मिलेट्स के बिजाई क्षेत्र को बरकरार रखने की जरुरत

06-Nov-2024 01:08 PM

हैदराबाद। धान तथा कपास से अलग अन्य फसलों की खेती करने वाले किसानों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उन्हें न तो संस्थागत ऋण मिल रहा है और न ही लाभप्रद मूल्य प्राप्त हो रहा है। इससे खासकर मिलेट्स की खेती के प्रति उसके उत्साह-आकर्षण में गिरावट आ सकती है और इसका बिजाई क्षेत्र तेजी से घट सकता है। सरकार को इसे बचाने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाना चाहिए। शुष्क भूमि में फसलों की खेती करने वाले उत्पादकों को हर संभव सुविधा उपलब्ध करवाए जाने की आवश्यकता है।

एक किसान संगठन के अनुसार तेलंगाना में मिलेट्स के परम्परागत उत्पादक क्षेत्र - जहीराबाद में बिजाई क्षेत्र लगातार घटता जा रहा है क्योंकि सरकार वहां औद्योगिक जोन के लिए भूमि आवंटित कर रही है। संगठन के अनुसार धान के उत्पादकों को जब न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर 500 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस प्राप्त हो रहा है तब वे अन्य फसलों की खेती क्यों करना चाहेंगे। इसी तरह कपास की सरकारी खरीद होती है और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्राप्त हो जाता है। लेकिन मिलेट्स के लिए ऐसी सुविधा नहीं है। मिलेट्स की फसल जलवायु परिवर्तन के प्रति अवरोधक होती है इसलिए इसकी खेती को घटाने के बजाए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों के मुताबिक रासायनिक उर्वरकों एवं जल स्रोतों का इस्तमाल तेजी से बढ़ता जा रहा है। इससे जैव विविधता की सम्भावना कम होती जा रही है। मिलेट्स इस स्थिति को रोकने में सक्षम हैं। विशेषज्ञ मक्का के औद्योगिक उपयोग से हो रही वृद्धि से भी चिंतित हैं क्योंकि इससे मानवीय खाद्य उद्देश्य के लिए इसकी उपलब्धता घटने की आशंका है।