कनाडा से दलहनों के आयात पर निर्भरता में धीरे-धीरे गिरावट

21-Oct-2024 01:12 PM

मुम्बई । कनाडा के साथ बढ़ने राजनयिक विवाद का दो प्रमुख दलहनों- मसूर एवं मटर के आयात पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। उल्लेखनीय है कि जून 2023 में कनाडा के एक नागरिक की हत्या होने के बाद से ही दोनों देशों के सम्बन्ध लगातार खराब होते जा रहा है।

वैसे अभी तक व्यापारिक रिश्ता ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ है लेकिन भविष्य की अनिश्चितता को देखते हुए भारतीय आयातकों ने कनाडा से मसूर एवं मटर के आयात की गति धीमी कर दी है और दूरस्थ पोजीशनों की डिलीवरी के लिए आयात अनुबंध करने में भी हिचक दिखाना शुरू कर दिया है। 

कनाडा ने अपने नागरिक की हत्या में भारत का हाथ होने का आरोप लगाया है और कई भारतीय राजनियक को निष्कासित कर दिया है। भारत ने भी कनाडाई आरोप को निराधार बताते हुए कनाडा के राजनयिक को देश छोड़ने का आदेश दे दिया।  

उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि 2023-24 के मध्य से भारत इन दोनों दलहनों के आयात के लिए कनाडा पर निर्भरता को धीरे-धीरे घटाने का प्रयास कर रह है क्योंकि उसे दो बेहतर विकल्प ऑस्ट्रेलिया और रूस के रूप में मिल गया है।

भारत में मटर के आयात में रूस तथा यूक्रेन के माल की भागीदारी बढ़ती जा रही है जबकि तुर्की भी एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर रहा है।

जहां तक मसूर का सवाल है तो भारत में इसकी आपूर्ति में ऑस्ट्रेलिया अब कनाडा से आगे निकल गया है और आगामी समय में और भी आगे निकल सकता है क्योंकि भारतीय आयातक कनाडा के बजाए ऑस्ट्रेलिया से मसूर की खरीद को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे कनाडा के मसूर उत्पादकों एवं निर्यातकों की चिंता बढ़ने लगी है। 

इतना ही नहीं बल्कि अमरीका भी भारत को दलहनों का निर्यात बढ़ाने का हर संभव प्रयास कर रहा है। भारत पर मिथ्या आरोप लगाना कनाडा के लिए महंगा पड़ सकता है क्योंकि कोई अन्य देश ऐसा देश नहीं है जो मसूर तथा मटर के आयात में भारत का स्थान ले सके।

चीन भी कनाडाई मटर के आयात पर निर्भरता घटा रहा है क्योंकि कनाडा के साथ उसके सम्बन्ध भी अच्छे नहीं है। यदि भारत और चीन में कनाडाई मटर का निर्यात प्रभावित होता है तो उसके लिए यह भारी आघात साबित हो सकता है।