साप्ताहिक समीक्षा- सोयाबीन
22-Nov-2025 08:02 PM
एमएसपी पर महाराष्ट्र में सोयाबीन की खरीद शुरू- राजस्थान में भी स्वीकृति मिली
नई दिल्ली। केन्द्र से स्वीकृति मिलने के बाद महाराष्ट्र में किसानों रजिस्ट्रेशन आरंभ हुआ और अब न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सोयाबीन की सरकारी खरीद भी शुरू हो चुकी है। इससे वहां सोयाबीन का प्लांट डिलीवरी मूल्य सुधरकर 4700-4800 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंव गया है।
खरीदी
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2025-26 के खरीफ मार्केटिंग सीजन के दौरान किसानों से एमएसपी पर 18,50,700 टन सोयाबीन खरीद की मंजूरी दी है। सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी 4892 रुपए प्रति क्विंटल से 436 रुपए बढ़ाकर 5328 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
एमपी
मध्य प्रदेश में इस बार भावान्तर भुगतान योजना लागू हुई है इसलिए सोयाबीन का प्लांट डिलीवरी मूल्य अपेक्षाकृत नीचे यानी 4600-4700 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। तीसरे सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त- राजस्थान में भी सोयाबीन की खरीद के लिए केन्द्र सरकार ने मंजूरी प्रदान कर दी है जिससे प्लांट डिलवरी मूल्य में कुछ सुधार आ सकता है।
प्लांट भाव
15-21 नवम्बर वाले सप्ताह के दौरान सोयाबीन के प्लांट डिलीवरी मूल्य में उतार-चढ़ाव देखा गया जिससे सोया रिफाइंड तेल का भाव मध्य प्रदेश में लगभग स्थिर रहा। लेकिन महाराष्ट्र में 1-2 रुपए प्रति किलो रिफाइंड तेल का भाव मध्य प्रदेश में लगभग स्थिर रहा लेकिन महाराष्ट्र में 1-2 रुपए प्रति किलो नरम पड़ गया।
मुम्बई / राजस्थान
इसका दाम कोटा में 20 रुपए बढ़कर 1280 रुपए प्रति 10 किलो पर पहुंचा मगर मुम्बई में 10 रुपए गिरकर 1250 रुपए एवं कांडला में 5 रुपए फिसलकर 1230 रुपए प्रति 10 किलो पर आ गया। हल्दिया में यह 1240 रुपए प्रति किलो पर स्थिर रहा। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड सोयाबीन तेल के दाम में कुछ तेजी दर्ज की गई। चीन ने अमरीका से सोयाबीन मंगाना शुरू कर दिया है मगर अभी आयात की गति धीमी है।
आवक
प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान सोयाबीन की आवक में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। इसी आवक 15 नवम्बर को 2.50 लाख बोरी थी जो 17 नवम्बर को उछलकर 8.20 लाख बोरी पर पहुंचने के बाद 18 नवम्बर को घटकर 7.70 लाख बोरी। 19 नवम्बर को गिरकर 7.10 लाख बोरी एवं 20 नवम्बर को लुढ़ककर 3 लाख बोरी रह गई।
सोया खल (डीओसी)
महाराष्ट्र में सोया डीओसी का कारोबार सीमित होने से कीमतों में 500 से 1200 रुपए प्रति टन तक की गिरावट आई जबकि कहीं-कहीं इसमें 500-800 रुपए प्रति टन का सुधार भी देखा गया।
