इथेनॉल उत्पादन से निकले DDGS का असर: फीड इंडस्ट्री को राहत, सोयाबीन को झटका
05-May-2025 12:09 PM
इथेनॉल उत्पादन से निकले DDGS का असर: फीड इंडस्ट्री को राहत, सोयाबीन को झटका
★ भारत में मक्का से इथेनॉल उत्पादन में तेजी के साथ पशु आहार उद्योग में डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विथ सोल्युबल्स (DDGS) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
★ इससे जहां फीड मैन्युफैक्चरर्स को सस्ता और उच्च प्रोटीन युक्त विकल्प मिला है, वहीं सोयाबीन उद्योग पर इसका सीधा नकारात्मक असर पड़ा है।
★ 2024-25 में अनुमानित 48.435 करोड़ लीटर मक्का इथेनॉल उत्पादन के लिए 127 लाख टन मक्का की खपत होगी। इससे लगभग 42 लाख टन DDGS मक्का से और 10 लाख टन DDGS चावल से उत्पन्न होगा—कुल 50 लाख टन से अधिक DDGS, जो फीड इंडस्ट्री में DOC का सस्ता विकल्प बन रहा है।
DDGS के भाव
मक्का DDGS (28-30% प्रोटीन): रुपए 16,000-17,000/टन
चावल DDGS (45% तक प्रोटीन): रुपए 18,000-19,000/टन
सोयाबीन DOC: रुपए 31,000-32,000/टन
★ DDGS की उपलब्धता के कारण सोयाबीन DOC की मांग और कीमतों में भारी गिरावट आई है। पिछले दो वर्षों में कीमतों में लगभग 30% की गिरावट आई है।
★ सोयाबीन रुपए 4,300 प्रति क्विंटल से नीचे बिक रहा है, जो सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) रुपए 4,892 से काफी कम है।
★ इथेनॉल के लिए मक्का की बढ़ती खपत ने मक्का के किसानों को फायदा हुआ, लेकिन सोयाबीन उत्पादकों को नुकसान।
★ DDGS ने एक ओर जहां फीड इंडस्ट्री को नई राहत दी है, वहीं दूसरी ओर सोयाबीन किसानों और प्रोसेसरों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। सरकार और नीति निर्धारकों को इस बदलते संतुलन पर ध्यान देना जरूरी हो गया है।
★ जब तक इस बढ़ते संकट पर सरकार दखलंदाजी नहीं करती खाद्य तेल-तिलहनों और इसके उत्पादों पर असर पड़ेगा जो आगे चल कर और गंभीर हो सकता है।
