अरंडी के उत्पादन में भारी गिरावट आने से तेल और मील का निर्यात प्रभावित होने की संभावना

03-May-2025 11:57 AM

राजकोट । सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) ने अरंडी का घरेलू उत्पादन 2023-24 सीजन के 19.76 लाख टन से लुढ़ककर 2024-25 के सीजन में 15.60 लाख टन पर अटक जाने का अनुमान लगाया है।

इसके फलस्वरूप अरंडी तेल एवं अरंडी मील का सबसे बड़ा उत्पादक तथा इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों का सबसे प्रमुख निर्यातक देश है। हकीकत तो यह है कि अरंडी तेल एवं अरंडी मील के वैश्विक निर्यात बाजार पर भारत का लगभग एकाधिकार बना हुआ है। 

एसोसिएशन के अनुसार बिजाई क्षेत्र एक लाख हेक्टेयर से अधिक की गिरावट आने तथा औसत उपज दर भी नीचे रहने से अरंडी का उत्पादन काफी घट गया है।

गुजरात और राजस्थान जैसे अग्रणी उत्पादक प्रांतों में इस बार मौसम की हालत फसल के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं रही। इससे खासकर उन क्षेत्रों में फसल को नुकसान हुआ जहां बिजाई देर से हुई थी या दोबारा बिजाई की जरूरत पड़ी थी। 

'सी' मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर अरंडी का उत्पादन क्षेत्र 2023-24 सीजन के 9.88 लाख हेक्टेयर से 12 प्रतिशत या 1.20 लाख हेक्टेयर घटकर 2024-25 के सीजन में 8.68 लाख हेक्टेयर पर अटक गया जबकि इसकी औसत उत्पादकता दर भी 2000 किलो प्रति हेक्टेयर से गिरकर 1796 किलो प्रति हेक्टेयर रह जाने की संभावना है।

गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना सहित अन्य उत्पादक राज्यों में अरंडी के नए माल की आवक पहले ही आरंभ हो चुकी है। अब कटाई-तैयारी का सीजन भी लगभग समाप्त हो गया है।

2023-24 के मुकाबले 2024-25 सीजन के दौरान अरंडी का उत्पादन गुजरात में 15.74 लाख टन से लुढ़ककर 12.26 लाख टन, राजस्थान में 3.13 लाख टन से घटकर 2.71 लाख टन तथा आंध्र प्रदेश-तेलंगाना में 80 हजार टन से गिरकर 54 हजार टन रह जाने का अनुमान लगाया गया है। गुजरात से अरंडी तेल एवं मील का सर्वाधिक निर्यात होता है।