर 28 अप्रैल को 356.06 लाख टन रह गया। शीघ्र ही रबी कालीन धान की सरकारी खरीद जोर पकड़ने वाली है। वैसे भी चावल का वर्तमान स्टॉक न्यूनतम आवश्यक आरक्षित स्टॉक की तुलना में काफी अधिक और सुविधाजनक स्तर पर है। मिलर्स से चावल प्राप्त हो रहा है।&nbsp;</p><p>उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 1 मार्च 2026 को केन्द्रीय पूल में 364.74 लाख टन चावल एवं 236.22 लाख टन गेहूं के साथ कुल 600.96 लाख टन खाद्यान्न का स्टॉक मौजूद था। पिछले साल अप्रैल के आरंभ में कुल 500.03 लाख टन खाद्यान्न का स्टॉक उपलब्ध था जिसमें 382.09 लाख टन चावल तथा 117.94 लाख टन गेहूं की मात्रा शामिल थी। </p><p>इसी तरह 1 अप्रैल 2024 को खाद्यान्न का स्टॉक घटकर महज 376.59 रह गया था जिसमें 301.57 लाख टन चावल तथा 75.02 लाख टन गेहूं का स्टॉक सम्मिलित था। 1 अप्रैल 2024 की तुलना में 28 अप्रैल 2026 को खाद्यान्न का सरकारी स्टॉक लगभग दोगुना बढ़ गया। लम्बे अरसे के बाद इस बार खाद्यान्न का स्टॉक 700 लाख टन से ऊपर पहुंचा है।&nbsp;</p><p>केन्द्रीय पूल में विशाल उपलब्धता एवं थोक मंडियों में नीचे दाम को देखते हुए सरकार ने गेहूं का निर्यात कोटा 25 लाख टन से दोगुना बढ़ाकर 50 लाख टन निर्धारित किया है जबकि गेहूं उत्पादों का निर्यात कोटा पहले ही 5 लाख टन से बढ़ाकर 10 लाख टन नियत किया जा चुका है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32054</guid>				
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 19:28:22 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[गेहूं की कुल खरीद में यूआरएस की भागीदारी बहुत कम]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। पहले काफी शोर मचाया जा रहा था कि बेमौसमी वर्षा, आंधी तूफान एवं ओलावृष्टि की वजह से गेहूं की क्वालिटी को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। इसके आधार पर केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में गेहूं की सरकारी खरीद के लिए गुणवत्ता सम्बन्धी नियमों शर्तों में भारी छूट की घोषणा कर दी। लेकिन अब जो तथ्य सामने आए हैं उससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि सिर्फ राजस्थान को छोड़कर अन्य प्रांतों में गेहूं की क्वालिटी की सीमित क्षेत्रफल में क्षति हुई है।&nbsp;</span></p><p>इस बार केन्द्रीय पूल के लिए 28 अप्रैल 2026 तक कुल 212.09 लाख टन गेहूं खरीदा गया जिसमें सामान्य औसत क्वालिटी (एफएक्यू) वाले माल की भागीदारी 201.20 लाख टन या करीब 95 प्रतिशत तथा यूआरएस (भंडार रिफाइंड स्पेसिफिकेशन्स) वाले अनाज की हिस्सेदारी 10.85 लाख टन या 5 प्रतिशत रही। केन्द्रीय पूल में इस बार गेहूं का योगदान देने वाले दो अग्रणी राज्य-पंजाब एवं हरियाणा में गेहूं की क्वालिटी काफी अच्छी देखी जा रही है।&nbsp;</p><p>पंजाब में खरीदे गए 103.40 लाख टन गेहूं में यूआरएस वाले माल का अंश केवल 1.68 लाख टन रहा जबकि हरियाणा&nbsp; में तो इसकी मात्रा शून्य ही रही। पंजाब में 98 प्रतिशत तथा हरियाणा में 100 प्रतिशत गेहूं सामान्य औसत क्वालिटी वाला रहा। गेहूं की खरीद का लक्ष्य इस बार पंजाब में 122 लाख टन और हरियाणा में 72 लाख टन नियत हुआ है जबकि&nbsp; हरियाणा में वास्तविक खरीद इस लक्ष्य को पार करते हुए 74.26 लाख टन पर पहुंच गई।</p><p>मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में गेहूं की सरकारी खरीद की गति गत वर्ष से धीमी है। उत्तर प्रदेश में 1.62 लाख टन यूआरएस गेहूं खरीदा गया है जो कुल सरकारी खरीद 6.10 लाख टन का 32 प्रतिशत है। मध्य प्रदेश में यूआरएस गेहूं की कोई खरीद नहीं हुई है मगर राजस्थान में इसकी खरीद 88 प्रतिशत पर पहुंच गई है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32052</guid>				
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:54:03 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[रूई पर आयात शुल्क समाप्त करने के मुद्दे पर मतभेद]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। यद्यपि पश्चिम एशिया में जारी संकट ऊंचे वैश्विक बाजार भाव तथा शिपिंग खर्च में हो रही बढ़ोत्तरी को देखते हुए केन्द्र सरकार रूई पर लागू आयात शुल्क को कम या खत्म करने का प्लान बना रही है और इसके लिए मिलर्स तथा वस्त्र उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत भी कर रही है लेकिन व्यापारियों का एक वर्ग सरकार के इस प्लान से सहमत नहीं है। उनका कहना है कि इस समय रूई पर आयात शुल्क को समाप्त करना सही नहीं होगा क्योंकि इससे घरेलू प्रभाग में कीमतों पर दबाव बढ़ेगा और उत्पादकों को आर्थिक नुकसान होगा।</span></p><p>खरीफ सीजन में कपास की बिजाई जून से जोर पकड़ती है जो अब ज्यादा दूर नहीं है। उससे पहले अगर रूई पर आयात शुल्क शून्य हो गया तो किसानों को कपास का क्षेत्रफल बढ़ाने का प्रोत्साहन नहीं मिलेगा। </p><p>उत्पादकों के पास लगभग 40 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) कपास का विशाल स्टॉक मौजूद है जो उसने आगे दाम बढ़ने एवं बेहतर कमाई&nbsp; प्राप्त होने की उम्मीद से रोक रखा है। यदि शुल्क मुक्त आयात से रूई का घरेलू बाजार भाव घटता है तो किसानों को काफी नीचे दाम पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश होना पड़ सकता है।&nbsp;</p><p>पिछली बार जब रूई के आयात शुल्क में कटौती की गई थी तब किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे दाम पर अपना उत्पाद बेचने के लिए बाध्य होना पड़ा था। उस समय भी किसानों के पास लगभग 30 लाख गांठ कपास का स्टॉक उपलब्ध था। </p><p>अभी सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (एफसीआई) के पास भी रूई का विशाल स्टॉक उपलब्ध है जिसकी बिक्री का तेज प्रयास किया जा रहा है। आगामी अक्टूबर माह से कपास की नई फसल की तुड़ाई-तैयारी जोर पकड़ने लगेगी जबकि पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में इसकी आवक सितम्बर में ही शुरू हो जाती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32050</guid>				
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:01:12 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मांग एवं आपूर्ति के अनुरूप मसूर में मिश्रित रुख]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">विनीपेग। पश्चिमी कनाडा की मंडियों में फिलहाल मांग एवं आपूर्ति के अनुरूप मसूर की कीमतों में मिश्रित रुख देखा जा रहा है। नंबर 2 ग्रेड की मोटी हरी मसूर का डिलीवरी मूल्य कुछ चुनिंदा केन्द्रों में 25 सेंट प्रति पौंड पर पहुंच गया है लेकिन वहां इसका स्थिर रहना निश्चित नहीं है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इस मूल्य स्तर पर अत्यन्त सीमित कारोबार हो रहा है और डिलीवरी का समय भी ग्रीष्मकालीन महीनों का है। वर्तमान मार्केटिंग सीजन धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहा है इसलिए खरीदारों का ध्यान अब आगामी नई फसल पर केन्द्रित होने लगा है। मोटी हरी मसूर की अगली नई फसल का दाम भी 24-25 सेंट प्रति पौंड बताया जा रहा है जिससे मौजूदा स्टॉक वाली मसूर की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।</span></p><p>छोटी हरी मसूर का भाव पुराने स्तर पर स्थिर बना हुआ है जो नंबर 1 ग्रेड के लिए 20 सेंट तथा नंबर 2 श्रेणी के लिए 17.5 सेंट प्रति पौंड बताया जा रहा है। इसके मुकाबले लाल मसूर का दाम ऊंचा यानी 24-25 सेंट प्रति पौंड बोला जा रहा है। </p><p>इस वर्ष कनाडा, ऑस्ट्रेलिया एवं रूस में लाल मसूर का बिजाई क्षेत्र बढ़ने की संभावना है जिससे अगले मार्केटिंग सीजन में इसकी वैश्विक आपूर्ति एवं उपलब्धता में वृद्धि हो सकती है। कनाडा एवं काला सागर क्षेत्र में अगस्त से तथा ऑस्ट्रेलिया में सितम्बर-अक्टूबर से मसूर के नए माल की आवक शुरू हो जाती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32048</guid>				
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 16:29:30 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[चीन के साथ जीएमओ चावल के मुद्दे पर एपीडा कर सकता है बातचीत]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की अधीनस्थ एजेंसी- कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) को केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की तरफ से सूचित किया गया है कि देश के अंदर जेनेटिकली मोडिफाइड ऑर्गेनिज्म (जीएमओ) चावल के उत्पादन, कारोबार, आयात एवं उपयोग की अनुमति नहीं दी गई है। इसके फलस्वरूप भारत से निर्यात होने वाला चावल पूरी तरह जीएमओ संवर्ग के दायरे से बाहर रहता है।&nbsp;</span></p><p>दूर / स्पष्टीकरण एवं सकारात्मक सूचना से उत्साहित एपीडा अब चीन के साथ जीएमओ चावल का मुद्दा उठाने की तैयारी कर रहा है। मालूम हो कि चीन ने भारतीय चावल की कुछ खेपों को यह कहते हुए नामंजूर कर दिया था कि उसमें जीएम चावल का अंश मौजूद है। इतना ही नहीं बल्कि उसने तीन भारतीय निर्यातकों का लाइसेंस भी रद्द कर दिया था जिससे वे निर्यातक चीन में चावल का शिपमेंट करने में सक्षम नहीं हो रहे है।</p><p>तमाम साक्ष्यों एवं स्पष्टीकरण के साथ एपीडा अब चीन सरकार के निर्णय को चुनौती देने का प्लान बना रहा है। पर्यावरण मंत्रालय ने 28 अप्रैल को एपीडा को भेजे एक कार्यालयी ज्ञापन में कहा है कि जीएम फसलों की नियामक संस्था-&nbsp; जेनेटिकली इंजीनियरिंग एप्रेजल कमिटी (जिएक) द्वारा भारत में जीएम चावल के बारे में किसी तरह की कोई अनुमति नहीं दी गई है। इससे पूर्व एपीडा ने मंत्रालय को एक पत्र भेजकर इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देने का आग्रह किया था।</p><p> इससे पहले 23 अप्रैल को आईसीएआर ने भी एपीडा को इस विषय पर एक पत्र भेजा था जिसमें कहा गया था कि केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा देश में किसी जीएम चावल (धान) की व्यावसायिक खेती शुरू करने की अनुशंसा नहीं की गई है इसलिए इसकी अनुमति देने का सवाल ही नहीं उठता है। जीएमओ चावल पर देश में कहीं कोई अनुसंधान कार्य भी नहीं चल रहा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32046</guid>				
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 16:08:05 +0530</pubDate>
            </item>
                
    </channel>

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