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        <title><![CDATA[ Igrain India ]]></title>
        <link><![CDATA[ https://igrain.in/feeds ]]></link>
        <description><![CDATA[ Igrain India ]]></description>
        <language>en</language>
        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 02:08:51 +0530</pubDate>
  
                    <item>
                <title><![CDATA[साप्ताहिक समीक्षा- सोयाबीन]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<div style="text-align: justify;"><span style="font-weight: bolder;">साप्ताहिक समीक्षा- सोयाबीन&nbsp;</span></div><div style="text-align: justify;"><span style="font-weight: bolder;"><br></span></div><div style="text-align: justify;"><span style="font-weight: bolder;">ऊंचे दाम पर लिवाली कम होने से सोयाबीन में नरमी</span></div><div style="text-align: justify;"><br></div><div style="text-align: justify;">नई दिल्ली। विदेशों से सोयाबीन तेल का भारी आयात जारी रहने तथा अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाजार में भारतीय सोयामील की प्रतिस्पर्धी क्षमता घट जाने से 25-31 जुलाई वाले सप्ताह के दौरान ऊंचे दाम पर सोयाबीन की खरीद में क्रशर्स / प्रोसेसर्स की दिलचस्पी कमजोर पड़ गई।&nbsp;</div><div style="text-align: justify;"><span style="font-weight: bolder;">प्लांट भाव&nbsp;</span></div><div style="text-align: justify;">इसके फलस्वरूप तीनों शीर्ष उत्पादक राज्यों- मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं राजस्थान में सोयाबीन के प्लांट डिलीवरी मूल्य में 100 से 350 रुपए प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई। महाराष्ट्र में धुलिया के एक प्लांट में भाव 330 रुपए तथा नंदूरबार के एक प्लांट में 420 रुपए प्रति क्विंटल नीचे आ गया।&nbsp;</div><div style="text-align: justify;"><span style="font-weight: bolder;">सोया रिफाइंड (तेल)&nbsp;</span></div><div style="text-align: justify;">इसका असर सोया रिफाइंड तेल के दाम पर भी देखा गया और उसमें प्रति 10 किलो पर मध्य प्रदेश में 10 से 25 रुपए तथा महाराष्ट्र के प्लांटों में 15 से 40 रुपए तक की गिरावट दर्ज की गई। इसका भाव कांडला में 15 रुपए फिसलकर 1450 रुपए प्रति 10 किलो, हल्दिया में 23 रुपए गिरकर 1440 रुपए प्रति 10 किलो, कोटा में 25 रुपए घटकर 1485 रुपए प्रति 10 किलो तथा मुम्बई में 40 रुपए लुढ़ककर 1440 रुपए रह गया।&nbsp;</div><div style="text-align: justify;"><span style="font-weight: bolder;">आवक&nbsp;</span></div><div style="text-align: justify;">प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में 27 जुलाई को 1.40 लाख बोरी सोयाबीन की आवक हुई जो 28 जुलाई को गिरकर 1.15 लाख बोरी तथा 29 जुलाई को घटकर 50 हजार बोरी पर आने के बाद 30 जुलाई को सुधरकर 1.10 लाख बोरी पर पहुंच गई। सोयाबीन की प्रत्येक बोरी 100 किलो (1 क्विंटल) की होती है।</div><div style="text-align: justify;"><span style="font-weight: bolder;">उत्पादन&nbsp;</span></div><div style="text-align: justify;">सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के काफी करीब पहुंच गया है और अभी फसल की हालत संतोषजनक बताई जा रही है। चालू माह (भारत) का मौसम एवं मानसून इस महत्वपूर्ण तिलहन फसल के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण साबित होगा।</div>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35917</guid>				
                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 20:04:00 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[त्योहारी मांग और मजबूत क्रशिंग से सरसों बाजार में तेजी, सीजन के अंत तक आपूर्ति संकट की आशंका: आई-ग्रेन इंडिया मार्केट कमेंट्री]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><b>त्योहारी मांग और मजबूत क्रशिंग से सरसों बाजार में तेजी, सीजन के अंत तक आपूर्ति संकट की आशंका: आई-ग्रेन इंडिया मार्केट कमेंट्री</b><br>सरसों बाजार में तेजी का रुख लगातार बना हुआ है। त्योहारी सीजन की मांग धीरे-धीरे बाजार में आने लगी है, जबकि तेल मिलों की खरीद और क्रशिंग गतिविधियां भी मजबूत बनी हुई हैं। बढ़ती मांग और सीमित उपलब्धता की आशंका के कारण बाजार की धारणा लगातार सकारात्मक बनी हुई है।<br><br>साप्ताहिक भावों में मजबूती<br>सप्ताह के दौरान जयपुर 42% कंडीशन सरसों के भाव ₹75 बढ़कर ₹8,425 प्रति क्विंटल हो गए। भरतपुर में सबसे अधिक ₹100 की तेजी दर्ज हुई और भाव ₹7,950 प्रति क्विंटल पहुंच गए। आगरा शमशाबाद सलोनी प्लांट के भाव भी ₹75 बढ़कर ₹9,150 प्रति क्विंटल हो गए, जबकि चरखी दादरी के भाव ₹8,350 प्रति क्विंटल पर स्थिर रहे।<br>सरसों तेल में भी मजबूती का रुख बना रहा। भरतपुर कच्ची घानी और एक्सपेलर तेल के भाव ₹30 प्रति 10 किलो बढ़े, जबकि जयपुर कच्ची घानी और चरखी दादरी एक्सपेलर के भाव स्थिर रहे।<br><br>जून और जुलाई की तुलना में बाजार मजबूत<br>जून के औसत भावों की तुलना में वर्तमान सरसों के भाव ₹475 से ₹650 प्रति क्विंटल तक अधिक चल रहे हैं। जयपुर में भाव जून औसत से ₹500, चरखी दादरी में ₹650, भरतपुर में ₹479 तथा आगरा सलोनी में ₹475 प्रति क्विंटल ऊपर हैं।<br>इसी प्रकार सरसों तेल के भाव भी जून औसत से ₹110-140 प्रति 10 किलो तक मजबूत बने हुए हैं। जुलाई के दौरान भी बाजार में लगातार सुधार देखने को मिला, जिससे यह स्पष्ट है कि मांग और खरीदारी दोनों मजबूत बनी हुई हैं।<br><br>बाजार आउटलुक<br>त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ खाद्य तेलों की मांग लगातार बढ़ने की संभावना है, जिससे तेल मिलों की सरसों खरीद और क्रशिंग मजबूत बनी रह सकती है। दूसरी ओर, उत्पादन अनुमान में कटौती और सीजन के अंत तक सीमित स्टॉक की संभावना बाजार के लिए प्रमुख सहायक कारक हैं।<br>यदि वर्तमान गति से क्रशिंग जारी रहती है, तो नई फसल आने से पहले बाजार में सरसों की उपलब्धता कम हो सकती है। ऐसे में मिलों के बीच खरीद प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है, जिससे सरसों और सरसों तेल के भावों में आगे भी मजबूती बनी रह सकती है। निकट अवधि में आने वाली किसी भी सीमित गिरावट को खरीदारी का अवसर माना जा सकता है, जबकि सीजन के अंतिम महीनों में आपूर्ति संकट की आशंका बाजार को और मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35912</guid>				
                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 18:56:01 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[त्योहारी मांग और मजबूत क्रशिंग से सरसों बाजार में तेजी, सीजन के अंत तक आपूर्ति संकट की आशंका: आई-ग्रेन इंडिया मार्केट कमेंट्री]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><b>त्योहारी मांग और मजबूत क्रशिंग से सरसों बाजार में तेजी, सीजन के अंत तक आपूर्ति संकट की आशंका: आई-ग्रेन इंडिया मार्केट कमेंट्री</b><br>सरसों बाजार में तेजी का रुख लगातार बना हुआ है। त्योहारी सीजन की मांग धीरे-धीरे बाजार में आने लगी है, जबकि तेल मिलों की खरीद और क्रशिंग गतिविधियां भी मजबूत बनी हुई हैं। बढ़ती मांग और सीमित उपलब्धता की आशंका के कारण बाजार की धारणा लगातार सकारात्मक बनी हुई है।<br><br>साप्ताहिक भावों में मजबूती<br>सप्ताह के दौरान जयपुर 42% कंडीशन सरसों के भाव ₹75 बढ़कर ₹8,425 प्रति क्विंटल हो गए। भरतपुर में सबसे अधिक ₹100 की तेजी दर्ज हुई और भाव ₹7,950 प्रति क्विंटल पहुंच गए। आगरा शमशाबाद सलोनी प्लांट के भाव भी ₹75 बढ़कर ₹9,150 प्रति क्विंटल हो गए, जबकि चरखी दादरी के भाव ₹8,350 प्रति क्विंटल पर स्थिर रहे।<br>सरसों तेल में भी मजबूती का रुख बना रहा। भरतपुर कच्ची घानी और एक्सपेलर तेल के भाव ₹30 प्रति 10 किलो बढ़े, जबकि जयपुर कच्ची घानी और चरखी दादरी एक्सपेलर के भाव स्थिर रहे।<br><br>जून और जुलाई की तुलना में बाजार मजबूत<br>जून के औसत भावों की तुलना में वर्तमान सरसों के भाव ₹475 से ₹650 प्रति क्विंटल तक अधिक चल रहे हैं। जयपुर में भाव जून औसत से ₹500, चरखी दादरी में ₹650, भरतपुर में ₹479 तथा आगरा सलोनी में ₹475 प्रति क्विंटल ऊपर हैं।<br>इसी प्रकार सरसों तेल के भाव भी जून औसत से ₹110-140 प्रति 10 किलो तक मजबूत बने हुए हैं। जुलाई के दौरान भी बाजार में लगातार सुधार देखने को मिला, जिससे यह स्पष्ट है कि मांग और खरीदारी दोनों मजबूत बनी हुई हैं।<br><br>बाजार आउटलुक<br>त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ खाद्य तेलों की मांग लगातार बढ़ने की संभावना है, जिससे तेल मिलों की सरसों खरीद और क्रशिंग मजबूत बनी रह सकती है। दूसरी ओर, उत्पादन अनुमान में कटौती और सीजन के अंत तक सीमित स्टॉक की संभावना बाजार के लिए प्रमुख सहायक कारक हैं।<br>यदि वर्तमान गति से क्रशिंग जारी रहती है, तो नई फसल आने से पहले बाजार में सरसों की उपलब्धता कम हो सकती है। ऐसे में मिलों के बीच खरीद प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है, जिससे सरसों और सरसों तेल के भावों में आगे भी मजबूती बनी रह सकती है। निकट अवधि में आने वाली किसी भी सीमित गिरावट को खरीदारी का अवसर माना जा सकता है, जबकि सीजन के अंतिम महीनों में आपूर्ति संकट की आशंका बाजार को और मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35911</guid>				
                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 18:55:11 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[आई-ग्रेन इंडिया मार्किट आउटलुक: सरसों में तेजी के संकेत मजबूत]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><b>घटे उत्पादन अनुमान से सीजन के अंत तक बढ़ सकता है आपूर्ति संकट</b></p><p><br>1 अगस्त 2026 को गुरुग्राम में आयोजित COOIT-MOPA की क्रॉप कमेटी की बैठक में सरसों उत्पादन का अनुमान 117.50 लाख टन से घटाकर 110.25 लाख टन कर दिया गया। उत्पादन अनुमान में 7.25 लाख टन की यह कटौती बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण तेजी का संकेत मानी जा रही है।</p><p><br>संशोधित आंकड़ों के अनुसार देश में सरसों की कुल उपलब्धता लगभग 111.25 लाख टन रहने का अनुमान है। मार्च से जुलाई 2026 के दौरान लगभग 72 लाख टन सरसों की मंडियों में आवक हो चुकी है, जबकि इसी अवधि में लगभग 61 लाख टन की पेराई की जा चुकी है। 31 जुलाई तक किसानों, प्रोसेसरों और HAFED के पास केवल 50.25 लाख टन स्टॉक शेष बताया गया है।</p><p><br>अब अगस्त से फरवरी तक के सात महीनों में इसी स्टॉक से बाजार की मांग पूरी करनी होगी। इसका अर्थ है कि औसतन केवल 7.17 लाख टन प्रतिमाह की पेराई संभव होगी, जो सामान्य मासिक खपत और क्रशिंग आवश्यकता की तुलना में काफी कम है। यदि उद्योग की मांग सामान्य स्तर पर बनी रहती है, तो सीजन के अंतिम महीनों में कच्चे माल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।</p><p><br>बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उत्पादन अनुमान में कटौती ऐसे समय हुई है जब पहले ही बड़ी मात्रा में सरसों की पेराई हो चुकी है। यदि किसानों के पास उपलब्ध स्टॉक अनुमान से कम निकलता है या वे ऊंचे भाव की उम्मीद में बिक्री धीमी रखते हैं, तो मिलों के बीच खरीद प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।</p><p><br>वर्तमान आंकड़े सरसों बाजार के लिए स्पष्ट रूप से सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। सीमित उपलब्धता, उत्पादन अनुमान में कटौती और सीजन के उत्तरार्ध में संभावित आपूर्ति संकट को देखते हुए सरसों तथा सरसों तेल की कीमतों में आगे और मजबूती की संभावना बनी हुई है। निकट अवधि में बाजार में होने वाले किसी भी सीमित सुधार को खरीदारी का अवसर माना जा सकता है, जबकि अंतिम तिमाही में आपूर्ति संबंधी चिंताएं भावों को और समर्थन दे सकती हैं।<br><br>नोट: यह विश्लेषण मारुधर ट्रेडिंग कंपनी द्वारा साझा किए गए क्रॉप कमेटी के आंकड़ों पर आधारित है। वास्तविक बाजार की दिशा मांग, आयात नीति, तेल बाजार और किसानों की बिक्री गति जैसे कारकों से भी प्रभावित होगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35909</guid>				
                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 18:47:18 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[जुलाई के अंत तक 72 लाख टन सरसों की आवक होने का अनुमान]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-72-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">जयपुर। प्रमुख उत्पादक राज्यों की थोक मंडियों में सरसों की आवक की गति अब धीमी पड़ने लगी है। जयपुर के चांदपोल की अनाज मंडी में स्थित एक मशहूर प्रतिष्ठान- मरुधर ट्रेडिंग एजेंसी के मैनेजिंग डायरेक्टर- अनिल चतर द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार चालू मार्केटिंग सीजन के शुरूआती 5 महीनों में यानी मार्च-जुलाई - 2026 के दौरान देश में सरसों की कुल आवक 72 लाख टन पर पहुंची। इसमें से महज 50 हजार टन सरसों सरकारी क्रय केन्द्रों में पहुंची जबकि शेष मात्रा की आवक खुली मंडियों में हुई। केवल मई में सरकारी क्रय केन्द्रों पर सरसों की आवक हुई। जुलाई में खुली मंडियों में 7 लाख टन सरसों आई।&nbsp;</span></p><p>मरुधर ट्रेडिंग एजेंसी के अनुसार 2 लाख टन के आरंभिक स्टॉक तथा 107.25 लाख टन के अनुमानित उत्पादन के साथ सरसों की कुल उपलधता 109.25 लाख टन पहुंची जिसमें से 72 लाख टन की आवक हो गई और 31 जुलाई 2026 को किसानों के पास 37.25 लाख टन का स्टॉक बच गया। जहां तक सरकारी एजेंसियों की बात है तो उसके पास 1.00 लाख टन सरसों का पुराना स्टॉक था जिसकी बिक्री हो गई है लेकिन चालू सीजन के दौरान खरीदे गए 50 हजार टन का स्टॉक अभी बाकी है। </p><p>उल्लेखनीय है कि भरतपुर में आयोजित रबी तिलहन-तेल सेमिनार के दौरान 117.25 लाख टन सरसों के घरेलू उत्पादन का अनुमान लगाया गया था मगर 1 अगस्त 2026 को गुरुग्राम में आयोजित एक बैठक में इसे 7 लाख टन घटाकर 110.25 लाख टन नियत किया गया। मार्च-जुलाई के दौरान 61 लाख टन सरसों की क्रशिंग हुई। 1 अगस्त 2026&nbsp; को देश में कुल 50.25 लाख टन सरसों का स्टॉक बचा हुआ था।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35905</guid>				
                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:25:12 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[स्वतंत्रता दिवस पर किसानों के बीच होगा जैव उर्वरक का वितरण]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">पुणे। निरंतर गतिशील कृषि जगत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली संस्था- भारत सबकान्टीनेंट एग्री फाउंडेशन (बीएसएएफ) के तत्वावधान में शेतकारी मित्र द्वारा कृषक समुदाय के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए इस वर्ष स्वतन्त्रता दिवस के उपलक्ष्य में किसानों के बीच जैव उर्वरकों का वितरण किया जाएगा। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इस संस्था के विवेक अग्रवाल का कहना है कि किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए और भारत का 80 वां स्वाधीनता दिवस समारोह मनाते हुए इनके लिए 'जैव उर्वरक वितरण कार्यक्रम' का आयोजन किया जा रहा है।</span></p><p>विवेक अग्रवाल के अनुसार जैविक खाद वितरण कार्यक्रम 15 अगस्त 2026 को कुरुंजी गांव, तालुका भोर, जिला पुणे (महाराष्ट्र) में आयोजित किया जाएगा। इससे किसानों के खेतों की मिटटी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में सहायता मिलेगी। </p><p>जैविक खाद को कृषि फसलों को पोषण प्रदान करने का उत्तम स्रोत माना जाता है। जैविक खाद के उपयोग से उत्पादित कृषि उत्पाद मानवीय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35899</guid>				
                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 12:57:04 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[त्यौहारी सीजन की मांग से चीनी का भाव मजबूत रहने की संभावना]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय एवं उद्योग- व्यापार संगठनों के तमाम प्रयासों के बावजूद घरेलू बाजार में चीनी का भाव ऊंचे स्तर पर मजबूत बना हुआ है और निकट भविष्य में इसमें ज्यादा नरमी आने की संभावना नहीं है। चीनी में त्यौहारी सीजन की अच्छी मांग निकल रही है। उद्योग के पास स्टॉक सीमित है जबकि अगले सीजन में उत्पादन बेहतर होने में संदेह है। बाजार पर मनोवैज्ञानिक असर कायम रह सकता है।&nbsp;</span></p><p>चालू मार्केटिंग सीजन के अंत में यानी 30 सितम्बर 2026 को स्वदेशी उद्योग के पास चीनी का कुल बकाया स्टॉक घटकर 41 लाख टन के करीब रह जाने का अनुमान है जो सितम्बर 2017 के बाद का न्यूनतम स्तर होगा। आमतौर पर उद्योग के पास प्रत्येक सीजन के अंत में 60 लाख टन या इससे अधिक चीनी का अधिशेष स्टॉक मौजूद रहता है जो अगले मार्केटिंग सीजन के शुरुआती ढाई-तीन महीनों की घरेलू मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लायक माना जाता है। यदि 30 सितम्बर 2026 को 40-41 लाख टन चीनी का स्टॉक बचता है और अक्टूबर में गन्ना की क्रशिंग जल्दी शुरू नहीं होती है तो चीनी का स्टॉक घटकर पिछले अनेक वर्षों के सबसे निचले स्तर पर अटक सकता है।</p><p>चीनी के निर्यात पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है और 2026-27 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में भी निर्यात की अनुमति दिए जाने की संभावना बहुत कम है। सरकार एथनॉल निर्माण में भी गन्ना अवयवों की मात्रा सीमित रखने का निर्णय ले सकती है ताकि चीनी उत्पादन के लिए गन्ना का अधिक से अधिक स्टॉक उपलब्ध हो सके। अल नीनो एवं कमजोर मानसून के प्रभाव से 2026-27 सीजन के दौरान गन्ना एवं चीनी के घरेलू उत्पादन में गिरावट आने की आशंका व्यक्त की जा रही है।&nbsp;</p><p>चीनी का एक्स फैक्टरी न्यूनतम बिक्री मूल्य पिछले छह वर्षों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल पर स्थिर है जबकि हाल के महीनों में चीनी का दाम बढ़कर 4000 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच गया। इससे मिलों को अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है। मक्का का भाव नीचे होने से एथनॉल का उत्पादन एवं कारोबार भी आर्थिक दृष्टि से लाभदायक साबित हो रहा है जबकि डीडीजीएस की बिक्री से डिटीलरीज को अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो रही है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35894</guid>				
                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 12:09:52 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[कम बारिश के बावजूद आंध्र प्रदेश में खरीफ फसलों का रकबा कुछ आगे]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">विजयवाड़ा। दक्षिण भारतीय राज्य- आंध्र प्रदेश में मानसूनी बारिश का कुछ अभाव होने से धान, मक्का एवं मूंगफली जैसी फसलों की खेती कम क्षेत्रफल में हुई मगर तुवर एवं कपास का रकबा बढ़ने से खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 29 जुलाई 2026 तक सुधरकर 13.31 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो गत वर्ष की इसी अवधि के बिजाई क्षेत्र 13.16 लाख हेक्टेयर से 15 हजार हेक्टेयर अधिक है।&nbsp;</span></p><p>राज्य कृषि विभाग के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान आंध्र प्रदेश में धान का उत्पादन क्षेत्र 6.36 लाख हेक्टेयर से घटकर 5.93 लाख हेक्टेयर तथा मोटे अनाजों का रकबा 1.25 लाख हेक्टेयर से गिरकर 1.01 लाख हेक्टेयर रह गया। मोटे अनाजों में खासकर मक्का का बिजाई क्षेत्र 98 हजार हेक्टेयर से घटकर 72 हजार हेक्टेयर रह गया। बाजरा का रकबा 14 हजार हेक्टयर पर सिमट गया।&nbsp;</p><p>दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र 1.24 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1.66 लाख हेक्टेयर हो गया जिसके तहत खासकर तुवर का बिजाई क्षेत्र 1.09 लाख हेक्टेयर से उछलकर 1.45 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा। लेकिन तिलहन फसलों में मूंगफली&nbsp; का रकबा 95 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 90 हजार हेक्टेयर रह गया। कपास का रकबा 2.98 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.36 लाख हेक्टेयर हो गया। खरीफ फसलों की बिजाई अभी चल रही है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35892</guid>				
                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 11:42:50 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मानसून की असामान्य चाल]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">चार माह की अवधि वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन का आधा समय बीत चुका है लेकिन इसकी चाल अभी तक असमान एवं असामान्य बनी हुई है। दीर्घकालीन औसत के सापेक्ष जून में 37 प्रतिशत कम वर्षा हुई जबकि जुलाई में 1 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">मौसम विभाग ने अगस्त में 7 प्रतिशत कम बरसात होने की संभावना व्यक्त की है जबकि अगस्त का मौसम एवं मानसून खरीफ फसलों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। जुलाई में बेशक राष्ट्रीय स्तर पर अच्छी बारिश हुई लेकिन इसका वितरण संतुलित नहीं रहा। कुछ राज्यों में कम तथा कुछ अन्य राज्यों में ज्यादा वर्षा हुई। इतना ही नहीं बल्कि जिन प्रांतों में कुल संचयी वर्षा सामान्य औसत से ज्यादा हुई वहां भी कुछ भाग सूखे की चपेट में देखा जा रहा है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इसका मतलब यह हुआ कि अधिशेष बारिश वाले राज्यों में भी वर्षा का वितरण असमान देखा जा रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं की जुलाई की अच्छी बारिश से खरीफ फसलों के उत्पादन क्षेत्र में काफी सुधार आया और पिछले साल की तुलना में इसकी कमी का अंतर बहुत घट गया है लेकिन इन फसलों की प्रगति के लिए आगे का मौसम अनुकूल होना आवश्यक है। 1 जून से 31 जुलाई 2026 तक देश में सामान्य औसत से 13 प्रतिशत कम बारिश हुई।&nbsp;</span></p><p>देश के ऐसे 16 राज्यों में अभी तक सामान्य औसत से कम वर्षा हुई है वहां कुल राष्ट्रीय भौगोलिक क्षेत्र का 36 प्रतिशत भाग स्थित है। इसमें उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, झारखंड और बिहार भी शामिल है। पंजाब और हरियाणा में भी करीब 25 प्रतिशत कम बारिश हुई है मगर सिंचाई की अच्छी सुविधा मौजूद है। </p><p>राज्यों के अंदर बारिश की असमानता महाराष्ट्र एवं गुजरात जैसे प्रांतों में भी देखी जा रही है। महाराष्ट्र में एक तरफ नागपुर, सहारा, रायगढ़, रत्नागिरी एवं सांगली जैसे जिलों में सामान्य या अधिशेष बारिश हुई है जबकि दूसरी ओर सोलापुर, लातूर, नान्देड, अमरावती, गढ़ चिरौली तथा चन्द्रपुर जैसे जिलों में वर्षा का अभाव बना हुआ है। लातूर और सोलापुर में अरहर की खेती बड़े पैमाने पर होती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35890</guid>				
                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 10:51:14 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[IMD का अनुमान: अगस्त–सितंबर में सामान्य से कम बारिश, एल नीनो होगा और मजबूत]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/imd-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p style="margin: 0px;"><span style="font-weight: bolder;">IMD का अनुमान: अगस्त–सितंबर में सामान्य से कम बारिश, एल नीनो होगा और मजबूत</span></p><p style="margin: 0px;">भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 के दूसरे चरण (अगस्त–सितंबर) के लिए सामान्य से कम वर्षा का अनुमान जताया है। विभाग के अनुसार इस अवधि में देशभर में वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) के 94% से कम रहने की संभावना है। हालांकि प्रायद्वीपीय भारत, मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों तथा पूर्व एवं पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है।</p><p style="margin: 0px;">अगस्त 2026 में भी देश में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। साथ ही अधिकांश क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से सामान्य से अधिक रह सकता है।</p><p style="margin: 0px;">IMD ने बताया कि वर्तमान में मध्यम एल नीनो की स्थिति बनी हुई है और मानसून के शेष मौसम में इसके और मजबूत होने की संभावना है। वहीं हिंद महासागर में न्यूट्रल IOD बना हुआ है, हालांकि सितंबर के दौरान पॉजिटिव IOD विकसित होने की संभावना कुछ अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने जताई है।</p><p style="margin: 0px;">IMD सितंबर के लिए अगला वर्षा पूर्वानुमान अगस्त के अंत में जारी करेगा।</p><p style="margin: 0px;">~~~~~~~~~~~~~</p><p style="margin: 0px;"><span style="font-weight: bolder;">IMD Forecasts Below-Normal Rainfall for August–September; El Niño Expected to Strengthen</span></p><p style="margin: 0px;">The India Meteorological Department (IMD) has forecast below-normal rainfall during the second half of the Southwest Monsoon season (August–September 2026), with rainfall likely to remain below 94% of the Long Period Average (LPA). However, some parts of Peninsular India, Central India, Northwest India, and East &amp; Northeast India are expected to receive normal to above-normal rainfall.</p><p style="margin: 0px;">For August 2026, IMD has also predicted below-normal rainfall across most parts of the country.</p><p style="margin: 0px;">Maximum temperatures are likely to remain above normal over most regions, while minimum temperatures are expected to be normal to above normal.</p><p style="margin: 0px;">IMD said moderate El Niño conditions are currently prevailing over the equatorial Pacific and are likely to strengthen further during the remaining monsoon season. Meanwhile, neutral Indian Ocean Dipole (IOD) conditions are expected to persist, although some international forecasting agencies indicate that a positive IOD may develop during September.</p><p style="margin: 0px;">The next IMD forecast for September rainfall will be issued at the end of August 2026.</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35881</guid>				
                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 19:50:43 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[तेलंगाना में खरीफ फसलों का रकबा गत वर्ष से कुछ आगे]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">हैदराबाद। दक्षिण भारत में धान तथा कपास के सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य- तेलंगाना में खरीफ फसलों की बिजाई में अच्छी प्रगति देखी जा रही है। वहां इस वर्ष 29 जुलाई तक खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 82.66 लाख एकड़ पर पहुंच गया जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 82.16 लाख एकड़ से 50 हजार एकड़ ज्यादा है।&nbsp;</span></p><p>राज्य कृषि विभाग की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान तेलंगाना में धान एवं मोटे अनाजों का कुल उत्पादन क्षेत्र 27.54 लाख एकड़ से घटकर 25.35 लाख एकड़ रह गया। वर्षा की कमी के कारण धान का क्षेत्रफल 21.82 लाख एकड़ से गिरकर 20.46 लाख एकड़ तथा मक्का का बिजाई क्षेत्र 5.40 लाख एकड़ से घटकर 4.70 लाख एकड़ पर अटक गया। ज्वार और रागी की बिजाई भी कम क्षेत्रफल में हुई है।&nbsp;</p><p>दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 5.01 लाख एकड़ से सुधरकर इस बार 5.25 लाख एकड़ पर पहुंचा है। इसके तहत अरहर (तुवर) का बिजाई क्षेत्र 4.33 लाख एकड़ से सुधरकर 4.43 लाख एकड़ तथा मूंग का रकबा 51 हजार एकड़ से बढ़कर 63 हजार एकड़ पर पहुंचा। उड़द का क्षेत्रफल 17 हजार एकड़ रहा जो गत वर्ष 16 हजार एकड़&nbsp; दर्ज किया गया था।&nbsp;</p><p>इसी तरह तिलहन फसलों का रकबा भी पिछले साल के 3.56 लाख एकड़ से बढ़कर इस बार 3.72 लाख एकड़ हो गया। इसके तहत खासकर सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र 3.53 लाख एकड़ से बढ़कर 3.67 लाख एकड़ पर पहुंचा जबकि मूंगफली एवं अरंडी की खेती सीमित क्षेत्रफल में हुई।&nbsp;</p><p>तेलंगाना में कपास का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 43.03 लाख एकड़ से उछलकर इस बार 46.34 लाख एकड़ पर पहुंच गया। इसी तरह वहां गन्ना का रकबा भी 22 हजार एकड़ से बढ़कर 38 हजार एकड़ पर पहुंच गया। राज्य के विभिन्न भागों में अब अच्छी बारिश होने लगी है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35830</guid>				
                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 10:49:21 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[सस्कैचवान में दलहन फसलों पर कीड़ों-रोगों का भयंकर प्रकोप]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">सस्काटून। कनाडा के सबसे प्रमुख कृषि उत्पादक राज्य- सस्कैचवान में इस वर्ष न केवल दलहनों के बिजाई क्षेत्र में कमी आई है बल्कि फसल पर कीड़ों-रोगों का भयंकर प्रकोप / आघात भी देखा जा रहा है। इसके फलस्वरूप वहां दलहनों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। सस्कैचवान के लैंघम तथा रिवार्ड क्षेत्र में रोगों का आघात ज्यादा देखा जा रहा है जहां मटर एवं मसूर की खेती बड़े पैमाने पर होती है।&nbsp;</span></p><p>समीक्षकों के मुताबिक उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका को देखते हुए अब तक मसूर एवं मटर की कीमतों में अच्छी तेजी आ जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा प्रतित होता है कि विशाल बकाया स्टॉक एवं आयातक देशों की कमजोर मांग का दलहन बाजार पर दबाव पड़ रहा है। दिलचस्प तथ्य यह है कि कनाडा में अधिकांश अनाजी फसलों एवं कैनोला की कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल बनने लगा है मगर दलहन बाजार फिलहाल शांत या स्थिर बना हुआ है।&nbsp;</p><p>कनाडा में इस वर्ष भारी वर्षा एवं भयंकर बाढ़ से भी दलहन फसलों को क्षति होने की खबर है। विश्लेषकों का मानना है कि आगामी महीनों में बाजार कुछ ऊंचा एवं तेज हो सकता है इसलिए उत्पादक जल्दबाजी में अपना दलहन बेचने के बजाए इसका स्टॉक बचाए रखने का प्रयास कर सकते हैं। कनाडा के उत्पादकों की नजर ऑस्ट्रेलिया पर भी है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35804</guid>				
                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 21:26:36 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[रूई के उत्पादन अनुमान में 3 लाख गांठ की बढ़ोत्तरी]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-3-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। एक अग्रणी व्यापारिक संगठन- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने 2025-26 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के लिए पहले 334 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) कपास के उत्पादन का अनुमान लगाया था जिसे अब 3 लाख गांठ बढ़ाकर 337 लाख गांठ निर्धारित कर दिया है। उल्लेखनीय है कि सीएआई द्वारा प्रत्येक माह कपास के उत्पादन अनुमान की समीक्षा की जाती है जो देश के 11 प्रमुख कपास उत्पादक प्रांतों में क्रियाशील एसोसिएशन तथा अन्य व्यापारिक स्रोतों से प्राप्त सूचना, आंकड़ा एवं जानकारी पर आधारित होती है।</span></p><p>सीएआई ने 2025-26 के मार्केटिंग सीजन के दौरान उत्तरी क्षेत्र के राज्यों-पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में पहले 29 लाख गांठ कपास के उत्पादन का अनुमान व्यक्त किया था और अपनी नई मासिक रिपोर्ट में भी उसमें कोई बदलाव नहीं किया है। लेकिन मध्यवर्ती जोन के लिए उत्पादन के अनुमानित आंकड़े को 203 लाख गांठ से बढ़ाकर 206 लाख गांठ नियत किया है। इसके तहत खासकर महाराष्ट्र में उत्पादन अनुमान बढ़ाया गया है जबकि गुजरात और मध्य प्रदेश में उत्पादन के आंकड़े को पिछले स्तर पर ही स्थिर रखा गया है। महाराष्ट्र में कपास का उत्पादन अनुमान 115 लाख गांठ से बढ़ाकर अब 118 लाख गांठ निर्धारित किया गया है। गुजरात में 70 लाख गांठ तथा मध्य प्रदेश में 17.50 लाख गांठ उत्पादन आंका गया है।&nbsp;</p><p>दक्षिणी जोन के उत्पादन अनुमान में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस संभाग के तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में संयुक्त रूप से 97 लाख गांठ कपास के उत्पादन की संभावना व्यक्त की गई है। इसके अलावा उड़ीसा में 3.50 लाख गांठ तथा देश के अन्य प्रांतों में 2 लाख गांठ कपास के उत्पादन का अनुमान लगाया गया है जो पिछली रिपोर्ट के बराबर है। </p><p>इसे मिलाकर राष्ट्रीय स्तर पर कपास का कुल उत्पादन 337 लाख गांठ बैठ रहा है। इन आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हो गया कि 2025-26 के सीजन में गुजरात को बहुत बड़े अंतर से पीछे छोड़ते हुए महाराष्ट्र देश में कपास का सबसे अग्रणी उत्पादक राज्य बन गया। सितम्बर में 2025-26 का मौजूदा मार्केटिंग सीजन समाप्त होगा और अक्टूबर से 2026-27 का नया मार्केटिंग सीजन आरंभ हो जाएगा जिसके लिए कपास की बिजाई का अभियान अभी जारी है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35802</guid>				
                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 21:23:33 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अगले मार्केटिंग सीजन में हल्दी का बकाया स्टॉक सीमित रहने का अनुमान]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">निजामाबाद। हालांकि ऊंचे बाजार भाव के कारण चालू सीजन के दौरान हल्दी के बिजाई क्षेत्र में 10-15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होने के संकेत मिल रहे है लेकिन मौसम एवं वर्षा की स्थिति अनुकूल नहीं होने से उत्पादन बढ़ने में संदेह है। उद्योग व्यापार क्षेत्र के अनुसार 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन के दौरान देश में करीब 95 लाख बोरी (50 किलो की प्रत्येक बोरी) हल्दी का उत्पादन हुआ जबकि 15-20 लाख बोरी का पिछला बकाया स्टॉक मौजूद था। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">घरेलू एवं निर्यात मांग को पूरा करने के लिए लगभग 110 लाख बोरी की आवश्यकता पड़ेगी। इसके फलस्वरूप 2026-27 के मार्केटिंग सीजन में हल्दी का बकाया अधिशेष स्टॉक काफी घट सकता और शुरूआती महीनों में इसकी आपूर्ति की स्थिति कुछ हद तक जटिल रह सकती है।&nbsp;</span></p><p>यदि अल नीनो के प्रभाव से मानसून की बारिश में बाधा पड़ी तो हल्दी का उत्पादन घटने की आशंका बढ़ जाएगी। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु एवं कर्नाटक जैसे अग्रणी उत्पादक राज्यों में मानसून की पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है और आगे भी बारिश की कमी बरकरार रहने की संभावना है। महाराष्ट्र में मानसून का प्रदर्शन बेहतर है मगर उड़ीसा में और बारिश की जरूरत है।&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</p><p>मई 2026 के दौरान देश से हल्दी के निर्यात में अप्रैल के मुकाबले 26 प्रतिशत तथा मई 2025 की तुलना में 0.4 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक बाजार में हल्दी की मांग अभी मजबूत बनी हुई है। वैसे वार्षिक आधार पर निर्यात प्रदर्शन में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं देखा जा रहा है। </p><p>कुल मिलाकर जनवरी-मई 2026 के दौरान भारत से हल्दी के निर्यात में जनवरी-मई 2025 के मुकाबले करीब 6.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई क्योंकि ईरान युद्ध के कारण इसके शिपमेंट में कुछ बाधा उत्पन्न हो गई। हल्दी की मांग फिलहाल कुछ कमजोर है लेकिन मध्य अगस्त के बाद तेज हो सकती है और तब कीमतों में भी अच्छी तेजी आने की गुंजाइश रहेगी। अगली नई फसल आने तक हल्दी का भाव 140-150 रुपए प्रति किलो से ऊपर ही रहने की उम्मीद है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35800</guid>				
                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 21:21:03 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[चीनी डीलर्स को 400 टन से ज्यादा स्टॉक नहीं रखने का निर्देश]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-400-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने समूचे देश के पंजीकृत डीलर्स को किसी एक समय में एवं एक स्थान पर 4000 क्विंटल (400 टन) से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रखने का निर्देश दिया है। यह आदेश 1 अगस्त से लागू होकर 30 नवम्बर 2026 तक प्रभावी रहेगा। यदि डीलर्स के पास इस स्वीकृत मात्रा से अधिक चीनी का भंडार मौजूद है तो उसे अतिरिक्त मात्रा की बिक्री जल्दी से जल्दी करनी पड़ेगी। प्रत्येक डीलर को अपनी चीनी के स्टॉक की घोषणा मंत्रालय के पोर्टल पर अनिवार्य रूप से करनी पड़ेगी।&nbsp;</span></p><p>चीनी का खुला बाजार भाव हाल के सप्ताहों में काफी तेज हुआ है जबकि सरकार को आशंका है कि मध्य अगस्त के बाद से शुरू होने वाले त्यौहारी सीजन के दौरान कीमतों में और भी बढ़ोत्तरी हो सकती है। उद्योग-व्यापार संगठनों का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और इसकी जोरदार घबराहटपूर्ण लिवाली करने की कोई जरूरत नहीं है। इसी लिवाली के कारण चीनी के दाम में भारी तेजी आई है।&nbsp;</p><p>सरकार ने 1 अगस्त से चीनी मिलों में हाजिर स्टॉक एवं बिक्री के आंकड़ों का भौतिक सत्यापन करने के लिए जांच पड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया है। यह अभियान 14 अगस्त तक जारी रहेगा। डीलर्स को स्टॉक प्राप्त होने के बाद 30 दिनों के अंदर अपनी चीनी को बाजार में बेचने की सख्त हिदायत भी दी गई है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35798</guid>				
                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 21:10:33 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[दाल-दलहनों की समुचित आपूर्ति की बढ़ सकती है चुनौती]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। खरीफ कालीन दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से काफी पीछे चल रहा है। इसके तहत खासकर अरहर (तुवर) मूंग एवं मोठ के रकबे में गिरावट आई है जबकि उड़द के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी हुई है। इस वर्ष 24&nbsp; जुलाई तक दलहनों का कुल उत्पादन क्षेत्र 84.57 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 91.46 लाख हेक्टेयर से 6.89 लाख हेक्टेयर कम रहा। इससे पूर्ववर्ती सप्ताह में दलहनों का क्षेत्रफल 69 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा था जो पिछले साल के रकबा 81 लाख हेक्टेयर से 12 लाख हेक्टेयर कम था। यद्यपि दलहन फसलों की बिजाई में कुछ प्रगति हुई है लेकिन इसका उत्पादन के प्रति चिंता अभी बरकरार है। उत्पादन घटने से आयात पर निर्भरता बढ़ेगी और तदनुरूप कीमतों में भी बढ़ोत्तरी हो सकती है।&nbsp;</span></p><p>उद्योग समीक्षकों एवं व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि बिजाई क्षेत्र में आने वाली गिरावट का दलहनों के उत्पादन पर कितना और कैसा असर पड़ेगा इसका अनुमान लगाना अभी जल्दबाजी होगी। दलहन फसलों की बिजाई का अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है और फिलहाल मौसम तथा मानसून की हालत भी अनुकूल बनी हुई है।</p><p> 24 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार अरहर का उत्पादन क्षेत्र 35.27 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 31.17 लाख हेक्टेयर, मोठ का बिजाई क्षेत्र 7.68 लाख हेक्टेयर 5.08 लाख हेक्टेयर और मूंग का क्षेत्रफल 28.39 लाख हेक्टेयर से गिरकर 26.89 लाख हेक्टेयर रह गया जबकि उड़द का रकबा 17.27 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 18.67 लाख हेक्टयर पर पहुंच गया। कुलथी का रकबा&nbsp; भी बढ़ा है जबकि अन्य दलहनों का बिजाई क्षेत्र कुछ घटा है।</p><p>मानसून की वर्षा अब भी दीर्घकालीन औसत से 16 प्रतिशत पीछे है जबकि मौसम विभाग ने अगस्त-सितम्बर में भी सामान्य औसत से कम वर्षा होने की संभावना व्यक्त की है। इससे दलहन फसलों की प्रगति उपज दर एवं पैदावार प्रभावित हो सकती है। </p><p>भारत दुनिया में दलहनों का सबसे प्रमुख उत्पादक देश है लेकिन फिर भी वहां विशाल मात्रा में विदेशों से इसके आयात की आवश्यकता बनी रहती है क्योंकि कुल उत्पादन घरेलू मांग एवं जरूरत से कम होती है। भारत में सिर्फ मूंग को छोड़कर अन्य लगभग अधिकांश प्रमुख दलहनों का विशाल आयात किया जाता है जिसमें अरहर, उड़द, चना, मसूर, राजमा एवं लोबिया आदि शामिल है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35796</guid>				
                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 19:35:10 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[सौंफ की कीमतों में तेजी : मंदे की संभावना नहीं]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p style="text-align: justify; "><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। वर्तमान में सौंफ में निर्यात व्यापार कम होने के कारण भाव स्थिर बने हुए है लेकिन सूत्रों का कहना है कि स्टॉक की कमी के चलते आगामी दिनों में कीमतों में फिर तेजी आएगी। उल्लेखनीय है कि आई ग्रेन इंडिया ने अपने पाठकों को 30 जून के अंक में सुझाव भी दिया था कि सौंफ के दामों में मंदा नहीं है और उस समय सौंफ का निर्यात भाव 99/100 रुपए चल रहा था जोकि वर्तमान में बढ़कर 109/110 रुपए हो गया है।&nbsp;</span></p><p style="text-align: justify; ">उल्लेखनीय है कि चालू सीजन के लिए प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात एवं राजस्थान के अलावा अन्य क्षेत्रों में सौंफ की बिजाई कम क्षेत्रफल पर की गई थी इसके अलावा बिजाई के पश्चात राजस्थान में हुई बेमौसमी बारिश से मार्च माह में फसल को नुकसान भी हुआ था। जिस कारण से चालू सीजन के दौरान देश में सौंफ का उत्पादन 16/17 लाख बोरी (प्रत्येक बोरी 55 किलो) के आसपास माना गया है। जबकि गत वर्ष उत्पादन अनुमान 18/19 लाख बोरी के लगाए गए थे।</p><p style="text-align: justify; "><b>आवक&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">कुल उत्पादन का अधिकांश माल मंडियों में आ जाने के कारण वर्तमान में मंडियों में आवक काफी कम रह गई है। प्रमुख मंडी ऊंझा में आवक केवल 2000 बोरी की रह गई है जबकि राजस्थान की मेडता एवं नागौर मंडी में आवक 1000/1500 बोरी की हो रही है। मंडियों में एवरेज क्वालिटी का भाव 8500/9500 रुपए प्रति क्विंटल बोला जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि गुजरात की मंडियों में कुल उत्पादन का लगभग 75/80 प्रतिशत माल मंडियों में आ चुका है जबकि राजस्थान का 60/70 प्रतिशत माल आने के अनुमान लगाए जा रहे है। उल्लेखनीय है कि चालू सीजन के दौरान गुजरात में सौंफ का उत्पादन 7/7.50 लाख बोरी एवं राजस्थान 7.50/8 लाख बोरी के अनुमान लगाए गए थे। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में उत्पादन अनुमान 1.5/2 लाख बोरी का लगाया गया था।&nbsp;</p><p style="text-align: justify; "><b>स्टॉक&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर सौंफ का स्टॉक 7/8 लाख बोरी का माना जा रहा है। गुजरात में 4/4.50 लाख बोरी एवं राजस्थान में 3/3.50 लाख बोरी होने की संभावना है। निर्यात का अधिकांश व्यापार गुजरात की मंडियों से होता है।</p><p style="text-align: justify; "><b>मंदा नहीं&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">वर्तमान में निर्यातक मांग कम होने के कारण सौंफ के बढ़ते भाव रुक गए हैं और विगत एक सप्ताह में भाव स्थिर बने हुए हैं। लेकिन आगामी दिनों में कीमतों में तेजी आने की संभावना है। क्योंकि एक ओर जहां मंडियों में आवक कम रह गई है वहीं दूसरी तरफ स्टॉक भी कम है। उल्लेखनीय है कि मई माह के दौरान सौंफ का निर्यात व्यापार 95/96 रुपए पर हो रहा था जोकि जून माह में बढ़कर 99/100 रुपए हो गया जबकि वर्तमान भाव 109/110 रुपए बोला जाने लगा है।&nbsp; &nbsp; &nbsp;</p><p style="text-align: justify; "><b>निर्यात&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान सौंफ निर्यात में भारी गिरावट आने के पश्चात चालू सीजन 2026-27 के प्रथम दो माह में सौंफ के निर्यात में सुधार दर्ज किया गया। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-मई- 2026 के दौरान सौंफ का निर्यात 5980 टन का किया और निर्यात से प्राप्त आय 88.28 करोड़ की रही। जबकि अप्रैल-मई-2025 में निर्यात 5885 टन का रहा तथा और निर्यात से प्राप्त आय 78.66 करोड़ की रही। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025-26 के दौरान सौंफ का कुल निर्यात 33038 टन का रहा था और निर्यात से प्राप्त आय 421.22 करोड़ की रही थी। जबकि वर्ष 2024-25 के दौरान सौंफ का कुल निर्यात 76586 टन का रहा था और निर्यात से प्राप्त आय 765.44 करोड़ की रही थी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35794</guid>				
                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 19:14:16 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[सरकार ने OMSS 2026-27 के तहत भारत आटा और भारत चावल की बिक्री को मंजूरी दी]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-omss-2026-27-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">केंद्र सरकार ने ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS-D) 2026-27 के तहत भारतीय खाद्य निगम (FCI) को केंद्रीय सहकारी संस्थाओं के माध्यम से भारत आटा और भारत चावल की खुदरा बिक्री की मंजूरी दे दी है।</span></p><p>सरकारी आदेश के अनुसार, OMSS 2026-27 के तहत 0.5 लाख मीट्रिक टन (50,000 टन) गेहूं तथा 3 लाख मीट्रिक टन चावल भारत आटा और भारत चावल की खुदरा बिक्री के लिए आवंटित किए गए हैं।</p><p>सरकार ने भारत चावल का अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 31 अक्टूबर 2026 तक 5 और 10 किलोग्राम पैक के लिए 35 रुपये प्रति किलोग्राम तथा 30 किलोग्राम पैक के लिए 33 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया है। वहीं 1 नवंबर 2026 से 5 और 10 किलोग्राम पैक का एमआरपी 36 रुपये प्रति किलोग्राम तथा 30 किलोग्राम पैक का 34 रुपये प्रति किलोग्राम होगा।</p><p>भारत आटा का अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) OMSS 2026-27 के लिए 32 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है।</p><p>आदेश के अनुसार, भारत आटा के लिए गेहूं की बिक्री पर 2.35 रुपये प्रति किलोग्राम की मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) सहायता जारी रहेगी। इसके अलावा, भारत ब्रांड के तहत केंद्रीय सहकारी संस्थाओं को गेहूं की आपूर्ति पर आने वाले परिवहन खर्च की प्रतिपूर्ति भी वास्तविक व्यय के आधार पर PSF से भारतीय खाद्य निगम (FCI) को की जाएगी।</p><p>सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई दरें केवल नए रिलीज ऑर्डर पर लागू होंगी। इसके लिए संबंधित एजेंसियों को यह प्रमाणित करना होगा कि OMSS 2025-26 के तहत पुरानी दरों पर उठाया गया पूरा स्टॉक समाप्त हो चुका है।</p><div><br></div>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35792</guid>				
                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 18:24:54 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अल नीनो की शक्ति एवं मजबूती में हो रही है बढ़ोत्तरी]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मेलबोर्न। ऑस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो का कहना है कि अल नीनो मौसम चक्र की शक्ति एवं गति लगातार बढ़ती जा रही है क्योंकि विषुवतीय प्रशांत महासागर में समुद्र तक का तापमान बढ़ रहा है। यह तापमान जितना ज्यादा बढ़ेगा, अल नीनो उतना ही अधिक शक्तिशाली होता जाएगा।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"> हालांकि हिन्द महासागर में घटनात्मक डायपोल का निर्माण होने की संभावना है जो भारत पर अल नीनो के प्रभाव को कुछ घटा सकता है लेकिन फिलहाल यह उदासीन या न्यूट्रल बना हुआ है। 26 जुलाई को इस डायपोल का सूचकांक 0.44 डिग्री सेल्सियस आंका गया। पिछले एक पखवाड़े के दौरान इसमें 0.5 डिग्री सेल्सियस की गर्माहट बढ़ गई।&nbsp; &nbsp;</span></p><p>मध्य जून से ही अल नीनो सक्रिय हो चुका है और अब निरन्तर ताकतवर होता जा रहा है। आगामी महीनों के दौरान इसके और भी सघन, मजबूत तथा गतिशील होने की संभावना है।</p><p> इसके फलस्वरूप यह 'सुपर' अल नीनो के रूप में सामने आ सकता है। मौसम ब्यूरो के अनुसार मध्यवर्ती ट्रॉपिकल प्रशांत क्षेत्र में जिस तरह की परिस्थितियां बन रही हैं वह अल नीनो को इतना ज्यादा शक्तिशाली बना सकती हैं। जितना 1950 से अभी तक कभी नहीं बना। हिन्द महासागर का डायपोल इसके सुपर प्रभाव को आंशिक रूप से ही रोक पाएगा। भारत में जुलाई के दौरान मानसून का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा। अब अगस्त-सितम्बर के प्रदर्शन पर सबका ध्यान केन्द्रित हैं।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35788</guid>				
                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 17:58:53 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[नैफेड द्वारा मसूर दाल एवं चीनी की खरीद का टेंडर जारी]]></title>
                <link><![CDATA[https://www.igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्रालय की अधीनस्थ एजेंसी - भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नैफेड) द्वारा असम को आपूर्ति के लिए मसूर दाल एवं एम-30 ग्रेड की चीनी की खरीद हेतु टेंडर जारी किया गया है। 28 जुलाई को इस सम्बन्ध में एक अधिसूचना जारी की गयी थी जिसमें कहा गया था कि 29 जुलाई को टेंडर जारी किया जाएगा। सफल निविदाकार (बिडर्स) को इन दोनों उत्पादों की आपूर्ति असम राज्य भंडारण निगम के विभिन्न गोदामों/वेयरहोउसों में करनी होगी। अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 तक की अवधि के दौरान इन दोनों खाद्य उत्पादों की आपूर्ति की जानी है।</span><br></p><p>अधिसूचना के अनुसार इस निविदा के अंतर्गत टेक्नीकल बिड जमा करने का समय 29 जुलाई से आरम्भ होकर 10 अगस्त तक रहेगा और प्राप्त बिड्स को 11 अगस्त को खोला जाएगा। अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि बिडर्स को दोनों वस्तुओं की आपूर्ति का ऑफर जमा करना होगा और सिर्फ एक अस्तु की आपूर्ति का ऑफर स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसका मतलब यह है की निविदाकारों को दोनों वस्तुओं की आपूर्ति साथ-साथ करनी होगी। असम पूर्वोत्तर क्षेत्र का सबसे प्रमुख राज्य है जो फ़िलहाल भीषण बाढ़ की चपेट में फंसा हुआ है। जोरदार बारिश एवं भयंकर बाढ़ के कारण राज्य में जान माल का भारी नुकसान हुआ है। अगस्त-सितम्बर तक वहां बारिश का दौर जारी रह सकता है जबकि अक्टूबर में मौसम साफ़ हो जाएगा। असम में गन्ना/चीनी का उत्पादन नहीं होता है और मसूर की पैदावार भी बहुत कम होती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35781</guid>				
                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 17:40:14 +0530</pubDate>
            </item>
                
    </channel>

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