आंध्र प्रदेश में सूखे जैसी स्थिति से किसानों की चिंता बढ़ी

20-Jul-2026 03:43 PM

विजयवाड़ा। दक्षिण भारत के एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक राज्य- आंध्र प्रदेश में लम्बे समय से अच्छी वर्षा नहीं होने के कारण सूखे का संकट गहराता जा रहा है। अल नीनो के असर से वहां मानसून की हालत बेहद कमजोर देखी जा रही है। दिलचस्प तथ्य यह है कि बारिश की कमी के बाद राज्य के किसानों में खरीफ फसलों की खेती के प्रति भारी उत्साह देखा जा रहा है। 

चालू मानसून सीजन के दौरान राज्य में सामान्य औसत से काफी कम बारिश हुई है। जिन इलाकों में खरीफ फसलों की बिजाई हो चुकी है वहां उसके सूखने का खतरा पैदा हो गया है। वर्षा पर आश्रित क्षेत्रों में किसानों की चिंता एवं बेचैनी काफी बढ़ गई है। कई क्षेत्रों में दोबारा बिजाई की जरूरत पड़ सकती है। किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की  आशंका है।

कृषि विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि यदि अगले एक पखवाड़े के अंदर आंध्र प्रदेश में दूर-दूर तक अच्छी बारिश नहीं हुई तो इस बार खरीफ सीजन का प्रदर्शन हाल के वर्षों में सबसे खराब हो सकता है और विभिन्न फसलों के उत्पादन में काफी गिरावट आ सकती है। 

मौसम विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि 1 जून से 17 जुलाई 2026 के दौरान आंध्र प्रदेश में केवल 86.51 मि०मी० वर्षा हुई जो दीर्घकालीन औसत 166.76 मि०मी० से 48.12 प्रतिशत कम रही। राज्य के चार जिलों- पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी,  कोना सीमा एवं अन्नामय्या में से प्रत्येक में वर्षा की कमी 60 प्रतिशत से ज्यादा देखी जा रही है और वहां सूखे का भीषण संकट देखा जा रहा है। राज्य के अन्य जिलों में भी सामान्य औसत से कम या बहुत कम बारिश हुई है।

राज्य के वर्षा पर आश्रित जिलों- पालनाडु, कुर्नूल, प्रकाशम, नांदपाल, अनंतपुर, श्री सत्य साई एवं कडप्पा में हजारों एकड़ जमीन अभी खाली पड़ी हुई है। किसानों ने खरीफ फसलों की खेती के लिए इसे तैयार तो कर लिया मगर वर्षा की कमी के कारण उसमें बिजाई संभव नहीं हो रही है।