महाराष्ट्र में सोयाबीन उत्पादकों को सरकारी खरीद का बेसब्री से इंतजार
28-Oct-2025 04:38 PM
मुम्बई। महाराष्ट्र की प्रमुख मंडियों में सोयाबीन का भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे आ गया है जिससे किसानों को भारी कठिनाई हो रही है।
हालांकि अब केन्द्र सरकार ने वहां एमएसपी पर करीब 18.61 लाख टन सोयाबीन की खरीद की स्वीकृति प्रदान कर दी है लेकिन जब तक वास्तविक खरीद आरंभ नहीं होगी तब तक किसानों की परेशानी बरकरार रहेगी।
केन्द्र सरकार ने 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 5328 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है जबकि इसका थोक मंडी (लूज) भाव इससे करीब 30 प्रतिशत नीचे यानी 3500 से 4000 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है।
एक प्रगतिशील किसान के अनुसार पिछले साल के मुकाबले चालू वर्ष के दौरान महाराष्ट्र सहित समूचे देश में सोयाबीन का उत्पादन 20-25 प्रतिशत कम होने की संभावना है क्योंकि एक तो इसके बिजाई क्षेत्र में जबरदस्त गिरावट आ गई और दूसरे, बाढ़-वर्षा से भी फसल को भारी नुकसान हुआ है।
उत्पादन घटने से किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होने की उम्मीद थी मगर न तो व्यापारी एवं मिलर्स ऊंचे दाम पर इसे खरीदने को तैयार हैं और न ही सरकारी खरीद शुरू हो सकी है।
दरअसल पड़ोसी राज्य- मध्य प्रदेश में सोयाबीन के लिए भावान्तर भुगतान योजना लागू की गई है जिसका असर महाराष्ट्र की मंडियों पर देखा जा रहा है।
इस स्कीम के तहत मध्य प्रदेश के किसान यदि एमएसपी से नीचे दाम पर अपना उत्पाद बेचते हैं तो उन्हें एमएसपी एवं बाजार भाव के बीच के अंतर का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा।
इससे किसानों को परोक्ष रूप से एमएसपी का फायदा मिल जाएगा। महाराष्ट्र राज्य सहकारी विपणन महासंघ ने सरकार द्वारा सोयाबीन की खरीद के लिए अनुमति देने में विलम्ब करने पर असंतोष जताते हुए कहा है
कि राज्य के किसानों को औने-पौने दाम पर अपनी सोयाबीन का स्टॉक बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने 30 अक्टूबर से सोयाबीन का क्रय केन्द्र चालू होने तथा उसी दिन से किसानों का पंजीकरण आरंभ हो जाने की घोषणा की है।
