पीली मटर एवं मसूर के कम आयात से दलहनों के आयात खर्च में कमी

19-May-2025 08:28 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के त्वरित आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल 2025 में दलहनों के आयात पर होने वाला खर्च घटकर 31.44 करोड़ डॉलर पर अटक गया जो अप्रैल 2024 के आयात खर्च 41.10 करोड़ डॉलर से 23.5 प्रतिशत कम रहा।

दरअसल पीली मटर तथा मसूर के आयात की गति धीमी पड़ने से खर्च में कमी आई। पिछले वित्त वर्ष के दौरान दलहनों के आयात की मात्रा तथा उस पर खर्च होने वाली धनराशि तेजी से बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। रबी कालीन दलहनों की अच्छी आवक होने से मटर-मसूर का आयात प्रभावित हुआ। 

आई ग्रेन इंडिया के डायरेक्टर राहुल चौहान के मुताबिक पिछले साल अप्रैल में देश के अंदर 4.02 लाख टन पीली मटर का विशाल आयात हुआ था जो इस वर्ष अप्रैल में लुढ़ककर महज 29,308 टन रह गया पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा 31 मई को समाप्त होने वाली है।

इससे पूर्व 2023-24 के मुकाबले 2024-25 के वित्त वर्ष में इसका आयात 11.69 लाख टन से लगभग दोगुना बढ़कर 21.45 लाख टन पर पहुंच गया था। ज्ञात हो कि सरकार ने दिसम्बर 2023 में पीली मटर के आयात को शुल्क मुक्त किया था और उसके साथ ही देश में इसकी भारी आवक शुरू हो गई थी।

राहुल चौहान के अनुसार पीली मटर की भांति मसूर के आयात में भी जोरदार गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल 2024 में 64,583 टन मसूर का आयात हुआ था जो अप्रैल 2025 में घटकर 36,007 टन रह जाने का अनुमान है। दूसरी ओर तुवर एवं उड़द के आयात में कुछ बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।

इस अवधि में तुवर का आयात 61,978 टन से बढ़कर 98,162 टन तथा उड़द का आयात 55,435 टन से उछलकर 89,212 टन पर पहुंच जाने की संभावना है। तुवर एवं उड़द के शुल्क मुक्त आयात की अवधि 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दी गई है। राहुल चौहान के अनुसार कुल मिलाकर चालू वित्त वर्ष के दौरान दलहनों का आयात पिछले वित्त वर्ष से कम होने की संभावना है।