अमरीका के साथ व्यापार समझौता भारतीय किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण
05-Feb-2026 03:41 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री ने दावा किया है कि भारत और अमरीका के बीच जो द्विपक्षीय व्यापार समझौता हुआ है उससे भारतीय किसानों एवं उद्यमियों के लिए अवसरों का एक नया पिटारा खुल सकता है।
भारतीय उत्पादों पर अमरीका में केवल 18 प्रतिशत का आयात शुल्क लगेगा जो अन्य प्रतिस्पर्धी निर्यातक देशों की तुलना में कम है।
लम्बी बातचीत के बाद अंततः दोनों देश इस व्यापार समझौते के लिए सहमत हुए हैं। वाणिज्य मंत्री के अनुसार इस करार में भारतीय कृषि एवं डेयरी क्षेत्र के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है जबकि दूसरी ओर अमरीकी बाजारों में भारतीय कृषि उत्पादों की अधिक से अधिक पहुंच सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है।
समझा जाता है कि भारत ने अमरीका से जीएम संवर्ग के मक्का एवं सोयाबीन के आयात की अनुमति नहीं दी है और न ही डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क कम या खत्म करने का प्रस्ताव स्वीकार किया है।
अमरीका में टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत नियत किए जाने से भारत को वहां वस्त्र-परिधानों के अलावा चावल, मसाला तथा काजू सहित कई अन्य उत्पादों का निर्यात बढ़ाने का अच्छा अवसर मिल सकता है।
मसालों में खासकर कालीमिर्च के निर्यात में अच्छी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है क्योंकि वियतनाम ब्राजील एवं इंडोनेशिया जैसे अन्य आपूर्तिकर्ता देशों के लिये अमरीका में टैरिफ कुछ ऊंचा है।
इसी तरह चावल के मामले में पाकिस्तान एवं थाईलैंड के उत्पाद पर अमरीका में भारत से ज्यादा सीमा शुल्क लागू है। वस्त्र उत्पादों के लिए तो अमरीका सबसे प्रमुख बाजारों में से एक है।
