ऑयल मील का शिपमेंट बढ़ाने के लिए डीओआरबी के निर्यात की स्वीकृति आवश्यक
25-Dec-2024 11:10 AM
मुम्बई । सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष के शुरूआती आठ महीनों में यानी अप्रैल से नवम्बर 2024 के दौरान देश से सोयामील का निर्यात बढ़कर 12.06 लाख टन पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के शिपमेंट 9.37 लाख टन से काफी अधिक रहा।
इसका प्रमुख कारण चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ईरान तथा फ्रांस में इसकी जोरदार मांग निकलना रहा।
लेकिन अब वैश्विक बाजार में भारतीय सोयामील को कठिन चुनौती एवं सख्त प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि अर्जेन्टीना, ब्राजील एवं अमरीका में यह सस्ते दाम पर उपलब्ध है।
बांग्ला देश भारतीय रेपसीड मील का एक प्रमुख खरीदार रहा है मगर वहां आंतरिक उपद्रव एवं अनिश्चितता की स्थिति के कारण हाल के महीनों में इसकी मांग काफी घट गई है।
डिऑयल्ड राइस ब्रान (डीओआरबी) के शिपमेंट में अच्छी बढ़ोत्तरी हो सकती थी लेकिन दुर्भाग्य से इसके निर्यात पर एक साल से भी अधिक समय से प्रतिबंध लगा हुआ है।
एसोसिएशन लगातार सरकार से इस प्रतिबंध को हटाने की मांग करता आ रहा है क्योंकि निर्यात बंद होने तथा घरेलू मांग सीमित रहने से इसकी कीमतों में भारी गिरावट आ गई है जिससे निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
एसोसिएशन के अनुसार जुलाई 2023 से ही डीओआ बी का निर्यात स्थगित है जबकि वियतनाम, ताइवान एवं थाईलैंड सहित कई अन्य देशों में इसकी अच्छी मांग रहती है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार यदि इसके शिपमेंट की अनुमति दी गई तो भारत से ऑयल मील के निर्यात का प्रदर्शन बेहतर हो जाएगा।
प्रतिबंध लगने से पूर्व भारत से प्रति वर्ष लगभग 5 लाख टन राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन का निर्यात हो रहा था जिससे देश को अच्छी मात्रा में बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की प्राप्ति हो रही थी।
