प्रतिकूल मौसम एवं रोगों के प्रकोप से सुपारी के उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका
06-Nov-2024 11:46 AM
मंगलोर। सुपारी के प्रमुख उत्पादक राज्य-कर्नाटक में विभिन्न कारणों से फसल को हुए भारी नुकसान के कारण उत्पादन में जोरदार गिरावट आने की आशंका है। आरंभिक संकेतों से पता चलता है कि सुपारी का उत्पादन वहां कुछ क्षेत्रों में 40-50 प्रतिशत तक घट सकता है। विश्लेषकों के अनुसार एक तो मौसम की हालत अनुकूल नहीं रह और दूसरे, कीड़ों-रोगों का प्रकोप बहुत बढ़ गया। इससे फसल को काफी क्षति हुई है।
आल इंडिया अरेका ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि फसल की वर्तमान स्थिति को देखते हुए लगता है इस बार सुपारी का उत्पादन पिछले साल से आधा ही हो सकेगा। गर्मी के महीनों में कुछ महत्वपूर्ण उत्पादक क्षेत्रों में तापमान बढ़कर 42 डिग्री सेल्सियस की ऊंचाई तक पहुंच गया था जिससे पेड़ों से कच्ची सुपारी नीचे गिरने लगी। इसके बाद मूसलाधार वर्षा होने, तापमान में गिरावट आने तथा आद्रता बढ़ने से सुपारी के बागानों में कीड़ों-रोगों के फैलाव की गति तेज हो गयी। मोटे अनुमान के अनुसार भीषण गर्मी, ऊंची आद्रता एवं रोगों के प्रकोप के कारण लगभग 40 प्रतिशत सुपारी के कच्चे दाने पेड़ों से गिरकर नीचे आ गये। फ्रूट रोट बिमारी से भी फसल को नुकसान हुआ। इसमें सुपारी के दाने को कीड़े खराब कर देते हैं।
दीपावली के बाद सफ़ेद सुपारी के नए स्टॉक की आवक शुरू हो गयी है और आगे इसकी आपूर्ति नियमित रूप से जारी रहेगी। उत्पादन में जोरदार गिरावट की आशंका को देखते हुए सुपारी के दाम में भारी तेजी आने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। अग्रणी सहकारी संस्था - कैम्पको द्वारा पिछले दिन सफ़ेद सुपारी की खरीद के लिए 330 रुपए प्रति किलो के ऊंचे मूल्य का ऑफर दिया गया जबकि प्राइवेट व्यापारियों का ऑफर 345 रुपए प्रति किलो दर्ज किया गया। पिछले साल की समानअवधि में इसका मूल्य 310-320 रुपए प्रति किलो चल रहा था। लाल सुपारी का भाव 510 रुपए प्रति किलो बताया जा रहा हा जो पिछले साल की समानअवधि में प्रचलित मूल्य 475-480 रुपए प्रति किलो से काफी ऊंचा है।
