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        <title><![CDATA[ Igrain India ]]></title>
        <link><![CDATA[ https://igrain.in/feeds ]]></link>
        <description><![CDATA[ Igrain India ]]></description>
        <language>en</language>
        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 15:24:27 +0530</pubDate>
  
                    <item>
                <title><![CDATA[नवंबर के पहले पखवाड़े में चीनी मिलों को अतिरिक्त बिक्री की अनुमति]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">15 नवंबर 2026 तक उत्पादित चीनी को निर्धारित बिक्री कोटे से अतिरिक्त बेच सकेंगी मिलें</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">केंद्र सरकार ने नवंबर 2026 के पहले पखवाड़े के लिए चीनी मिलों को अतिरिक्त बिक्री की अनुमति दी है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) के अनुसार, चीनी मिलें 15 नवंबर 2026 तक उत्पादित चीनी को नवंबर के पहले पखवाड़े के लिए आवंटित बिक्री कोटे के अतिरिक्त बेच सकेंगी।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">यह अनुमति उन सभी चीनी मिलों पर लागू होगी, जिन्होंने अक्टूबर 2026 में पेराई शुरू कर दी थी या नवंबर 2026 में पेराई शुरू कर रही हैं।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">सरकार के अनुसार, अक्टूबर 2026 में पेराई शुरू कर चुकी चीनी मिलों को अक्टूबर महीने में उत्पादित चीनी की मात्रा नवंबर में बेचने की अनुमति पहले से ही प्रदान की गई है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p>इस निर्णय से नई पेराई शुरू करने वाली चीनी मिलों को अतिरिक्त चीनी बिक्री का अवसर मिलेगा।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39206</guid>				
                <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 17:17:40 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[बादामगिरी में मंदा]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। सितम्बर माह के दौरान आयातकों द्वारा बादाम का सर्वाधिक व्यापार किए जाने के कारण बादामगिरी की कीमतों में मंदा रहा और दिल्ली बाजार में बादामगिरी अमेरिकन का भाव घटकर 1080/1100 रुपए पर आ गया है </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">जोकि सितम्बर माह में ऊपर में 1190/1200 रुपए बोला जा रहा था। प्राप्त जानकारी के अनुसार सितम्बर- 2026 में बादाम का रिकॉर्ड आयात 2103 कंटेनर का किया गया है जोकि अब तक के इतिहास में सर्वाधिक आयात है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">सूत्रों का कहना है कि बादामगिरी की कीमतों में तेजी की संभावना नहीं है। दीपावली पर्व की लिवाली समाप्त हो जाने से गिरावट आने की संभावना है।</span></p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39203</guid>				
                <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 16:34:15 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में 65 लाख टन धान की खरीद का लक्ष्य]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-65-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2026-27 के मौजूदा खरीफ मार्केटिंग सीजन में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 65 लाख टन धान की सरकारी खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो पिछले मार्केटिंग सीजन की कुल वास्तविक खरीद 62 लाख टन से 3 लाख टन ज्यादा है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">आठ सरकारी एजेंसियों द्वारा राज्य के सभी 4000 क्रय केन्द्रों में धान की खरीद की जाएगी। इसमें से 4195 क्रय केन्द्र पहले ही सक्रिय हो चुके हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान खरीद की प्रक्रिया 1 नवम्बर 2026 से आरंभ होकर 28 फरवरी 2027 तक जारी रहेगी।&nbsp;</span></p><p>मौसम की मौजूदा स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तमाम सम्बद्ध अधिकारियों को क्रय केन्द्रों पर सभी आवश्यक सुविधा उपलब्ध करवाने का निर्देश दिया है ताकि किसानों को अपना उत्पाद बेचने में कोई कठिनाई न हो। </p><p>उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए धान का एमएसपी बढ़ाकर सामान्य श्रेणी के लिए 2441 रुपए प्रति&nbsp; क्विंटल तथा 'ए' ग्रेड के लिए 2461 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। खरीदे गए धान के मूल्य का भुगतान 48 घंटे के अंदर किया जाएगा।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39201</guid>				
                <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 16:09:29 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[उत्पादन में गिरावट की आशंका से चावल का भाव मजबूत रहने के आसार]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। खरीफ सीजन में धान का उत्पादन क्षेत्र 3.7 प्रतिशत घटने तथा दक्षिण-&nbsp; पश्चिम मानसून की बारिश 13 प्रतिशत कम होने से चावल के उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है। अल नीनो मौसम चक्र का प्रभाव बरकरार रहने से रबी सीजन में भी धान-चावल का उत्पादन संतोषजनक रहने में संदेह है। दूसरी ओर चावल की घरेलू एवं निर्यात मांग मजबूत बनी हुई है जिससे इसकी कीमतों में तेजी आने के संकेत मिल रहे हैं। सामान्य श्रेणी के साथ-साथ बासमती धान-चावल का दाम भी ऊंचा चल रहा है।</span></p><p>चावल की विभिन्न किस्मों एवं श्रेणियों के बाजार मूल्य में पिछले एक-डेढ़ माह से तेजी-मजबूती का माहौल बना हुआ है और आगे भी इसका सिलसिला जारी रहने की संभावना है। उपभोक्ता मामले विभाग के मूल्य निगरानी प्रकोष्ठ के अनुसार 30 अक्टूबर 2026 को अखिल भारतीय स्तर पर चावल का औसत खुदर मूल्य बढ़कर 48.25 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया जो गत वर्ष की इसी तिथि को प्रचलित मूल्य से 12 प्रतिशत ऊंचा है।&nbsp;&nbsp;</p><p>खरीफ कालीन धान की फसल की हालत मिश्रित देखी जा रही है। पंजाब-हरियाणा में स्थिति बेहतर है। छत्तीसगढ़ एवं उत्तर प्रदेश में भी हालत सामान्य बताई जा रही है मगर तेलंगाना एवं उड़ीसा सहित अन्य प्रांतों में फसल की दशा ज्यादा उत्साहवर्धक नहीं आंकी जा रही है। इससे धान की उपज दर में 4-5 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है। पंजाब, हरियाणा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान की नई फसल की कटाई-तैयारी पहले ही आरंभ हो चुकी है।</p><p>केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2025 के मुकाबले 2026 के खरीफ सीजन में धान का उत्पादन क्षेत्र लगभग 4 प्रतिशत घटकर 426.80 लाख हेक्टेयर रह गया दक्षिण भारत के चारों प्रमुख उत्पादक राज्यों- कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु में धान का रकबा घट गया। </p><p>2026-27 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन (खरीफ के रबी) के दौरान चावल का घरेलू उत्पादन घटकर 14.70 करोड़ टन पर सिमट जाने का अनुमान है जो 2025-26 सीजन के कुल उत्पादन 15.40 करोड़ टन से काफी कम है। दक्षिण तथा अफ्रीका के अनेक देशों में भारतीय चावल की जोरदार मांग देखी जा रही है क्योंकि इसका दाम प्रतिस्पर्धी स्तर पर मौजूद है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39199</guid>				
                <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[उम्मीद के अनुरूप रूई के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा में वृद्धि]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। घरेलू उत्पादन में गिरावट तथा कीमतों में वृद्धि की संभावना को देखते हुए रूई के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा में बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद की जा रही थी और इसके अनुरूप सरकार ने समय सीमा को दो माह के लिए बढ़ाने की घोषणा कर दी है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने 30 अक्टूबर को इसके लिए एक अधिसूचना जारी की जिसमें कहा गया कि रूई के शुल्क मुक्त आयात की अवधि अब 31 दिसम्बर 2026 तक बढ़ा दी गई है जबकि पहले 31 अक्टूबर 2026 तक नियत की गई थी। इससे देश के वस्त्र उद्योग को राहत मिलेगी और उसे विदेशों से सस्ते दाम या कम खर्च पर रूई का आयात जारी रखने का अवसर मिलता रहेगा।&nbsp;</span></p><p>उल्लेखनीय है कि रूई पर पहले 11 प्रतिशत का आयात शुल्क लगता था जिसे जुलाई में अस्थायी तौर पर स्थगित कर दिया गया। उस समय 31 अक्टूबर 2026 तक इसके शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी गई थी। यह समय सीमा आज समाप्त हो रही थी मगर उससे पूर्व ही इसे दो माह के लिए बढ़ा दिया गया है। अब चालू वर्ष के अंत तक देश में रूई का शुल्क मुक्त आयात जारी रहेगा। टैक्सटाइल उद्योग समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रहा था।&nbsp;</p><p>महाराष्ट्र एवं कर्नाटक जैसे महत्वपूर्ण उत्पादक राज्यों में सूखे का संकट होने से कपास की पैदावार इस बार घटने की संभावना है जिससे रूई की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल रह सकती है। भारतीय कपास निगम के पास भी रूई का ज्यादा स्टॉक नहीं है जिससे वस्त्र उद्योग की कठिनाई बढ़ने का अंदेशा था।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39193</guid>				
                <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 11:32:19 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मक्का की मांग एवं खपत बढ़ने की उम्मीद]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">बंगलोर। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष खरीफ कालीन मक्का के घरेलू उत्पादन में कमी आने की संभावना है क्योंकि एक तो इसके बिजाई क्षेत्र में गिरावट आ गई और दूसरे, मौसम तथा मानसून की हालत भी कुछ महत्वपूर्ण उत्पादक राज्यों में फसल के लिए अनुकूल नहीं रही। नए मक्के की आवक शुरू हो गई है।&nbsp;</span></p><p>दूसरी ओर मक्का की घरेलू मांग एवं खपत में बढ़ोत्तरी होने के आसार हैं। पशु आहार, पॉल्ट्री फीड एवं स्टार्च निर्माण उद्योग में मक्का की मांग मजबूत बनी हुई है जबकि एथनॉल उत्पादन में इसका उपयोग बढ़ने के आसार हैं। </p><p>सरकार ने एथनॉल निर्माण में गन्ना जूस, शुगर सीरप तथा बी हैवी शीरा के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है इससे डिस्टीलर्स को एथनॉल के निर्माण में मक्का, सरकारी चावल, अन्य क्षतिग्रस्त अनाज तथा सी-हैवी शीरा का इस्तेमाल बढ़ाने का प्रोत्साहन मिलेगा। </p><p>यद्यपि सरकार ने तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के लिए मक्का से निर्मित एथनॉल की खरीद के मूल्य में 3 रुपए प्रति लीटर की कटौती कर दी है। जिससे डिस्टीलर्स नाखुश और चिंतित है लेकिन फिर भी एथनॉल का भारी उत्पादन जारी रखना उसकी विवशता होगी। अन्य खपतकर्ता क्षेत्र में नियमित उपयोग जारी रहेगा।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39188</guid>				
                <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 11:08:59 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[का वर्षा जब कृषि सुखाने]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">जून से सितम्बर के चार महीनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान देश में दीर्घकालीन औसत के मुकाबले करीब 87 प्रतिशत बारिश हुई जबकि 15 अक्टूबर तक बारिश का स्तर घटकर 85 प्रतिशत रह गया। मौसम विभाग ने 15 अक्टूबर को ही देश से मानसून के पूरी तरह प्रस्थान करने की औपचारिक घोषणा की थी। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इस बार अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव से मानसून कमजोर पड़ गया। इस अवधि में न केवल राष्ट्रीय स्तर पर वर्षा कम हुई बल्कि इसका वितरण भी काफी हद तक असमान रहा जिससे कई राज्यों में खरीफ फसलों को नुकसान होने की आशंका है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं तेलंगाना जैसे राज्यों को भीषण सूखे के संकट का सामना करना पड़ा। इसी तरह गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक प्रांतों के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश हुई जबकि कुछ अन्य भागों में वर्षा का अभाव रहा। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">ध्यान देने की बात है कि उपरोक्त राज्यों में धान, दलहन, तिलहन, कपास, मोटे अनाज एवं गन्ना आदि का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। बारिश के असमान वितरण से इन सभी फसलों की उपज दर एवं पैदावार प्रभावित हुई है जिससे किसानों की आमदनी में कमी आने की आशंका है।&nbsp;</span></p><p>यद्यपि मध्य अक्टूबर के बाद उत्तर-प्रदेश मानसून की सक्रियता बढ़ने से देश के कुछ भागों और खासकर दक्षिणी प्रायद्वीप में अच्छी बारिश हुई और अब भी हो रही है लेकिन खरीफ फसलों को पहले ही भारी क्षति हो चुकी है। </p><p>इस बारिश से तुवर, गन्ना एवं कपास की फसल को थोड़ी राहत मिल सकती है। महाकवि तुलसी दास जी ने रामचरित मानस में कहा है कि- "का वर्षा जब कृषि सुखाने, समय चूक पुनि का पछताने।" अर्नब तूफान ने भी खरीफ फसलों को कुछ नुकसान पहुंचाया। खरीफ फसलों की कटाई-तैयारी तथा रबी फसलों की बिजाई आरंभ हो चुकी है जबकि कृषि उत्पाद बाजार में तेजी-मजबूती का माहौल देखा जा रहा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39185</guid>				
                <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 10:49:17 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[नए डिप्रेशन के निर्माण से तमिलनाडु- केरल में बारिश के आसार]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">तिरुअनन्तपुरम। दक्षिण अंडमान सागर के ऊपर बन रहे कम दाब का क्षेत्र शीघ्र ही डिप्रेशन में बदल सकता है जिससे केरल और तमिलनाडु में भारी वर्षा होने की संभावना है। उत्तर-पूर्व मानसून से दक्षिण भारत में जोरदार वर्षा होती है और फिलहाल यह मानसून पूरी तरह सक्रिय दिख रहा है। तमिलनाडु के विभिन्न भागों में पहले भी जोरदार बारिश हो चुकी है इन दोनों प्रांतों में होने वाली बारिश बागानी फसलों के लिए काफी लाभदायक साबित हो सकती है।&nbsp;&nbsp;</span></p><p>मौसम विभाग के अनुसार इस नए डिप्रेशन से अगले सप्ताह दक्षिण प्रायद्वीप में दूर-दूर तक बारिश होने की उम्मीद है केरल और तमिलनाडु के अलावा तटीय आंध्र प्रदेश तथा यानम में भी जोरदार बारिश हो सकती है। यह वर्षा 1 से 4 नवम्बर तक जारी रहेगी। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह भी इस वर्षा के दायरे में शामिल है।</p><p>अच्छी बात यह है कि इस डिप्रेशन से कर्नाटक के अनेक सूखा ग्रस्त इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है जिससे तुवर, मक्का, गन्ना एवं कालीमिर्च के साथ अन्य मसाला फसलों को फायदा हो सकता है। </p><p>कर्नाटक देश में कालीमिर्च एवं कॉफी का सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है जबकि वहां लालमिर्च हल्दी प्याज एवं नारियल का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर होता है। आंध्र प्रदेश में अत्यन्त तेज तूफान के साथ हुई जोरदार बारिश से बागानी तथा मसाला फसलों को नुकसान होने की आशंका है मगर तेलंगाना में होने वाली वर्षा इन फसलों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39179</guid>				
                <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 19:45:30 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[कच्चे काजू के बेहतर शिपमेंट से मोजाम्बिक का कृषि निर्यात सुधरा]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मापुतो। अफ्रीकी देश- मोजाम्बिक से चालू वर्ष की पहली छमाही में कच्चे काजू के निर्यात से 8.29 करोड़ डॉलर की आमदनी प्राप्त हुई। यद्यपि यह आमदनी गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में 17 प्रतिशत कम रही मगर कृषि उत्पादों के सकल निर्यात में इसका सर्वाधिक योगदान बरकरार रहा।&nbsp;</span></p><p>मोजाम्बिक के कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि वर्तमान वर्ष की पहली छमाही के दौरान देश से कृषि जिंसों का सकल निर्यात बढ़कर 10.85 करोड़ डॉलर (9.28 करोड़ यूरो) पर पहुंच गया जो वर्ष 2025 की समान अवधि के निर्यात 10.32 करोड़ डॉलर (8.83 करोड़ यूरो) से 5 प्रतिशत अधिक रहा।&nbsp;</p><p>जहां तक निर्यात की मात्रा का सवाल है तो मोजाम्बिक से वर्ष 2025 की पहली छमाही में 73,391 टन कच्चे काजू का निर्यात हुआ जो वर्ष 2026 की समान अवधि से बढ़कर 74,664 टन पर पहुंच गया लेकिन ऑफर मूल्य कमजोर रहने से निर्यात आय में भारी गिरावट आ गई। वियतनाम और भारत इस काजू के सबसे प्रमुख आयातक देश बने रहे।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39177</guid>				
                <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 19:42:11 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[रबी फसलों की बिजाई की गति शीघ्र ही तेज होने की उम्मीद]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। देश के अनेक राज्यों में भारी बारिश हो रही है और अगले सप्ताह तक इसका सिलसिला बरकरार रहने की संभावना है जिससे सूखे का संकट काफी हद तक दूर हो सकता है। तापमान में गिरावट आने से खेतों की मिटटी से नमी सूखने की गति धीमी पड़ जाएगी जिससे रबी फसलों की अच्छी प्रगति सुनिश्चित हो सकती है। भारी वर्षा के कारण बांधों-जलाशयों में जल स्तर बढ़ने के आसार हैं जिससे फसलों की सिंचाई के लिए सही समय पर पानी मिल सकता है।&nbsp; &nbsp;</span></p><p>हालांकि अल नीनो मौसम चक्र का खतरा न केवल कायम है बल्कि और भी गंभीर होने की आशंका है लेकिन फिलहाल वर्षा एवं तापमान की स्थिति सामान्य देखी जा रही है। मौसम विभाग के दक्षिण-पश्चिम मानसून की भांति उत्तर-पूर्व मानसून भी कुछ कमजोर रहने की संभावना व्यक्त की है लेकिन इसका असर मध्य नवम्बर के बाद दिखाई पड़ सकता है। </p><p>देश के कई राज्यों में जून-सितम्बर के दौरान मानसून की कम वर्षा होने से खेतों की मिटटी में नमी का अभाव उत्पन्न हो गया था इसलिए रबी फसलों की बिजाई की रफ्तार बढ़ाने में किसानों को भारी कठिनाई होने लगी। हालांकि सरसों एवं चना सहित कुछ अन्य जिंसों का बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी ऊंचा चल रहा है और गेहूं&nbsp; का दाम भी मजबूत होने लगा है जिससे किसान इसकी बिजाई अधिक से अधिक क्षेत्रफल में करने के इच्छुक हैं लेकिन उसे अनुकूल मौसम का सहारा नहीं मिल रहा था। </p><p>अब हालात अच्छे है इसलिए किसानों की सक्रियता तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। खाद-बीज का समुचित स्टॉक मौजूद है और बारिश का सहारा भी मिल रहा है। महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं तेलंगाना जैसे राज्यों को अच्छी वर्षा की सख्त आवश्यकता थी जो अब पूरी हो रही है या होने वाली है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39175</guid>				
                <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 19:37:52 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[जीरा कीमतों में मंदे की संभावना नहीं : बिजाई प्रभावित होने की आशंका]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p style="text-align: justify; "><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। चालू सप्ताह के दौरान जीरा कीमतों में मिला-जुला व्यापार रहा। सप्ताह के शुरू में भाव घटने के पश्चात सप्ताह के अंत में भाव तेज रहे। सूत्रों का कहना है कि हालांकि हाल ही में आई कीमतों में तेजी के कारण जीरा बिजाई के&nbsp; पूर्वानुमानों की तुलना में वृद्धि होगी। लेकिन बिजाई गत वर्ष की तुलना में कम रहेगी। उल्लेखनीय है कि पूर्व में अनुमान लगाए जा रहे थे कि इस वर्ष उत्पादक केन्द्रों पर जीरे की बिजाई 35/40 प्रतिशत कम रहेगी। लेकिन गत दिनों आई कीमतों में 20/25 रुपए की तेजी के पश्चात संभावना व्यक्त की जा रही है कि बिजाई 25/30 प्रतिशत कम रहेगी। प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में जीरे की बिजाई का कार्य शुरू हो चुका है जबकि राजस्थान में बिजाई का कार्य आगामी महीने में शुरू होगा। इस वर्ष पानी की कमी के चलते बिजाई प्रभावित रहेगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार गत वर्ष देश में 11.18 लाख हेक्टेयर पर की गई थी जबकि वर्ष 2025 में बिजाई 11.71 लाख हेक्टेयर पर की गई थी।&nbsp;</span></p><p style="text-align: justify; "><b>अधिक मंदा नहीं&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">जानकार सूत्रों का कहना है कि एक तरफा तेजी के पश्चात बाजार में मुनाफावसूली बिकवाली बढ़ने की संभावना है जिस कारण से अल्पकाल के लिए भाव घट सकते हैं लेकिन अधिक नहीं। व्यापारियों का कहना है कि आगामी दिनों में भारतीय जीरे की निर्यात मांग बढ़ेगी। आगामी दिनों में रमजान की खरीद भी बाजार में आएगी। साथ ही बिजाई के पश्चात मौसम कैसा रहता है यह भी मंदा-तेजी निर्धारित करेगा। वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों पर जीरे के भाव 225/255 रुपए प्रति किलो चल रहे हैं।&nbsp;</p><p style="text-align: justify; "><b>स्टॉक&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">जानकार सूत्रों का कहना है कि चालू सीजन के दौरान चीन की कमजोर मांग के कारण जीरे का निर्यात घटा है। जिस कारण से उत्पादक केन्द्रों पर स्टॉक पर्याप्त है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्तमान में गुजरात में जीरे का स्टॉक 18/20 लाख बोरी का माना जा रहा है जबकि राजस्थान में स्टॉक 28/30 लाख बोरी होने के समाचार मिल रहे हैं जोकि नई फसल आने तक पर्याप्त है।</p><p style="text-align: justify; "><b>घटेगा उत्पादन&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">जानकार सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2027 के दौरान भी जीरे का उत्पादन घटने के पूर्वानुमान लगाए जा रहे हैं। चालू सीजन के दौरान देश में जीरे का उत्पादन 93/94 लाख बोरी के लगाए गए थे जबकि वर्ष 2025 में उत्पादन 97/98 लाख बोरी का माना गया था। सूत्रों का मानना है कि बिजाई क्षेत्रफल में कमी आने के अलावा अल नीनो का प्रभाव भी फसल पर पड़ेगा। जिस कारण से उत्पादन भी प्रभावित होगा।&nbsp;&nbsp;</p><p style="text-align: justify; "><b>आवक&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">गत दिनों आई कीमतों में तेजी के कारण किसानों की बिकवाली बढ़ गई है और आवक भी बढ़ी है। प्रमुख मंडी ऊंझा में आवक बढ़कर 12/13 हजार बोरी की हो गई है। राजकोट में भी आवक 1200/1300 बोरी की हो रही है। जबकि राजस्थान की मेडता मंडी में आवक 2000/2500 बोरी की चल रही है। नागौर मंडी में आवक 800/1000 बोरी एवं जोधपुर 700/800 बोरी की हो रही है।&nbsp;</p><p style="text-align: justify; "><b>निर्यात घटा&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">चीन का निर्यात प्रभावित होने के कारण चालू वित्त वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही में भारतीय जीरे का निर्यात&nbsp; मात्रात्मक रूप में 24 प्रतिशत घटा है जबकि निर्यात से प्राप्त आय में 26 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जून - 2026 में जीरे का निर्यात 47916 टन का हुआ है और निर्यात से प्राप्त आय 1118.11 करोड़ की रही। अप्रैल-जून 2025 में निर्यात 62886 टन का हुआ था और निर्यात से प्राप्त आय 1514.61 करोड़ की रही। वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान जीरे का कुल निर्यात 196800 टन का रहा और प्राप्त आय 4611.15 करोड़ की रही।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39173</guid>				
                <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 18:45:43 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[दाल-दलहन बाजार में मजबूती बरकरार रहने की संभावना]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। घरेलू प्रभाग में दाल-दलहन का भाव आगामी समय में ऊंचे स्तर पर मजबूत रहने की संभावना है। त्यौहारी सीजन समाप्त होने के बाद लग्नसरा का सीजन शुरू हो जाएगा जो फरवरी-मार्च तक चलता रहेगा। इस वर्ष मौसम एवं मानसून की हालत पूरी तरह फसल के अनुकूल नहीं होने से खरीफ कालीन दलहन और खासकर अरहर (तुवर) एवं मूंग के उत्पादन में गिरावट आने की आशंका है। उड़द का उत्पादन सामान्य हो सकता है।&nbsp;</span></p><p>अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख निर्यातक देशों में दलहन का भाव तेज होने लगा है। कनाडा में मसूर, मटर एवं काबुली चना के उत्पादन में गिरावट आई है लेकिन पिछला बकाया स्टॉक ऊंचा है। </p><p>वहां दलहन फसलों की कटाई-तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है लेकिन बेमौसमी वर्षा के कारण इसकी क्वालिटी पर असर पड़ा है। उधर ऑस्ट्रेलिया में मसूर का उत्पादन बढ़ने मगर चना की पैदावार घटने की संभावना है। </p><p>वहां नई की कटाई आरंभ हो चुकी है लेकिन असामयिक बारिश से वहां भी दलहनों की क्वालिटी प्रभावित होने की आशंका है। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में दलहनों का भाव ऊंचा एवं तेज है।&nbsp;</p><p>अफ्रीकी देशों में तुवर का उत्पादन उम्मीद से कम हुआ है जबकि म्यांमार में तुवर एवं उड़द की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। ब्राजील में भी उड़द का उत्पादन बेहतर होने की संभावना है। भारतीय रुपए की कमजोरी से दलहनों का&nbsp; आयात महंगा बैठ रहा है लेकिन फिर भी इसकी मात्रा बढ़ रही है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39171</guid>				
                <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 17:51:48 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[कर्नाटक में एक्स फील्ड आधार पर गन्ना का दाम नियत करने का आग्रह]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मैसूर। केन्द्र सरकार द्वारा गन्ना उत्पादकों की समस्याओं एवं शिकायतों के निपटान हेतु उपाय सुझाने के लिए गठित एक उच्च स्तरीय समीति जब कर्नाटक पहुंची तब वहां गन्ना उत्पादक संगठन के प्रतिनिधियों ने उससे आग्रह किया कि गन्ना के लिए उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) का निर्धारण एक्स फैक्टरी आधार पर नहीं बल्कि एक्स फील्ड (खेत) के आधार पर करने की प्रणााली लागू की जानी चाहिए </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">ताकि किसानों को एफआरपी का पूरा फायदा प्राप्त हो सके और उसे फसल की कटाई तथा उसके परिवहन पर होने वाले खर्च से छुटकारा मिल सके। वर्तमान समय में चीनी मिलों द्वारा इस खर्च को काटकर गन्ना किसानों को एफआरपी का भुगतान किया जाता है जिससे उसे पूरी राशि नहीं मिल पाती है।&nbsp;</span></p><p>गन्ना के मूल्य निर्धारण एवं लागत खर्च पर अपना पक्ष रखने के लिए कर्नाटक के किसानों ने 29 अक्टूबर को बंगलोर में केन्द्रीय समिति के सदस्यों से मुलाकात की थी। हाल ही में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर उत्तरी कर्नाटक के गन्ना उत्पादकों ने जोरदार आंदोलन किया था और तब केन्द्र सरकार ने नीति आयोग के एक पूर्व सदस्य की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। </p><p>यह समिति अब गन्ना किसानों द्वारा उठाये गए मुद्दों का आंकलन विश्लेषण करेगी और फिर विभिन्न उपयुक्त उपायों की सिफारिशों के साथ केन्द्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। उसके आधार पर सरकार कोई निर्णय ले सकती है।&nbsp;</p><p>चीनी के उत्पादन में महाराष्ट्र पहले तथा कर्नाटक तीसरे नंबर पर रहता है जबकि दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश है। महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना उत्पादक चाहते हैं कि गन्ना का एफआरपी 4500 से 5500 रुपए प्रति टन के बीच नियत हो अथवा फसल कटाई एवं ढुलाई का खर्च सीधे चीनी मिलों द्वारा वहन किया जाए।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39169</guid>				
                <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 17:24:26 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[यूरोपीय संघ एवं जापान में मोजाम्बिक से तिल का अच्छा निर्यात]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मापुतो। अफ्रीकी देश- मोजाम्बिक से चालू वर्ष के शुरूआती नौ महीनों में यानी जनवरी से सितम्बर 2026 के दौरान यूरोपीय संघ एवं जापान को 64 खेपों में तिल का निर्यात किया गया जिसमें से एक भी खेप को अस्वीकार नहीं किया गया। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">ज्ञात हो कि ये दोनों ऐसे बाजार हैं जहां उत्पाद की क्वालिटी पर विशेष ध्यान दिया जाता है और मिलावटी नकली या खराब क्वालिटी के माल को तत्काल रिजेक्ट कर दिया जाता है।&nbsp;</span></p><p>इन 64 खेपों में से प्रत्येक खेप में 100 टन तिल का स्टॉक था और इस तरह कुल मिलाकर 6400 टन तिल का शिपमेंट हुआ। इसमें से 1400 टन का शिपमेंट यूरोपीय संघ को और शेष 5000 टन का निर्यात जापान को किया गया। </p><p>आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस 9 माह की अवधि के दौरान मोजाम्बिक से कुल मिलाकर 48,915 टन तिल का निर्यात हुआ जिसमें यूरोपीय संघ एवं जापान को भेजा गया 6400 टन का स्टॉक भी शामिल था।</p><p> लेकिन इसमें से तिल की किसी खेप को न तो किसी आयातक देश ने अस्वीकार किया और न ही उसे वापस भेजा। पिछले पांच वर्षों में यह पहला अवसर था जबकि मोजाम्बिक तिल को हर जगह पसंद किया गया जबकि पहले कोई न कोई देश इसे रिजेक्ट कर देता था।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39167</guid>				
                <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 17:03:32 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अर्नब तूफान से आंध्र प्रदेश को भारी नुकसान की आशंका]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">विजयवाड़ा। बंगाल की खाड़ी से उठा भयंकर समुद्री चक्रवाती तूफान- अर्नब तूफान खासकर आंध्र प्रदेश के लिए विनाशकारी साबित हुआ। इसके प्रकोप से राज्य के लगभग 4600 करोड़ (46 अरब) रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री का कहना है कि नुकसान का यह आरम्भिक आंकलन है जबकि अंतिम तस्वीर सामने आने के बाद इसमें और वृद्धि हो सकती है।&nbsp;</span></p><p>उल्लेखनीय है कि अर्नब तूफान सबसे पहले आंध्र प्रदेश के तट से ही टकराया था और तटवर्ती क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सक्रिय एवं आक्रामक भी रहा था। मुख्यमंत्री ने कोना सीमा जिले में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में कहा कि तूफान से हुई भारी क्षति के बारे में केन्द्र सरकार को पूरी सूचना दे दी गई है और यह भी बता दिया गया है कि इसके प्रभाव को घटाने के लिए राज्य सरकार ने किस तरह एहतियाती कदम उठाया था। </p><p>केन्द्र सरकार ने शीघ्र ही अपना एक दल राज्य के तूफान प्रभावित इलाकों में भेजने तथा उसकी रिपोर्ट के आधार पर हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने का वादा किया है। मुख्यमंत्री ने तूफान से गिरने वाले नारियल एवं ऑयल पाम के पेड़ के लिए किसानों को 1500 रुपए प्रति पेड़ की दर से मुआवजा देने की घोषणा की। इसके अलावा प्रभावित लोगों को 25 किलो चावल एवं अन्य आवश्यक चीजों से भरा किट भी प्रदान किया।&nbsp;</p><p>अन्य फसलों के लिए किसानों को फसल बीमा की अग्रिम राशि प्रदान की जाएगी और तूफान से क्षतिग्रस्त फसलों के लिए किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। आंध्र प्रदेश में इस तूफान से बागानी फसलों के साथ-साथ खरीफ फसलों को भी क्षति पहुंची है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39165</guid>				
                <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 16:13:30 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[नवंबर 2026 के पहले पखवाड़े के लिए 13 लाख टन चीनी बिक्री कोटा जारी]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-2026-13-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">अक्टूबर में पेराई शुरू करने वाली चीनी मिलों को नवंबर में अक्टूबर के उत्पादन की चीनी बेचने की भी अनुमति</span></p><p>केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने नवंबर 2026 के पहले पखवाड़े (1 से 15 नवंबर) के लिए घरेलू बाजार में चीनी बिक्री का कोटा 13 लाख मीट्रिक टन (13 LMT) निर्धारित किया है।</p><p>सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नवंबर के पहले पखवाड़े के दौरान चीनी मिलें निर्धारित 13 लाख टन कोटे के तहत घरेलू बाजार में चीनी की बिक्री कर सकेंगी।</p><p>इसके अतिरिक्त, जिन चीनी मिलों ने अक्टूबर 2026 के दौरान गन्ने की पेराई शुरू कर दी है, उन्हें अक्टूबर माह में उत्पादित चीनी की मात्रा को नवंबर 2026 में बेचने की भी अनुमति दी गई है।</p><p>सरकार के इस फैसले से नई पेराई शुरू करने वाली चीनी मिलों को अतिरिक्त बिक्री की सुविधा मिलेगी तथा घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39163</guid>				
                <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 16:04:57 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अल नीनो की बढ़ती सघनता भारत के लिए चिंता का विषय]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। विषुवतीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह पर तापमान में हो रही बढ़ोत्तरी के कारण अल नीनो मौसम चक्र की सघनता, तीव्रत एवं ताकत बढ़ती जा रही है जो भारत के लिए चिंता की बात है। मजबूत अल नीनो भारत में वर्षा के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।&nbsp;</span></p><p>दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में देश के अंदर ग्रीष्मकालीन वर्षा कम हुई जिसके प्रभाव से खरीफ उत्पादन में गिरावट आने की आशंका है। अब उत्तर-पूर्व मानसून यानी शीतकाल की बारिश पर खतरा मंडरा रहा है। </p><p>यद्यपि वर्तमान समय में देश के विभिन्न भागों में अच्छी वर्षा हो रही है और कमोबेश नवम्बर के प्रथम सप्ताह तक इसका क्रम जारी रहने की संभावना है। लेकिन उसके बाद बारिश का अभाव महसूस हो सकता है। </p><p>इससे कुछ राज्यों में रबी फसलों की बिजाई एवं प्रगति प्रभावित होने की आशंका रहेगी। यदि हिन्द महासागर का डायपोल जल्दी से जल्दी घनात्मक हो गया तो भारत पर अल नीनो का प्रतिकूल प्रभाव काफी हद तक घट सकता है। इसके घनात्मक होने की उम्मीद बढ़ रही है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39161</guid>				
                <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 15:34:42 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में बारिश के कारण फसलों की कटाई में बाधा]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">ब्रिसबेन। ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी भाग में बारिश होने से विभिन्न फसलों का कटाई-तैयारी में बाधा पड़ रही है। अक्टूबर का महीना अब समाप्त होने वाला है लेकिन परम्परा के विपरीत तीन अग्रणी बल्क हैंडलर्स में से एक ने ही फसल कटाई की रिपोर्ट जारी की है। इस हैंडलर (निर्यात संचालक प्रतिष्ठान) 24 सितम्बर को उत्पाद की पहली खेप हासिल हुई थी जबकि इसकी पहली साप्ताहिक फसल कटाई की रिपोर्ट 13 अक्टूबर को जारी हुई।&nbsp;</span></p><p>ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख चना उत्पादक राज्य न्यू साउथ वेल्स तथा क्वींसलैंड में नियमित रूप से होने वाली बारिश के कारण फसल की कटाई में देर हो रही है और उसकी क्वालिटी भी प्रभावित होने की आशंका है। इसी तरह मसूर के अग्रणी उत्पादक प्रांतों- साउथ ऑस्ट्रेलिया एवं विक्टोरिया में अब बारिश की आवश्यकता नहीं है लेकिन यदि बेमौसमी वर्षा हुई तो फसल को नुकसान हो सकता है। अधिकांश इलाकों में चना एवं मसूर की फसल परिपक्व होकर अब कटाई-तैयारी के चरण में पहुंच चुकी है।</p><p>बल्क ग्रेन हैंडलर फर्म- बुंगे के साउथ ऑस्ट्रेलिया एवं क्वींसलैंड प्रान्त में अवस्थित स्टोरेज नेटवर्क पर अभी तक लगभग 2.91 लाख टन कृषि उत्पादों की डिलीवरी हुई है एक अन्य बल्क हैंडलर- सीवीएच ग्रुप को पहली खेप 22 सितम्बर को जेराल्ड टन टर्मिनल पर प्राप्त हुई थी लेकिन उसने अभी तक अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट जारी नहीं की है। पिछले साल उसने 27 अक्टूबर को रिपोर्ट जारी की थी जबकि इस वर्ष 2 नवम्बर को रिपोर्ट जारी होने की संभावना है।&nbsp;</p><p>टर्मिनलों / भंडारण नेटवर्क पर कम मात्रा में उत्पाद पहुंचने से स्पष्ट संकेत मिलता है कि ऑस्ट्रेलिया में खराब मौसम के कारण दलहन सहित अन्य फसलों की कटाई-तैयारी की गति धीमी चल रही है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39157</guid>				
                <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 13:49:06 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[रूई का उत्पादन घटने एवं भाव ऊंचा होने से वस्त्र उद्योग चिंतित]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मम्बई। भारतीय वस्त्र उद्योग को कच्चे माल की आपूर्ति की चिंता सता रही है। रूई के घरेलू उत्पादन में गिरावट आने तथा भाव ऊंचा रहने से उद्योग की चुनौती बढ़ रही है रूई की मांग एवं खपत तेजी से बढ़ रही है मगर इसके अनुरूप आपूर्ति एवं उपलब्धता में इजाफा नहीं हो रहा है। विदेशों से विशाल मात्रा में रूई के आयात की आवश्यकता पड़ती है।&nbsp;&nbsp;</span></p><p>समीक्षकों के मुताबिक 2026-27 सीजन के दौरान देश में रूई का उत्पादन घटकर 290 लाख गांठ से नीचे आने की संभावना है जबकि इसकी मांग 340 लाख गांठ से ज्यादा रहने की उम्मीद है। इस तरह मांग एवं आपूर्ति के बीच कम से कम 50 लाख गांठ का भारी अंतर रह सकता है।&nbsp;</p><p>इस विशाल अंतर को पाटने के लिए विदेशों से भारी मात्रा में रूई के आयात की आवश्यकता पड़ेगी। 31 अक्टूबर तक रूई का आयात शुल्क मुक्त रहेगा और ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार इसकी अवधि दो माह बढ़ाकर 31 दिसम्बर 2026 तक नियत कर सकती है। </p><p>रूई पर पहले 11 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू था। शुल्क मुक्त आयात की अवधि बढ़ाने के सम्बन्ध में अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय की घोषणा नहीं की गई है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/39155</guid>				
                <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 13:07:49 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अधिकांश राज्यों में खाद्य निगम के गेहूं की 100 प्रतिशत बिक्री]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-100-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। फ्लोर मिलर्स एवं प्रोसेसर्स द्वारा खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के अंतर्गत बेचे जाने वाले सरकारी गेहूं की खरीद में भारी दिलचस्पी दिखाई जा रही है क्योंकि थोक मंडियों में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल होती जा रही है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">भारतीय खाद्य निगम द्वारा 28 अक्टूबर 2026 को आयोजित ई-नीलामी में एक लाख टन गेहूं की बिक्री का ऑफर दिया गया था जिसमें से लगभग 95 हजार टन की बिक्री हो गई। दीपावली की जबरदस्त मांग के कारण अधिकांश राज्यों में दिए गए ऑफर की लगभग सम्पूर्ण मात्रा की खरीद कर ली गई।</span></p><p>देश के 20 से अधिक राज्यों में खाद्य निगम द्वारा गेहूं की बिक्री का ऑफर दिया गया। प्रत्येक राज्य के लिए अलग-अलग मात्रा का आवंटन किया गया था। इसमें से 17 राज्यों में गेहूं की शत-प्रतिशत मात्रा की बिक्री हो गई। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि अधिकतर प्रांतों के मिलर्स को गेहूं की भारी जरूरत है।&nbsp;</p><p>दिलचस्प तथ्य यह है कि देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों- पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश में गेहूं के ऑफर की पूरी मात्रा की खरीद-बिक्री हो गई। इसके साथ-साथ दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र एवं राजस्थान जैसे महत्वपूर्ण खपतकर्ता प्रांतों में भी गेहूं की भारी खरीद हुई। पूर्वी राज्यों में गेहूं के ऑफर की सम्पूर्ण मात्रा का उठाव हो गया। इन राज्यों में बिहार, उड़ीसा एवं पश्चिम बंगाल भी शामिल है। वहां गेहूं का बाजार भाव ऊंचा एवं तेज चल रहा है।&nbsp;</p><p>मिलर्स का कहना है कि सिर्फ दीपावली के कारण गेहूं की जोरदार खरीद नहीं हो रही है बल्कि मंडियों&nbsp; में उचित मात्रा में स्टॉक नहीं पहुंचने तथा उद्योग की सामान्य जरूरत ज्यादा होने के कारण भी खरीदारी की रफ्तार तेज हो रही है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
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                <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 12:48:09 +0530</pubDate>
            </item>
                
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