मक्का से उत्पादित इथेनॉल और DDGS आंकड़े और इसको बाज़ारों पर असर
05-May-2025 12:01 PM
मक्का से उत्पादित इथेनॉल और DDGS आंकड़े और इसको बाज़ारों पर असर
★ 2021-22 तक भारत का मक्का उत्पादन 320-330 लाख टन रहा, जबकि घरेलू मांग लगभग 280 लाख टन थी, निर्यात 37 लाख टन तक पहुंचा।
★ घरेलू मांग में 200 लाख टन पशु आहार उद्योग से जुड़ी रही, जिसमें पोल्ट्री के लिए 150 और मवेशियों के लिए 50 लाख टन मक्का की खपत हुई।
★ 50 लाख टन मक्का औद्योगिक स्टार्च उत्पादन, 20 लाख टन मानव उपभोग और 10 लाख टन बीज व अन्य उपयोगों में इस्तेमाल हुआ।
★ 2022-23 में 8 लाख टन मक्का से 31.51 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादित किया गया।
★ 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 286.54 करोड़ लीटर हो गया, जिसमें 75 लाख टन मक्का की खपत हुई।
★ 2024-25 में तेल कंपनियों ने 484.35 करोड़ लीटर मक्का एथेनॉल की आपूर्ति के लिए अनुबंध किया है, जिसके लिए 127 लाख टन से अधिक मक्का की जरूरत होगी।
★ साल दर साल इथेनॉल में मक्का का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
★ एथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का की बढ़ती मांग से देश में मक्का की आपूर्ति प्रभावित हुई और कीमतों में तेज़ उछाल आया।
★ मक्का की औसत कीमतें रुपए 14,000-15,000 प्रति टन से बढ़कर अब रुपए 24,000-25,000 प्रति टन पहुंची।
★ मक्का से तैयार डीडीजीएस में 28-30% प्रोटीन होता है, जबकि चावल से तैयार डीडीजीएस में यह 45% तक होता है
★ पशु आहार उद्योग में डीडीजीएस, सोयाबीन, सरसों, कपास बीज, मूंगफली या चावल भूसी से बने डीओसी की तुलना में सस्ती प्रोटीन स्रोत बनकर उभरा है
मक्का डीडीजीएस की कीमत रुपए 16,000-17,000 और चावल डीडीजीएस की कीमत रुपए 18,000-19,000 प्रति टन है, जबकि सोयाबीन डीओसी रुपए 31,000-32,000 प्रति टन है।
★ 127 लाख टन मक्का से 42 लाख टन डीडीजीएस और 40 लाख टन चावल से 10 लाख टन डीडीजीएस उत्पादित होगा।
★ एथेनॉल उत्पादन से कुल 50 लाख टन से अधिक डीडीजीएस तैयार होगा, जिससे सोयाबीन डीओसी की कीमतों में लगभग 30% की गिरावट आई है
★ भारत हर वर्ष 5 लाख टन मक्का 15% शुल्क पर आयात करने की अनुमति देता है, जबकि इससे अधिक पर 50% शुल्क लगता है।
★ अप्रैल-जनवरी 2024-25 के दौरान भारत ने 9.4 लाख टन मक्का आयात किया, जिसमें से 5.1 लाख टन म्यांमार और 3.9 लाख टन यूक्रेन से आया।
बढ़ती डिमांड से कीमतों में आये उछाल से पिछले 2 सालों से मक्का उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई।
★ आई-ग्रेन इंडिया का मानना हैं कि बढ़ते उत्पादन, स्टॉक और अन्य उत्पादों से इथेनॉल बनाने की मंजूरी को देखते हुए मक्का की डिमांड में कमी आ सकती है जिससे कीमतों पर दवाब बन सकता है।
★ समय-समय पर मुनाफावसूली करते रहें।
