ज्वार तथा बाजरा की खेती के प्रति किसानों की दिलचस्पी घटने के संकेत
20-Jul-2024 04:54 PM
नई दिल्ली। हालाँकि केंद्र सरकर ने 2024-25 के मार्केटिंग सीजन हेतु हाइब्रिड ज्वार का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6 प्रतिशत बढ़ाकर 3371 रुपए प्रति क्विंटल, बाजरा का 5 प्रतिशत बढ़ाकर 2625 रुपए प्रति क्विंटल, रागी का 11.50 प्रतिशत बढ़ाकर 4290 रुपए प्रति क्विंटल तथा मक्का का समर्थन मूल्य 6.5 प्रतिशत बढ़ाकर 2225 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इस बार किसान मक्का, दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती पर विशेष जोर दे रहे हैं जिससे ज्वार, बाजरा का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से पीछे चल रहा है।
आमतौर पर ज्वार, बाजरा की फसल को धान एवं गन्ना आधी की तुलना में सिंचाई के लिए पानी की बहुत कम आवश्यकता पड़ती है इसलिए जब मानसून कमजोर रहता है और अन्य फसलों की खेती प्रभावित होती है तब किसान विकल्प के तौर पर मोटे अनाजों की बिजाई को विशेष प्राथमिकता देते हैं। पिछले साल अलनीनो मौसम चक्र के कारण मानसून की बारिश कम होने से ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हुई थी जिससे खासकर बाजरा का क्षेत्रफल तेजी से बढ़ा था। उसके मुकाबले इस बार मानसून की हातल बेहतर है इसलिए किसानों का रुझान अन्य फसलों की तरफ ज्यादा है।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम आकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान 19 जुलाई तक ज्वार का उत्पादन क्षेत्र 10.07 लाख हेक्टेयर से गिरकर 9.81 लाख हेक्टेयर तथा बाजरा का बिजाई क्षेत्र 58 लाख हेक्टेयर से घटकर 42.10 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया। कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, राज्स्त्थान, मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में मानसून भी सामान्य या अधिशेष बारिश होने से ज्वार-बाजरा की खेती में किसानों की दिलचस्पी घटने के संकेत मिल रहे हैं। जहाँ तक रागी का सवाल है तो इसका रकबा 1.70 लाख हेक्टेयर पहुंचा है जो पिछले साल के बराबर ही है। लेकिन मक्का का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 63 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस बार 67.78 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है क्योंकि एथनोल निर्माण में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है जिससे इसका दाम आगे भी ऊंचा एवं मजबूत रहने की उम्मीद है। जहाँ तक स्मॉल मिलेट्स का सवाल है तो सरकार इसकी खेती को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही हैं जिससे इसका रकबा 2.17 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 2.34 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है।
