गेहूं बाजार में हालत अनिश्चित रहने की संभावना

09-Apr-2026 08:48 PM

नई दिल्ली। इस वर्ष गेहूं के घरेलू बाजार में कई विरोधाभासी या बेमेल परिस्थितियां देखी जा रही है। एक तरफ इसका बिजाई क्षेत्र पिछले सीजन के 328.04 लाख हेक्टेयर से 6.13 लाख हेक्टेयर बढ़कर इस बार 334.17 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया और मध्य मार्च तक मौसम की हालत फसल के लिए कमोबेश अनुकूल बनी रही।

इसके आधार पर केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने गेहूं का उत्पादन तेजी बढ़कर 1202.10 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया। दूसरी ओर उद्योग-व्यापार क्षेत्र ने माना कि गेहूं का उत्पादन पिछले साल से बेहतर होगा मगर यह 1150 लाख टन से ऊपर नहीं पहुंच सकेगा। पिछले सीजन के लिए कृषि मंत्रालय ने 1179.40 लाख टन गेहूं का घरेलू उत्पादन आंका था। 

मध्य मार्च के बाद परिदृश्य बदलने लगा। आंधी-तूफान, बेमौसमी वर्षा एवं ओलावृष्टि से गेहूं की फसल क्षतिग्रस्त होने लगी। प्रतिकूल मौसम एवं प्राकृतिक आपदा के दायरे में देश के लगभग सभी प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य आ गए। इसमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान भी शामिल हैं।

ये पांच राज्य मिलकर केन्द्रीय पूल में 95 प्रतिशत से अधिक गेहूं का योगदान देते हैं। इन राज्यों में आंधी-वर्षा एवं ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को कहीं कम तो कहीं ज्यादा नुकसान होने की आशंका है।

गेहूं का घरेलू उत्पादन घटकर 1130 लाख टन के आसपास सिमट सकता है। इसी तरह गेहूं के दाने की क्वालिटी कुछ इलाकों में बुरी तरह प्रभावित हुई है। यह बदरंग और चमकहीन हो गया है। इसकी खरीद के लिए सरकार को गुणवत्ता सम्बन्धी नियमों-शर्तों एवं मानदंड में रियायत देनी पड़ेगी। खराब क्वालिटी के गेहूं का थोक मंडी भाव काफी नीचे रह सकता है।