News Capsule/न्यूज कैप्सूल: मसूर वैश्विक बाजार
15-Jan-2026 02:16 PM
News Capsule/न्यूज कैप्सूल: मसूर वैश्विक बाजार
★ कनाडा की मसूर की स्थिति काफी हद तक मटर बाजार जैसी ही है, फर्क सिर्फ इतना है कि यहां व्यापारिक चुनौती का मुख्य केंद्र भारत है।
★ मसूर के मूलभूत हालात इस साल काफी ढीले पड़े हैं। कनाडा में 2025 में मसूर का उत्पादन 33.6 लाख टन आंका गया है, जो पिछले साल से 38% अधिक है। कुल आपूर्ति बढ़कर लगभग 40 लाख टन के करीब पहुंच गई है, करीब 13 लाख टन की बढ़ोतरी के बाद।
★ वैश्विक स्तर पर भी मसूर उत्पादन में करीब 23% (15–16 लाख टन) की बढ़ोतरी का अनुमान है। इसमें कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्लैक सी क्षेत्र (रूस–कजाखस्तान) का सबसे बड़ा योगदान रहा है।
★ मांग पक्ष पर देखें तो कनाडा के मसूर निर्यात आंकड़े अभी बहुत कमजोर नहीं हैं।
★ कनाडियन ग्रेन कमीशन के अनुसार बल्क निर्यात 6.05 लाख टन (सप्ताह 20 तक) रहा, जो पिछले साल से 1% ज्यादा है। वहीं स्टैट्सकैन के कंटेनर समेत आंकड़ों में अगस्त–सितंबर के दौरान निर्यात 29% बढ़कर 3.01 लाख टन रहा।
★ भारत और यूएई को निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी, पाकिस्तान को भी शिपमेंट बढ़ा।
★ पूरे सीजन के लिए मसूर का निर्यात 21 लाख टन माना जा रहा है, जो पिछले साल से 13.5% अधिक है। इसके बावजूद भारी उत्पादन के कारण कनाडा का अंतिम स्टॉक करीब 15 लाख टन रहने का अनुमान है, जिससे स्टॉक-टू-यूज अनुपात 62% तक पहुंच सकता है।
★ ऊंचे स्टॉक के कारण खरीदार और निर्यातक ऊंचे दामों पर आगे के सौदे करने से बचेंगे।
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रेड मसूर राहत भरी बात
★ वैश्विक लाल मसूर बाजार को बहुत ज्यादा ओवर-सप्लाई नहीं माना जा रहा है। कनाडा में लाल मसूर उत्पादन केवल थोड़ा बढ़कर 18 लाख टन के आसपास रहा है। ऑस्ट्रेलिया में करीब 19 लाख टन अच्छी फसल, लेकिन तुर्की में उत्पादन काफी कम हुआ है।
★ मौजूदा कम निर्यात कीमतों के कारण बाजार संतुलित रहने की संभावना है और रेड मसूर के भाव में तेज गिरावट का जोखिम सीमित है।
हरी मसूर
★ हरी मसूर की स्थिति कहीं ज्यादा कमजोर है। अमेरिका और कनाडा में अच्छी फसल, साथ ही ब्लैक सी क्षेत्र से लगभग 5 लाख टन की अतिरिक्त आपूर्ति के कारण बाजार में भारी दबाव है।
★ कनाडा में हरी मसूर उत्पादन बढ़कर लगभग 17 लाख टन हो सकता है, जो पिछले साल करीब 7.5 लाख टन था। ऊपर से कनाडा से कंटेनर भाड़े महंगे होने के कारण प्रतिस्पर्धा और मुश्किल हो गई है।
★ अगर भारत की ओर से बड़ी मात्रा में खरीद नहीं आती, तो हरी मसूर का स्टॉक बहुत भारी हो जाएगा।
★ हरी मसूर के भाव कमजोर बने रहने की संभावना है और कीमतों में तेजी आना फिलहाल मुश्किल दिखता है।
★ भारत में मसूर बिजाई बढ़ी परन्तु आयात कमज़ोर रहा।
★ आयात पिछले वर्ष से घटने की आशंका, अच्छे उत्पादन को देख आपूर्ति ठीक रहेगी और बाजार मामूली बढ़त से साथ सिमित दायरे में चल सकते हैं।
