खरीफ कालीन दलहन फसलों की आवक एवं विदेशी आयात से घरेलू बाजार पर दबाव
23-Dec-2024 06:11 PM
मुम्बई । खरीफ सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून की अच्छी बारिश हुई और उससे पहले बाजार भाव काफी ऊंचे स्तर पर रहने से दलहन फसलों की खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण बढ़ गया।
खरीफ कालीन दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 119 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस बार 129 लाख हेक्टेयर के करीब पहुंच गया। इसके तहत खासकर अरहर (तुवर) एवं मूंग के रकबे में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई।
सितम्बर के अंत में दलहन फसलों का उत्पादन 85 लाख टन होने का अनुमान लगाया जा रहा था मगर कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा एवं भयंकर बाढ़ से फसल को हुए नुकसान के बाद उत्पादन का अनुमान 5 लाख टन घटाकर 80 लाख टन नियत किया गया है जो पिछले साल से करीब 10 लाख टन ज्यादा मगर सरकार द्वारा लक्ष्य 95 लाख टन से 15 लाख टन कम था।
नवम्बर के प्रथम सप्ताह के दौरान केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने अपने प्रथम अग्रिम अनुमान के तहत खरीफ कालीन दलहन फसलों महज 69 लाख टन पर सिमटने की संभावना व्यक्त की जिससे उद्योग-व्यापार क्षेत्र को काफी हैरानी हुई।
सरकार का कहना था कि यह आरंभिक उत्पादन अनुमान है और जब फसल की कटाई-तैयार पूरी होगी तब इसकी दोबारा समीक्षा की जाएगी।
समीक्षकों के अनुसार कृषि मंत्रालय के अगले (दूसरे) अग्रिम अनुमान में खरीफ कालीन दलहन फसलों का उत्पादन आंकड़ा 80 लाख टन के करीब पहुंच सकता है।
जहां तक मौजूदा रबी फसलों का सवाल है तो चना, मसूर एवं मटर सहित अन्य दलहनों के बिजाई क्षेत्र में मिश्रित रुख देखा जा रहा है।
हालांकि चना के उत्पादन क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी के संकेत मिल रहे हैं लेकिन अन्य दलहन के प्रति किसानों में पिछले साल वाला जोश और उत्साह नहीं देखा जा रहा है।
पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा 31 दिसम्बर को समाप्त हो रही और सरकार ने इसे आगे बढ़ाने के लिए अभी तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की है।
अन्य दलहनों के शुल्क मुक्त आयात की अवधि 31 मार्च 2025 तक नियत है। उड़द एवं मूंग की खेती खरीफ के साथ-साथ रबी सीजन में भी होती है।
