आगामी वर्षों के दौरान वैश्विक अनाज बाजार में भारत की होगी महत्वपूर्ण भूमिका

23-Jul-2025 03:47 PM

नई दिल्ली। भारत में खाद्यान्न और खासकर चावल तथा गेहूं का उत्पादन एवं उपयोग तेजी से बढ़ता जा रहा है जिससे अगले दशक के दौरान यह वैश्विक अनाज मार्केट में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

ओईपीडी- फाओ के वैश्विक कृषि परिदृश्य 2025-2034 की रिपोर्ट में कहा गया है कि यद्यपि भारत में इस अवधि के दौरान गेहूं के उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी लेकिन मांग एवं खपत उससे ज्यादा होने के कारण इसे विदेशों से इसका आयात करना पड़ सकता है। 

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2034 तक गेहूं के वैश्विक उत्पादन में होने वाली कुल बढ़ोत्तरी में भारत का योगदान करीब 30 प्रतिशत रहने की संभावना है क्योंकि यहां न केवल बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होगी बल्कि औसत उपज दर में भी सुधार आएगा। सरकार की ओर से आत्मनिर्भरता के उपायों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

इसके अलावा भारत चावल के उत्पादन में चीन को पीछे छोड़कर प्रथम स्थान पर पहुंच जाएगा। चावल के वैश्विक उत्पादन में होने वाली सकल वृद्धि में भारत का योगदान 41 प्रतिशत तक रहने की उम्मीद है।

लेकिन दूसरी ओर तेजी से बढ़ती आबादी के कारण भारत में उपयोग नियमित रूप से बढ़ता रहेगा और वर्ष 2033-34 तक यह इसका एक शुद्ध आयातक देश बन सकता है। 

रिपोर्ट के अनुसार समीक्षाधीन अवधि के दौरान भारतीय मक्का के उत्पादन, घरेलू उपयोग एवं निर्यात में नियमित रूप से बढ़ोत्तरी का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है। एथनॉल निर्माण में इसकी खपत तेजी से बढ़ सकती है।

सरकार की नीति एवं वैश्विक बाजार की स्थिति इसके लिए अनुकूल बनी रहेगी। भारत सरकार ने चावल की सभी श्रेणियों एवं किस्मों के व्यापारिक निर्यात को सभी बंधनों से पूरी तरह मुक्त कर दिया है जिससे संसार के सबसे प्रमुख चावल निर्यातक देश के रूप में इसकी पोजीशन और भी मजबूत हो जाएगी।

भारत पिछले करीब 14-15 वर्षों से दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश बना हुआ है और आगामी वर्षों में भी अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाजार पर इसका वर्चस्व बरकरार रहेगा।