सोयाबीन की वजह से तिलहनों के उत्पादन में आई 17 लाख टन की गिरावट
26-Sep-2024 12:29 PM
नई दिल्ली । केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अंतिम अनुमान से पता चलता है कि 2023-24 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन के दौरान तिलहन फसलों का कुल घरेलू उत्पादन घटकर 396.69 लाख टन पर सिमट गया जो 2022-23 सीजन के उत्पादन 413.55 लाख टन से 16.86 लाख टन कम रहा।
हालांकि समीक्षाधीन अवधि के दौरान सरसों- रेपसीड की पैदावार 126.43 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 132.59 लाख टन पर पहुंची मगर सोयाबीन का उत्पादन 149.85 लाख टन से लुढ़ककर 130.62 लाख टन तथा मूंगफली का उत्पादन 102.87 लाख टन से गिरकर 101.80 लाख टन पर अटक गया।
देश में इन्हीं तीन तिलहन फसलों का उत्पादन 100 लाख टन से अधिक होता है जबकि तिल, अरंडी, सूरजमुखी, अलसी, नाइजरसीड तथा सैफ्लावर की पैदावार अपेक्षाकृत कम होती है।
कृषि मंत्रालय के मुताबिक 2023-24 सीजन के दौरान देश में 19.59 लाख टन अरंडी 8.47 लाख टन तिल, 1.73 लाख टन सूरजमुखी, 1.13 लाख टन अलसी, 50 हजार टन सैफ्लावर तथा 27 हजार टन नाइजरसीड का उत्पादन हुआ।
दरअसल पिछले साल खरीफ सीजन के दौरान मानसून की अनियमित वर्षा तथा अगस्त में पड़े भयंकर सूखे की वजह से खासकर सोयाबीन की फसल को काफी क्षति हुई थी
जबकि मूंगफली की फसल भी गुजरात में कमजोर पड़ गई। अगस्त के सूखे से महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा मध्य प्रदेश के कुछ भाग ज्यादा प्रभावित हुए थे। सितम्बर-अक्टूबर की बेमौसमी वर्षा से भी सोयाबीन की फसल को नुकसान हुआ था।
जहां तक वर्तमान खरीफ सीजन का सवाल है तो सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 123.85 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 125.11 लाख हेक्टेयर तथा मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 43.75 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 47.85 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
इस बार जुलाई-अगस्त के दौरान देश में मानसून की भारी बारिश भी हुई जिससे उत्पादन बेहतर होने के आसार हैं।
