अल नीनो की तीव्रता पर आगामी खरीफ फसलों का भविष्य होगा निर्भर

05-Feb-2026 09:09 PM

नई दिल्ली। फिलहाल ला नीना मौसम चक्र कमजोर हो गया है लेकिन पूरी तरह से निष्क्रिय नहीं हुआ है। इसके फलस्वरूप मौजूदा रबी फसलों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न होने की आशंका बहुत कम है।

लेकिन वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में अल नीनो मौसम चक्र के उदय एवं आगमन की संभावना व्यक्त की जा रही है जो आगामी खरीफ फसलों के लिए घातक साबित हो सकता है। 

भारत के लिए अल नीनो एवं ला नीना मौसम चक्र की स्थिति अलग-अलग होती है। आमतौर पर ला नीना मौसम चक्र के दौरान देश में अच्छी बारिश होती है जिससे कृषि फसलों को काफी राहत मिलती है।

इसके विपरीत  अल नीनो की समयावधि के दौरान भारत में वर्षा कम, अनियमित एवं अनिश्चित होती है और कई इलाकों में भयंकर सूखे की आशंका बनी रहती है। इस बार ला नीना  मौसम चक्र आरंभ से ही कमजोर रहा और भारत में अधिक बारिश नहीं हो सकी।

उधर अमरीका, कनाडा एवं लैटिन अमरीकी देशों में लम्बे समय से मौसम शुष्क बना हुआ है जिसके लिए ला नीना मौसम चक्र को जिम्मेवार माना जा रहा है। इसी मौसम चक्र के प्रभाव से दक्षिण-पूर्व एशिया और खासकर मलेशिया में अत्यन्त मूसलाधार बारिश हो रही है। 

जहां तक अल नीनो की बात है तो इसके प्रभाव से अक्सर एशिया महाद्वीप और खासकर भारत में और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भी लम्बे समय तक अच्छी वर्षा नहीं होती तथा सूखा पड़ जाता है।

इस वर्ष जून-जुलाई में अल नीनो के आने का अनुमान लगाया जा रहा है जो भारत के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है।

वर्ष 2023 में इसी अल नीनो की वजह से दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में वर्षा कम हुई थी और देश का कम से कम 25 प्रतिशत कृषि क्षेत्र उससे प्रभावित हुआ था। इससे खाद्यान्न के उत्पादन में कमी आ गई थी।