जीएम फसलों के लिए नीति किसानों के अनुकूल होना आवश्यक
06-Nov-2024 06:29 PM
नई दिल्ली । घरेलू प्रभाग में खाद्यान्न एवं अन्य कृषि उत्पादों की तेजी से बढ़ती मांग को देखते हुए भविष्य में जेनेटिकली मोडिफाइड (जीएम) फसलों की तेजी की आवश्यकता महसूस हो सकती है।
फिलहाल देश में जीएम फसलों के संवर्ग में केवल बीटी कॉटन के व्यावसायिक उत्पादन की अनुमति दी गई है जबकि जीएम सरसों का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
23 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के केन्द्र सरकार को अनुसंधान, खेती, व्यापार एवं उपयोग के लिए सभी पक्षों के साथ विचार-विमर्श करके जीएम फसलों पर एक राष्ट्रीय नीति बनाने का निर्देश दिया था दरअसल केन्द्र सरकार ने वर्ष 2022 में जीएम सरसों को पर्यावरणीय रिलीज करने की सशर्त स्वीकृति प्रदान की थी।
धारा मस्टर्ड हाइब्रिड था डीएमएच-11 को जब अनुमति देने की घोषण हुई तब देश में हंगामा मच गया और इसका विरोध होने लगा। बाद में यह मामला अदालत में पहुंच गया। इस पर न्यायाधीशों सर्वसम्मत राय नहीं बनने के कारण सरकार को विशेष नीति बनाने के लिए कहा गया।
जीएम फसलों के पक्षधर का कहना है कि भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसके व्यावसायिक उत्पादन की अनुमति देना आवश्यक है लेकिन दूसरी ओर आलोचकों का मानना है कि इससे कृषि क्षेत्र में संकुचन पैदा होगा,
पर्यावरण एवं जैव विविधता के लिए जोखिम पैदा होगा और मनुष्य तथा पशुओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा बढ़ जाएगा। केन्द्र सरकार जीएम फसलों पर एक नीति तैयार कर रही है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह नीति भारतीय किसानों के हित तथा कल्याण की सुरक्षा पर आधारित होनी चाहिए।
