मक्का की बेहतर बिजाई से मोटे अनाजों के रकबे में सुधार

14-Jan-2025 05:45 PM

नई दिल्ली । हालांकि पिछले साल की तुलना में चालू रबी सीजन के दौरान ज्वार तथा जौ के रकबे में गिरावट आ गई लेकिन मक्का के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी होने से मोटे अनाजों का कुल उत्पादन क्षेत्र 53.37 लाख हेक्टेयर से 18 हजार हेक्टेयर सुधरकर 53.55 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो सामान्य औसत क्षेत्रफल 53.46 लाख हेक्टेयर से भी 9 हजार हेक्टेयर ज्यादा रहा। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष के मुकाबले चालू रबी सीजन के दौरान ज्वार का बिजाई क्षेत्र 25.46 लाख हेक्टेयर से घटकर 23.58 लाख हेक्टेयर तथा जौ का क्षेत्रफल 6.71 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 6.62 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया मगर मक्का का उत्पादन क्षेत्र 20.36 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 22.37 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। 

इसके अलावा बाजरा का रकबा 17 हजार हेक्टेयर से गिरकर 13 हजार हेक्टेयर रह गया जबकि रागी का बिजाई क्षेत्र 68.69 हजार हेक्टेयर पर स्थिर रहा।

उल्लेखनीय है कि ज्वार तथा रागी मुख्यतः खरीफ कालीन मोटे अनाज की फसल है जबकि रबी सीजन में इसकी खेती अत्यन्त सीमित क्षेत्रफल में होती है इस बार रबी सीजन में 16 हजार हेक्टेयर में स्मॉल मिलेट्स की बिजाई भी हुई है जबकि पिछले साल खेती नहीं हुई थी। 

यद्यपि मक्का के उत्पादन क्षेत्र में पिछले साल के मुकाबले इस बार 2 लाख हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन बढ़ती मांग एवं ऊंची कीमत को देखते हुए उसे पर्याप्त नहीं माना जा रहा है।

मक्का का औसत मंडी भाव सरकारी समर्थन मूल्य 2225 रुपए प्रति क्विंटल की तुलना में 500-600 रुपए प्रति क्विंटल तक ऊंचा चल रहा है और पशु आहार, पॉल्ट्री फीड तथा स्टार्च निर्माण उद्योग के साथ-साथ एथनॉल उत्पादन के लिए भी इसकी जोरदार मांग बनी हुई है।

उम्मीद की जा रही थी कि मक्का के बिजाई क्षेत्र में पिछले साल के मुकाबले इस बार 5-6 लाख हेक्टेयर तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है मगर यह वृद्धि 2 लाख हेक्टेयर पर ही अटक गई है। मक्का का सामान्य औसत क्षेत्रफल इस बार 22.11 लाख हेक्टेयर आंका गया है।