पंजाब के फ्लोर मिलर्स- प्रोसेसर्स को सरकारी गेहूं की अधिक जरूरत
05-Feb-2026 09:14 PM
लुधियाना। केन्द्रीय पूल में खाद्यान्न का सर्वाधिक योगदान देने वाले राज्य- पंजाब की मंडियों में गेहूं की अत्यन्त सीमित आवक होने के कारण फ्लोर मिलर्स एवं प्रोसेसर्स की फसल की कटाई-तैयारी के बाद (अप्रैल-मई) में अपने विपणन योग्य गेहूं का अधिकांश स्टॉक सरकारी एजेंसियों को बेच देते हैं इसलिए बाद के महीनों में खुले बाजार में बिक्री के लिए वहां गेहूं की सीमित मात्रा ही उपलब्ध रहती है।
केन्द्रीय एजेंसी- भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत अपने स्टॉक से मिलर्स-प्रोसेसर्स को गेहूं बेचने के लिए साप्ताहिक आधार पर ई-नीलामी आयोजित की जा रही है।
इस गेहूं की खरीद में पंजाब के मिलर्स सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। 4 फरवरी को आयोजित नीलामी में पंजाब के लिए 26 हजार टन गेहूं का ऑफर निश्चित किया गया जिसमें से करीब 24,630 टन या 95 प्रतिशत की बिक्री हो गई।
इससे पूर्व के सप्ताहों में वहां ऑफर की लगभग सम्पूर्ण मात्रा की बिक्री हो रही थी जिससे वहां सरकारी गेहूं की मजबूत मांग का स्पष्ट संकेत मिलता है।
भारतीय खाद्य निगम के गेहूं का न्यूनतम आरक्षित मूल्य 2550 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित है जबकि पंजाब के मिलर्स-प्रोसेसर्स द्वारा 2700 रुपए प्रति क्विंटल तक के ऊंचे दाम पर इसकी खरीद की गई।
फ्लोर मिलर्स का कहना है कि इस बार दिल्ली में करीब 200 टन गेहूं की बिक्री नहीं हो सकी क्योंकि परिवहन की कठिनाई सामने आ गई।
यदि पंजाब में फ्लोर मिलों के परिसरसों के निकटवर्ती डिपो से ज्यादा से ज्यादा गेहूं की बिक्री का ऑफर दिया जाए तो उसकी खरीद में मिलर्स / प्रोसेसर्स का उत्साह बढ़ सकता है।
मिलर्स का दावा है कि पंजाब के बाजारों में भारतीय खाद्य निगम की प्रत्येक नीलामी में एक लाख टन तक गेहूं की खपत करने की क्षमता है लेकिन इसके लिए माहौल अनुकूल होना आवश्यक है।
