रबी सीजन में सरसों एवं चना का क्षेत्रफल बढ़ने के आसार

28-Oct-2025 06:10 PM

नई दिल्ली। रबी सीजन की फसलों की बिजाई पहले ही आरंभ हो चुकी है और आगामी समय में इसकी रफ्तार तेज होने की उम्मीद है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की अच्छी बारिश होने से विभिन्न फसलों की बिजाई के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।

सरकार ने चना तथा सरसों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में अच्छी बढ़ोत्तरी कर दी है जबकि इसका थोक मंडी भाव मौजूदा समर्थन मूल्य से ऊंचा चल रहा है। 

चना के आयात पर 10 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगाया गया है। गत वर्ष की तुलना में इस बार ऑस्ट्रेलिया से चना का आयात बहुत कम हो रहा है। हालांकि चना के एक बेहतर विकल्प- पीली मटर का आयात अभी शुल्क मुक्त है और विदेशों से इसे अच्छी मात्रा में मंगाया जा रहा है।

लेकिन शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा 31 मार्च 2026 तक निर्धारित है। इसके बाद उसके आयात को रोकने का प्रयास किया जा सकता है। कुछ समीक्षकों का मानना है कि इस समय-सीमा से पूर्व ही सरकार मटर के आयात पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठा सकती है। 

सरसों का मामला इससे अलग है। विदेशों से इसका आयात नहीं होता है। इस बार सस्ते खाद्य तेलों के विशाल आयात का भी सरसों एवं इसके तेल की कीमतों पर कोई खास नकारात्मक असर नहीं देखा जा रहा है।

लम्बे समय से सरसों का दाम सरकारी समर्थन मूल्य से काफी ऊंचा चल रहा है जिससे संकेत मिलता है कि इसका पिछला उत्पादन उम्मीद से कम हुआ। 

इस वर्ष चना का पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 101 लाख हेक्टेयर नियत हुआ है और वास्तविक रकबा इससे ऊपर पहुंचने की उम्मीद है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 24 अक्टूबर तक चना का उत्पादन क्षेत्र सुधरकर 3.20 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 2.90 लाख हेक्टेयर से 30 हजार हेक्टेयर ज्यादा है।

इसी तरह सरसों का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 18.72 लाख हेक्टेयर से 1.06 लाख हेक्टेयर उछलकर इस बार 19.78 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।

इसका सामान्य औसत क्षेत्रफल 79.16 लाख हेक्टेयर आंका गया है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात, बंगाल एवं बिहार जैसे अग्रणी उत्पादक राज्यों में सरसों की अच्छी बिजाई होने की उम्मीद है।