कमजोर मानसून से भारत में मसूर का आयात बढ़ने का अनुमान

09-Jun-2026 12:40 PM

मुम्बई। देसी-विदेशी उद्योग- व्यापार क्षेत्र के समीक्षकों का कहना है कि यदि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर रहने से खरीफ सीजन में दलहनों और खासकर अरहर (तुवर) का उत्पादन प्रभावित होता है तो विदेशों से विभिन्न दलहनों और विशेषकर हरी मसूर के आयात को अच्छा समर्थन मिल सकता है। हरी मसूर को तुवर का एक बेहतर विकल्प माना जाता है। 

व्यापार विश्लेषकों के अनुसार इस वर्ष मानसून सीजन (जून-सितम्बर) के दौरान भारत में सामान्य औसत के सापेक्ष 90 प्रतिशत वर्षा होने तथा बारिश का वितरण भी असमान रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।

इससे खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख दलहन फसल-तुवर की खेती एवं पैदावार के प्रति काफी चिंता उत्पन्न हो गई है। कनाडा की हरी मसूर अक्सर भारतीय तुवर के विकल्प का स्थान लेती रही है। वैसे भारतीय खरीदार म्यांमार एवं अफ्रीकी देशों से तुवर का आयात बढ़ाने का भी प्रयास करेंगे। 

भारत में लगभग दो-तिहाई तुवर का उत्पादन महाराष्ट्र और कर्नाटक में होता है। अभी तक देश में खरीफ कालीन दलहन फसलों और खासकर तुवर की बिजाई आरंभ नहीं हुई है इसलिए इसके क्षेत्रफल के बारे में निश्चित रूप से कोई अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। मानसून अब कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में पहुंच रहा है जबकि आगामी समय में यह गुजरात एवं मध्य प्रदेश में पहुंच सकता है। 

वैसे इस वर्ष बिजाई क्षेत्र के साथ-साथ औसत उपज दर में भी कमी आने की आशंका को देखते हुए तुवर का घरेलू उत्पादन औसत स्तर से कुछ कम होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। केन्द्र सरकार ने तुवर का उत्पादन लक्ष्य गत वर्ष के 36 लाख टन से बढ़ाकर इस बार 40 लाख टन निर्धारित किया है जो पंचवर्षीय औसत उत्पादन 37 लाख टन से भी ज्यादा है।

तुवर के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में तो अच्छी बढ़ोत्तरी की गई है लेकिन इसका थोक मंडी भाव किसानों के लिए आकर्षक नहीं रहा। इससे रकबा एवं उत्पादन घट सकता है। तुवर का उत्पादन 30 लाख टन से नीचे  रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है।