मक्का के बजाए अन्य फसलों की तरफ बढ़ सकता है किसानों का रुझान

09-Jun-2026 07:43 PM

नई दिल्ली। मोटे अनाजों के संवर्ग के सबसे प्रमुख सदस्य- मक्का की खेती में इस बार किसानों का उत्साह एवं आकर्षण घटने की संभावना है। क्योंकि इसका थोक मंडी भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे रहने के कारण किसानों को लाभप्रद वापसी हासिल नहीं हुई और चालू खरीफ सीजन की फसलों में एमएसपी में सबसे कम वृद्धि मक्का में ही हुई है। 

वर्ष 2025 के खरीफ सीजन में किसानों ने मक्का की बिजाई में जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई थी जिससे इसका क्षेत्र तेजी से उछलकर 98.61 लाख हेक्टेयर के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया था जो वर्ष 2024 के रकबा तथा 2025 के लिए आंकलित पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल से काफी अधिक रहा।

मौसम की हालत काफी हद तक अनुकूल होने से 2025-26 के सीजन में इस महत्वपूर्ण मोटे अनाज का घरेलू उत्पादन भी उछलकर 550 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। यह सरकारी अनुमान है। विशाल उत्पादन एवं एथनॉल उद्योग की सीमित मांग के कारण मक्का का थोक मंडी भाव घटकर एमएसपी (2400 रुपए प्रति क्विंटल) से काफी नीचे आ गया लेकिन केन्द्र सरकार ने किसानों को एमएसपी की वापसी सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

इससे किसान काफी हतोत्साहित हैं। इतना ही नहीं बल्कि सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए मक्का के न्यूनतम समर्थन मूल्य में मात्र 10 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा किया है जिसे अत्यन्त निराशाजनक एवं हैरत अंगेज माना जा रहा है। 

इस वर्ष खरीफ कालीन मक्का का सामान्य औसत क्षेत्रफल 80.77 लाख हेक्टेयर आंका गया है जबकि उद्योग- व्यापार क्षेत्र के वास्तविक रकबा इस स्तर तक पहुंचने में भी संदेह है। वैसे बिजाई की शुरुआत सकारात्मक ढंग से हुई है और 5 जून 2026 तक इसका रकबा 38 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया

जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 27 हजार हेक्टेयर से 11 हजार हेक्टेयर अधिक है। बिहार में रबी कालीन फसल के कटाई में बाधा पड़ने एवं विभिन्न राज्यों में अच्छी  मांग निकलने से पिछले दिनों मक्का के मूल्य में कुछ तेजी आई थी।