एथनॉल निर्माण में मक्का के बढ़ते उपयोग से फीड उद्योग की बढ़ेगी कठिनाई

05-May-2025 03:58 PM

नई दिल्ली। एथनॉल या बायोफ्यूल के निर्माण में मक्का की मांग एवं खपत तेजी से बढ़ती जा रही है जबकि उसके अनुरूप पैदावार में बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है। उसके फलस्वरूप परम्परागत खपतकर्ता उद्योगों में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्ध घटने की संभावना है।

परम्परागत रूप से मक्का की करीब 60 प्रतिशत खपत पॉल्ट्री फीड निर्माण उद्योग में होती है जबकि पशु आहार (फीड) तथा स्टार्च के निर्माण में भी मक्का का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। इसके अलावा मानवीय खाद्य उद्देश्य में इसका प्रयोग होता है और देश से इसका निर्यात भी किया जाता है। 

एथनॉल उत्पादन में उपयोग बढ़ने से पूर्व भारत मक्का का अधिशेष उत्पादन करने वाला देश बना हुआ था जिससे इसके निर्यात का प्रदर्शन अच्छा चल रहा था लेकिन बदलते हालात को देखते हुए अब देश में विदेशों से मक्का का आयात बढ़ाने की आवश्यकता महसूस होने लगी है।  

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2021-22 के सीजन में करीब 320-330 लाख टन मक्का का घरेलू उत्पादन हुआ था जबकि इसकी घरेलू मांग एवं खपत 280 लाख टन के करीब आंकी गई थी।

इसके फलस्वरूप निर्यात के लिए अधिशेष स्टॉक मौजूद था। उस सीजन में मक्का का निर्यात बढ़कर 37 लाख टन पर पहुंच गया था। उस 280 लाख टन के घरेलू उपयोग में पॉल्ट्री फीड एवं पशु आहार निर्माण  उद्योग की भागीदारी करीब 200 लाख टन रही थी जबकि 50 लाख टन का योगदान स्टार्च  निर्माण उद्योग का रहा था।

इसके अलावा करीब 20 लाख टन मक्का का उपयोग सीधे मानवीय खाद्य उद्देश्य में और 10 लाख टन का इस्तेमाल बीज के रूप में हुआ था। पॉल्ट्री फीड निर्माण में 150 लाख टन एवं पशुआहर निर्मण में लगभग 50 लाख टन मक्का का प्रयोग हुआ था। 

लेकिन जबसे एथनॉल उत्पादन में मक्का का प्रयोग बढ़ने लगा तब से परिस्थितियां बदलने लगीं। पेट्रोल में 99.9 प्रतिशत शुद्ध एथनॉल का मिश्रण हो सकता है।

मक्का के दाने में 68 से 72 प्रतिशत तक स्टार्च मौजूद रहता है जबकि 1 से 3 प्रतिशत के बीच अन्य कार्बोहाइड्रेट (सुक्रोज, ग्लूकोज एवं फ्रक्टोस) उपस्थित रहता है।

कार्बोहाइड्रेट को पशुओं के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत माना जाता है मगर इसका उपयोग एथनॉल उत्पादन में भी बड़े पैमाने पर होता है। एक टन मक्का से करीब 380 लीटर एथनॉल का उत्पादन हो सकता है। 

2022-23 के सीजन में चीनी मिलों / डिस्टीलरीज अब 31.51 करोड़ लीटर एथनॉल की आपूर्ति की गई जबकि मक्का का उपयोग केवल 8 लाख टन का हुआ।

2023-24 में मक्का का इस्तेमाल बढ़कर 75 लाख टन पर पहुंच गया जबकि एथनॉल की आपूर्ति 286.54 करोड़ लीटर तक पहुंची।