ला नीना के कमजोर पड़ने से अल नीनो के आने की आशंका बढ़ी
06-Feb-2026 01:16 PM
तिरुअनन्तपुरम। ऑस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो (बोम) ने कहा है कि ला नीना मौसम चक्र अब काफी कमजोर पड़ गया है और मध्यवर्ती ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान फिलहाल सामान्य बना हुआ है इसलिए अल नीनो का भी उदय नहीं हुआ है।
लेकिन जैसे-जैसे जल सतह गर्म होता जाएगा, वैसे-वैसे अल नीनो मौसम चक्र के आने की आशंका भी बढ़ती जाएगी। अल नीनो सॉदर्न ऑसिलेशन (एनसो) की उदासीनता अगले तीन चार महीनों तक बरकरार रह सकती है। इसका मतलब यह है कि अगर अल नीनो का निर्माण एवं आगमन होता है तो यह जून 2026 के बाद ही संभव हो पाएगा।
जून से भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय होता है और खरीफ फसलों की बिजाई भी आरंभ होती है। देश में 75 प्रतिशत से अधिक सामान्य वर्षा इसी मानसून के दौरान होती है जो जून से सितम्बर के चार महीनों तक सक्रिय रहता है।
अल नीनो को मानसून के लिए अच्छा नहीं माना जाता क्योंकि यह वर्षा को प्रभावित करता है। वर्ष 2023-24 में अल नीनो के प्रभाव से भारत में मानसून की बारिश असमान, अनियमित एवं अनिश्चित हो गई थी
और लगभग 25 प्रतिशत भाग में सूखे का माहौल बन गया था। इससे खाद्यान्न सहित अन्य फसलों की पैदावार में कमी आ गई थी।
बोम के अनुसार अभी अल नीनो के आने में लम्बा समय काफी है और इस बीच विषुवतीय प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी सहित अन्य समुद्रों के अंदर तापमान में होने वाले परिवर्तन पर गहरी नजर रखना आवश्यक है। जून के बाद अल नीनो के आने का अभी सिर्फ अनुमान लगाया जा रहा है।
कुछ मौसम मॉडल्स इसका आरंभिक संकेत दे रहे हैं लेकिन फिलहाल कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है। अल नीनो कितना तीव्र, विस्तृत, लम्बे समय वाला तथा प्रभावशाली होगा- यह तो आने वाला समय बताएगा लेकिन इसके आने से भारत को कुछ परेशानी हो सकती है।
