खरीफ फसलों के सरकारी उत्पादन अनुमान के प्रति सतर्क रहने की जरूरत
29-Oct-2025 05:20 PM
नई दिल्ली। हालांकि विभिन्न फसलों के बिजाई क्षेत्र में हुई बढ़ोत्तरी तथा दक्षिण-पश्चिम मानसून की भारी वर्षा होने के आधार पर केन्द्रीय कृषि मंत्रालय खरीफ फसलों के बेहतर उत्पादन के प्रति आशान्वित हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि अत्यधिक बारिश एवं भयंकर बाढ़ के कारण कई फसलों के उत्पादन में बढ़ोत्तरी होने में संदेह है।
दरअसल किसानों की उम्मीदों को प्राकृतिक आपदाओं से झटका लगने की आशंका है। अगस्त-सितम्बर के बाद अक्टूबर में भी जोरदार बारिश होने तथा कई क्षेत्र में बाढ़ का गंभीर प्रकोप रहने से विभिन्न फसलों को क्षति पहुंची है इसलिए शानदार उत्पादन की संभावना क्षीण पड़ गई है।
इसके फलस्वरूप अक्टूबर-दिसम्बर 2025 की तिमाही में कृषि क्षेत्र की विकास दर महज 3.00-3.50 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है जो गत वर्ष की समान अवधि में 6.6 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर थी।
अत्यन्त भारी वर्षा की वजह से कृषि फसलों की क्वालिटी खराब हो गई है जिससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे दाम पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है। इसमें खासकर दलहन- तिलहन एवं कपास की फसल शामिल है जिसका बाजार भाव एमएसपी से नीचे चल रहा है।
सोयाबीन के लिए मध्य प्रदेश में भावान्तर भुगतान योजना आरंभ की गई है जिससे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है लेकिन महाराष्ट्र में अभी तक किसानों से एमएसपी पर सोयाबीन की खरीद शुरू नहीं होने से स्थिति बदहाल हो गई है।
जहां तक रबी फसलों का सवाल है तो सरसों, चना, मसूर एवं गेहूं आदि की बिजाई के लिए मौसम एवं वर्षा की हालत काफी हद तक अनुकूल बनी हुई है। बिजाई भी आरंभ हो चुकी है। यदि आगे मौसम अनुकूल रहा तो खासकर सरसों एवं चना के क्षेत्रफल में वृद्धि हो सकती है।
कृषि मंत्रालय जल्द ही उत्पादन का अग्रिम अनुमान जारी करने वाला है लेकिन उस पर पूरी तरह विश्वास करने तथा उसके आधार पर अपनी व्यापारिक रणनीति बनाने में जल्दबाजी नहीं दिखाई जानी चाहिए। उत्पादन अनुमान में आगे बदलाव की संभावना रहती है।
