फसल रोटेशन के लिए ऑस्ट्रेलिया में दलहनों की खेती पर विशेष जोर

28-Oct-2025 08:05 PM

ब्रिसबेन। एक ब्रेक फसल के तौर पर कैनोला का रकबा बढ़ने के बावजूद ऑस्ट्रेलिया में फसल रोटेशन प्लान के एक भाग के रूप में दलहनों की खेती काफी महत्वपूर्ण बनी हुई है। सरकारी एजेंसी- अबारेस के नवीनतम- आंकड़ों से पता चलता है

कि दलहनों का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के रिकॉर्ड स्तर को पार करते हुए इस बार एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। वस्तुतः शीतकालीन फसल के रोटेशन (अदला-बदली) में दलहनों का उत्पादन करना किसानों के लिए काफी लाभ दायक साबित हो रहा है। 

विश्लेषकों के मुताबिक जब मौसम की हालत अनुकूल रहती है तब ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी राज्यों में किसान चना का उत्पादन क्षेत्र बढ़ाने का हर संभव प्रयास करते हैं। इसी तरह देश के दक्षिणी प्रांतों में मसूर के बिजाई क्षेत्र में पिछले दस वर्षों से अच्छी बढ़ोत्तरी हो रही है।

पश्चिमी भाग में ल्यूपिन एक स्थायी दलहन बन गया है जिसका 77 प्रतिशत उत्पादन इस बार वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया प्रान्त में होने की उम्मीद है। लेकिन न्यू साउथ वेल्स, विक्टोरिया तथा साउथ ऑस्ट्रेलिया  प्रान्त में पिछले छह वर्षों से ल्यूपिन की बिजाई में गिरावट आ रही है जबकि उसके बढ़ने में किसान फाबा बीन्स की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं।  

दलहनों की उपज दर विभिन्न भागों / राज्यों में अलग-अलग देखी जा रही है। दलहन फसलें अनेक कारकों के प्रति संवेदनशील होती हैं। पिछले 12 वर्षों से उपज दर में क्षेत्रवार काफी अंतर देखा जा रहा है।

लेकिन बिजाई क्षेत्र में इजाफा होने से दलहनों के कुल उत्पादन की स्थिति बेहतर रहती है। 2025-26 सीजन के दौरान ऑस्ट्रेलिया में मसूर का सकल उत्पादन बढ़कर 17 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया जा रहा है

जो इसकी औसत उपज दर 1.50 टन प्रति हेक्टेयर के अनुमान पर आधारित है। यह उत्पादन अनुमान सितम्बर में लगाया गया था लेकिन उसके बाद मौसम शुष्क हो गया। 

चना की नई फसल की कटाई-तैयारी क्वींसलैंड तथा उत्तरी न्यू साउथ वेल्स प्रान्त में आरंभ हो चुकी है। इस बार भी वहां मौसम की हालत काफी हद तक अनुकूल रही।

2024-25 के मार्केटिंग सीजन के दौरान ऑस्टेलिया में चना का उत्पादन बढ़कर 22 लाख टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया था जबकि 2025-26 के मौजूदा सीजन में उत्पादन 19.50 लाख टन होने का अनुमान है।