कालीमिर्च के घरेलू उत्पादन में भारी गिरावट आने का अनुमान

20-May-2025 10:55 AM

कोच्चि। कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु जैसे शीर्ष उत्पादक प्रांतों के प्रमुख उत्पादक इलाकों में मौसम की स्थिति फसल के लिए अनुकूल नहीं रहने से कालीमिर्च के घरेलू उत्पादन में जोरदार गिरावट आने की आशंका व्यक्त की गई हैं।

आधिकारिक तौर पर इसका उत्पादन 2024-25 सीजन के 1.26 लाख टन से घटकर 2025-26 के सीजन में 76 हजार टन पर सिमटने का अनुमान लगाया गया है जबकि उद्योग-व्यापार क्षेत्र का उत्पादन अनुमान इससे छोटा है। समझा जाता है कि मौसम की प्रतिकूल हालत से श्रीलंका और वियतनाम में भी कालीमिर्च का उत्पादन प्रभावित हुआ है।

भारत में लगभग 60 हजार टन कालीमिर्च की औसत वार्षिक खपत होती है और इसमें नियमित रूप से   बढ़ोत्तरी हो रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार लगभग 50 हजार टन के बकाया स्टॉक के कारण घरेलू प्रभाग में कालीमिर्च की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी रहेगी

जबकि विदेशों से होने वाले विशाल सस्ते आयात की वजह से कीमतों में तेजी पर काफी हद तक ब्रेक लग सकता है। कालीमिर्च का आयात 2023-24 सीजन के 14 हजार टन से बढ़कर 2024-25 में 24 हजार टन पर पहले ही पहुंच चुका है। 

भारतीय कालीमिर्च की क्वालिटी काफी अच्छी होती है इसलिए इसका निर्यात ऑफर मूल्य अन्य आपूर्तिकर्ता देशों की तुलना में ऊंचा रहता है।

वर्तमान समय में भारत की कालीमिर्च का निर्यात ऑफर मूल्य लगभग 8650 डॉलर प्रति टन चल रहा है जबकि श्रीलंका का ऑफर मूल्य 7200 डॉलर प्रति टन बताया जा रहा है।

मसाला बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 के 11 महीनों के दौरान भारत से 19 हजार टन से कुछ अधिक कालीमिर्च का बिजाई हुआ जिससे 802.30 लाख डॉलर की आमदनी हुई।

वित्त वर्ष 2023-24 की सामान अवधि के मुकाबले 2024-25 के दौरान कालीमिर्च की निर्यात मात्रा में 18 प्रतिशत तथा निर्यात आय में 40 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई।

स्वदेशी स्रोतों से बेहतर आपूर्ति को देखते हुए उत्पादन एवं व्यापारी सरकार से कालीमिर्च के आयात पर अंकुश लगाने की मांग कर रहे हैं।

उनका कहना है कि इसका न्यूनतम आयात मूल्य घरेलू बाजार में प्रचलित भाव से ऊंचा होना चाहिए और श्रीलंका से होने वाले शुल्क मुक्त आयात के तहत इसकी निश्चित मात्रा को घटाया जाना चाहिए जो अभी 2500 टन वार्षिक है।