हिन्द महासागर का डायपोल अलनीनो पर डालेगा असर
09-Apr-2026 06:04 PM
तिरुअनन्तपुरम। विभिन्न देशों के मौसम पूर्वानुमान केन्द्रों ने इस वर्ष की दूसरी छमाही के दौरान अल नीनो मौसम चक्र के आने तथा सक्रिय रहने की संभावना व्यक्त की है। भारत पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है। लेकिन यह प्रभाव कितना असरदार, व्यापक एवं विस्तृत होगा- इसका निर्धारण कुछ हद तक हिन्द महासागर के डायपोल में होने वाला परिवर्तन कर सकता है।
जून से सितम्बर तक सक्रिय रहने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए अल नीनो को अच्छा नहीं माना जाता है क्योंकि अक्सर इसके प्रकोप से बारिश में बाधा पड़ती है और देश के कुछ भागों में सूखे का संकट पैदा हो जाता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा पर ही खरीफ फसलों का भविष्य निर्भर रहता है। बारिश कम होने पर खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
जलवायु पूर्वानुमान केन्द्रों द्वारा इस वर्ष 'सुपर अल नीनो' की भविष्यवाणी की जा रही है। वर्ष 1982, 1992 एवं 2015 में भी सुपर अल नीनो आया था लेकिन 1997 में मानसून की बारिश लगभग सामान्य रही थी। वर्ष 2026 का अलनीनो मानसून पर कितना असर डालता है यह आगामी महीनों में पता चलेगा।
विषुवतीय प्रशांत महासागर में अल नीनो एवं ला नीना मौसम चक्र का निर्माण होता है जबकि हिन्द महासागर का डायपोल (आईओडी) उसका समकक्ष माना जाता है इसलिए यह डायपोल अल नीनो की दशा एवं दिशा निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। इस पर गहरी नजर रखी जा रही है।
कुछ रासायनिक उर्वरकों के अभाव की आशंका से किसान पहले से ही परेशान है जबकि अल नीनो की वजह से उसकी चिंता और भी बढ़ गई है।
