कमजोर उत्पादन के बीच सोयाबीन की रिकॉर्ड खरीद की मंजूरी
28-Oct-2025 08:47 PM
नई दिल्ली। हालांकि पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन के बिजाई क्षेत्र में करीब 9-10 लाख हेक्टेयर की जोरदार गिरावट आई और तीनों शीर्ष उत्पादक राज्यों- मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा राजस्थान में रकबा घटने एवं प्राकृतिक आपदाओं से फसल को भारी नुकसान होने के कारण सोयाबीन का उत्पादन लुढ़ककर 100 लाख टन से नीचे आने का अनुमान लगाया जा रहा है
लेकिन केन्द्र सरकार इसकी विशाल खरीद के लिए तैयारी कर रही है। हालांकि मध्य प्रदेश में सरकारी एजेंसियां किसानों से प्रत्यक्ष रूप से सोयाबीन की खरीद नहीं करेंगी क्योंकि वहां भावान्तर भुगतान योजना लागू की गई है
लेकिन फिर भी केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने राज्य में 22,21,632 टन सोयाबीन के मूल्यान्तर का भुगतान करने हेतु 1775.53 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है।
दूसरे सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य-महाराष्ट्र में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 18,50700 टन सोयाबीन की खरीद को मंजूरी दी गई है और इसके लिए 986053 करोड़ रुपए की राशि आवंटित करने का निर्णय लिया गया है।
इससे पूर्व गुजरात एवं उत्तर प्रदेश में भी तिलहन की खरीद को मंजूरी दी गई थी। सोयाबीन के तीसरे सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त- राजस्थान में भी खरीद की स्वीकृति दिये जाने की संभावना है लेकिन फिलहाल इसका कोई विवरण सामने नहीं आया है। कर्नाटक में भी सोयाबीन की सरकारी खरीद की स्वीकृति दी जा सकती है।
इसमें कोई संदेह नहीं कि सोयाबीन का भाव घटकर सरकारी समर्थन मूल्य से काफी नीचे आ गया है जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
मध्य प्रदेश में तो किसानों को परोक्ष रूप से समर्थन मूल्य का लाभ प्राप्त हो रहा है मगर महाराष्ट्र सहित अन्य उत्पादक राज्यों के किसानों की हालत अत्यन्त खराब है।
महाराष्ट्र में 30 अक्टूबर से सोयाबीन उत्पादकों का रजिस्ट्रेशन करने तथा सरकारी क्रय केन्द्रों को क्रियाशील बनाने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री ने तब तक किसानों को अपना उत्पाद नहीं बेचने के लिए कहा है।
