ओएमएसएस के तहत नई नीलामी में गेहूं की अच्छी बिक्री
15-Jan-2026 12:18 PM
नई दिल्ली। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा खुले बाजार बिक्री बाजार (ओएमएसएस) के तहत गेहूं की बिक्री के लिए ई-नीलामी की प्रक्रिया 14 जनवरी से पुनः आरंभ की गई जिसे दिसम्बर 2025 में स्थगित कर दी गई थी। इस नई नीलामी में मिलर्स-प्रोसेसर्स ने सरकारी गेहूं की खरीद में अच्छी दिलचस्पी दिखाई।
उल्लेखनीय है कि नवम्बर-दिसम्बर 2025 में आयोजित नीलामी के दौरान खाद्य निगम को कुल ऑफर के सापेक्ष केवल 36.40 प्रतिशत गेहूं बेचने में सफलता मिली थी लेकिन 14 जनवरी 2026 को आयोजित नीलामी में 92 प्रतिशत गेहूं की बिक्री करने में कामयाबी हासिल हो गई।
इस सफलता का एक खास कारण यह है कि इस बार गेहूं की बिक्री का ऑफर 2 लाख टन से घटाकर एक लाख टन नियत किया गया था जिसमें से लगभग 92 प्रतिशत यानी 92 हजार टन की बिक्री की गई। पंजाब, हरियाणा एवं आसाम सहित कुछ अन्य राज्यों में ऑफर के सापेक्ष गेहूं की सम्पूर्ण मात्रा की बिक्री हो गई। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि इन प्रांतों के फ्लोर मिलर्स-प्रोसेसर्स के पास गेहूं का सीमित स्टॉक मौजूद था।
नवम्बर-दिसम्बर 2025 की प्रत्येक नीलामी में 2-2 लाख टन गेहूं की बिक्री का ऑफर दिया गया था जबकि जनवरी 2026 की पहली नीलामी में ऑफर की मात्रा 50 प्रतिशत घटा दी गई।
समझा जाता है कि भारतीय खाद्य निगम इस नीलामी के जरिए मार्केट की स्थिति को जांचना-परखना चाहता था और इसके रिस्पांस के आधार पर आगे की रणनीति बनाने का प्लान बना सकता है।
देश के अधिकांश मार्केट में गेहूं की सीमित आयात हो रही है और कीमतों में भी तेजी मजबूती की सुग-बुगाहट देखी जा रही है। पंजाब-हरियाणा के मिलर्स / प्रोसेसर्स को परिवहन खर्च के अतिरिक्त भार से राहत मिल जाती है इसलिए वहां सरकारी गेहूं की अधिक खरीद होती है।
पंजाब की हालत तो यह रही कि वहां ऑफर से ज्यादा गेहूं की मांग देखी गई। एक फ्लोर मिलर के अनुसार पंजाब की मंडियों में गेहूं का स्टॉक उपलब्ध नहीं है
जबकि मांग बहुत अधिक है इसलिए खाद्य निगम को सिर्फ इसी राज्य के लिए एक लाख टन गेहूं की बिक्री का ऑफर नियत करना चाहिए। अन्य राज्यों के लिए अलग से ऑफर दिया जाना चाहिए।
