अमरीका के साथ ट्रेड डील से वस्त्र उद्योग को राहत मिलने की संभावना
05-Feb-2026 12:11 PM
मुम्बई। अमरीका भारतीय वस्त्र परिधानों और खास कर सूती कपड़ो के सबसे प्रमुख खरीदारों में शामिल है इसलिए वहां स्थायी एवं अनुकूल व्यापारिक नीति लागू होने पर भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को अपने उत्पादों का निर्यात बढ़ाने का बेहतरीन अवसर मिल सकता है।
एक अग्रणी संस्था- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने सम्पूर्ण भारतीय कपास उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र की ओर से भारत और अमरीका के बीच टैरिफ का मुद्दा सुलझने का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे दोनों देश लाभान्वित होंगे।
अमरीका ने भारतीय उत्पादों के आयात पर सीमा शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत नियत करने की घोषणा की है जो द्विपक्षीय व्यापार के संवर्धन हेतु एक सकारात्मक एवं अग्रगामी कदम है।
इससे भारत और अमरीका के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को और भी मजबूत तथा पारस्परिक लाभप्रद बनाने में सहायता मिलेगी।
अमरीका में वस्त्र उत्पादों के निर्यात की गति सामान्य होने अथवा तेज रहने से भारत में टेक्सटाइल मिलों में रूई की मांग एवं खपत बढ़ेगी और कीमतों में कुछ सुधार आएगा जिससे कपास उत्पादकों को राहत मिलेगी।
कपास का घरेलू बाजार भाव कमजोर रहने से सरकारी एजेंसी- भारतीय वस्त्र निगम (सीसीआई) को एक बार फिर किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर विशाल मात्रा में इस महत्वपूर्ण रेशेदार औद्योगिक फसल की खरीद करने के लिए विवश होना पड़ा है। रूई के आयात पर फिलहाल 11 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगा हुआ है।
अमरीका के बाजार में अब भारतीय वस्त्र निर्यातकों को अपने उत्पादों का दाम प्रतिस्पर्धी स्तर पर रखने में सहायता मिलेगी जबकि पाकिस्तान, बांग्ला देश एवं चीन सहित अन्य निर्यातक देशों के लिए चुनौती बढ़ जाएगी।
