खरीफ कालीन दलहन फसलों की बिजाई पर सबका ध्यान केन्द्रित

09-Jun-2026 05:20 PM

नई दिल्ली। भारत में आधिकारिक एवं औपचारिक तौर पर खरीफ फसलों की बिजाई का अभियान आरंभ हो चुका और बिजाई क्षेत्र का पहला सरकारी आंकड़ा भी सामने आ गया है। अल नीनो के प्रभाव एवं कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों का ध्यान भारत में खरीफ कालीन दलहन फसलों की बिजाई पर केन्द्रित हो गया है जिसमें म्यांमार एवं अफ्रीकी देशों के साथ-साथ कनाडा तथा ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं। 

दिलचस्प तथ्य यह है कि भारत में खरीफ सीजन के दौरान जिन दलहनों का उत्पादन होता है उसकी पैदावार कनाडा-ऑस्ट्रेलिया में नहीं या नगण्य होती है लेकिन फिर भी ये दोनों देश भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रहे हैं। भारत में खरीफ सीजन के दौरान अरहर (तुवर), उड़द, मूंग, मोठ, कुलथी एवं खेसारी जैसे दलहनों की खेती होती है। ऑस्ट्रेलिया में मूंग का थोड़ा-बहुत उत्पादन होता है जबकि भारत में इसके आयात पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

आधिकरिक आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 5 जून तक खरीफ कालीन दलहनों का कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 52 हजार हेक्टेयर पर पहुंचा जो गत वर्ष की इसी अवधि के बिजाई क्षेत्र 35 हजार हेक्टेयर से 17 हजार हेक्टेयर ज्यादा लेकिन इस तिथि के लिए पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 1.04 लाख हेक्टेयर से 50 प्रतिशत कम है। वर्ष 2025 के सम्पूर्ण खरीफ सीजन में दलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 118.97 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा था। चालू खरीफ सीजन के दलहनों का सकल पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 123.64 लाख हेक्टेयर आंका गया है जबकि वास्तविक रकबा इससे कम रहेगा। 

पिछले साल के मुकाबले इस बार तुवर का उत्पादन क्षेत्र 3 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 5 हजार हेक्टेयर तथा उड़द का बिजाई क्षेत्र 6 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 10 हजार हेक्टेयर पर पहुंचा है जबकि मूंग का क्षेत्रफल 17 हजार हेक्टेयर से गिरकर 15 हजार हेक्टेयर और कुलथी का रकबा 6 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 4 हजार हेक्टेयर रह गया। अन्य दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र 4 हजार हेक्टेयर से उछलकर 18 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया है।