बासमती एवं सामान्य चावल के निर्यात में भारी उतार-चढ़ाव
04-Nov-2024 08:18 PM
नई दिल्ली । कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के आंकड़ों से ज्ञात होता है कि पिछले साल के मुकाबले चालू वित्त वर्ष के शुरूआती छह महीने में भारत से बासमती चावल के निर्यात में तो शानदार बढ़ोत्तरी हुई मगर गैर बासमती (सामान्य) चावल के शिपमेंट में जोरदार गिरावट आ गई। इसका प्रमुख कारण सफेद (कच्चे) चावल के व्यापारिक निर्यात पर प्रतिबंध लगा होना था।
एपीडा के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-सितम्बर 2023 में देश से 23.08 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था जो वर्ष 2024 में इन्हीं महीनों 4 लाख टन से ज्यादा बढ़कर 27.20 लाख टन पर पहुंच गया।
इसके फलस्वरूप बासमती चावल की निर्यात आय भी समीक्षाधीन अवधि में 2.59 अरब डॉलर से 10.80 प्रतिशत बढ़कर 2.87 अरब डॉलर पर पहुंची। निर्यातकों के मुताबिक निर्यात ऑफर मूल्य में कमी आने के कारण बासमती चावल की निर्यात आय में सीमित बढ़ोत्तरी हुई।
जहां तक गैर बासमती या सामान्य चावल की बात है तो इसकी निर्यात मांग एवं आमदनी में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। पिछले साल अप्रैल-सितम्बर में भारत से 68.81 लाख टन सामान्य (मोटे) चावल का निर्यात हुआ था जो चालू वर्ष की सामान अवधि में लुढ़ककर 46.52 लाख टन पर सिमट गया।
लेकिन औसत इकाई ऑफर मूल्य ऊंचा रहने से निर्यात आय में इसके अनुरूप जबरदस्त गिरावट नहीं आई। फिर भी सामान्य चावल की निर्यात आय पिछले साल के 270.70 करोड़ से 16.84 प्रतिशत घटकर चालू वर्ष में 225.10 करोड़ डॉलर रह गई।
अब सरकार ने सफेद चावल का निर्यात पूरी तरह खोल दिया है और सेला चावल पर लगे निर्यात शुल्क को भी हटा दिया है। इतना ही नहीं बल्कि बासमती चावल के लिए नियत 950 डॉलर प्रति टन के न्यूनतम निर्यात मूल्य (मेप) को भी वापस के लिए है।
इसके फलस्वरूप अक्टूबर 2024 से मार्च 2025 की दूसरी छमाही के दौरान भारतीय चावल के निर्यात में शानदार बढ़ोत्तरी होने के आसार हैं। अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाजार में भारतीय चावल प्रतिस्पर्धी मूल्य पर उपलब्ध है।
