अनाजों एवं तिलहनों में नमी मापने के लिए मॉइस्चर मीटर के उपयोग का प्रस्ताव

20-Jul-2024 12:34 PM

नई दिल्ली। केंद्र सरकार खाद्यान्न तथा तिलहनों में नमी का स्तर मापने के लिए इस्तेमाल होने वाले मॉइस्चर मीटर (नमी मापक यंत्र) के लिए नियमो के प्रारूप पर विचार कर रही है। ज्ञात हो कि उपभोक्ता मामले में विभाग ने अनाज एवं तिलहन में मौजूद नमी का पता लगाने के लिए नए मापक यंत्र को शामिल करने का प्रस्ताव रखा है पिछले दिनों विभाग ने इसके नियम प्रारूप पर विचार करने के लिए सभी संबध पक्षों की एक मीटिंग बुलाई थी जिसकी अध्यक्षता उपभोक्ता मामले सचिव निधि खड़े ने की। पूर्व प्रचलित नियमो में संशोधन करने का प्रस्ताव रखा गया है जिसका उद्देश्य अनाजी  फसलों एवं तिलहनों के दाने में उपस्थित नमी के अंश को मापने के लिए मॉइस्चर मीटर हेतू कुछ विनिर्देशों को शामिल करना है। इसके तहत मेट्रोलॉजिकल (मापन संबंधी) तथा टेक्निकल (यांत्रिक संबंधी) जरूरतों को रेखांकित किया जायेगा, परीक्षण की विधि (पद्धति) को स्पष्ट किया जायेगा  और अनाजी फसलों तथा तिलहनों के व्यवसायिक कारोबार (लेन-देन) में इस्तेमाल होने वाले ग्रेन मॉइश्चर मीटर्स की किस्मो को अनुमोदित करने हेतु उच्चतम स्वीकृत गलतियों का आधार दिया जायेगा। 

इस महत्वपूर्ण मीटिंग में अनेक मेनुफैक्चरर्स, यूजर्स, वैज्ञानिक संस्थान, प्रयोगशालाओ, राज्य सरकार के विविध मापक विभाग (लीगल मेट्रोलॉजी डिपार्टमेंट्स) तथा वी पी ओ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उल्लेखनीय है कि मॉइस्चर मीटर एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग विभिन्न उत्पादों और खासकर अनाजी फसलों तथा तिलहनों में मौजूद नमी का अंश मापने में किया जाता है। अनाजी फसलों में धान-चावल, गेहूं, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी एवं जौ तथा स्पॉट्स मिलेट तथा तिलहनों में सरसो, सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी, तिल, अलसी एवं अरंडी आदि शामिल है। 

मॉइस्चर मीटर में नमी मापते समय कुछ त्रुटि आ सकती है इसलिए सरकार उसके लिए उच्चतम मान्य स्तर का निर्धारण करना चाहती है इस नए नमी मापक यंत्र से सरकारी एजेंसियों तथा प्राइवेट व्यापारिक फर्मो को अनाज एवं तिलहन की खरीद में आसानी होगी।