दक्षिण भारत में बारिश-उत्तरी राज्यों में तापमान में गिरावट

05-Nov-2024 12:53 PM

नई दिल्ली  । उत्तर-पूर्व मानसून की सक्रियता तथा मन्नार की खाड़ी में उत्पन्न गहरे सर्कुलेशन के कारण दक्षिण भारत में पिछले कुछ दिनों के दौरान भारी बारिश हुई और इसका सिलसिला एक-दो दिन तक जारी रहने की संभावना है। वहीं दूसरी ओर उत्तरी भारत में मौसम शुष्क बना हुआ है और रात को तापमान में गिरावट आने लगी है।

तमिलनाडु तथा केरल में हुई वर्षा से खेतों में पानी भर गया है। हालांकि केरल में मसालों की खेती ज्यादा होती है जबकि दलहन, तिलहन एवं मोटे अनाजों सहित अन्य कृषि फसलों का उत्पादन बहुत कम या नगण्य होता है लेकिन तमिलनाडु में रबी सीजन के दौरान दलहन-तिलहन फसलों की बिजाई होती है। इन दोनों राज्यों में गेहूं का उत्पादन नहीं होता है और न ही सरसों, जौ तथा चना की खेती की जाती है। 

उपरोक्त रबी फसलों का उत्पादन देश के उत्तरी, मध्यवर्ती एवं पश्चिमी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर होता है। इसके प्रमुख उत्पादक राज्यों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, बंगाल एवं बिहार आदि शामिल हैं।

रबी कालीन फसलों की बिजाई आरंभ हो चुकी है और मौसम की हालत काफी हद तक अनुकूल बनी हुई है। दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य औसत से अधिक बारिश हुई जिससे खेतों की मिटटी में नमी का पर्याप्त अंश मौजूद है।

इसके अलावा अधिकांश जिंसों और खासकर गेहूं तथा चना का घरेलू बाजार भाव किसानों के लिए काफी आकर्षक स्तर पर बरकरार है।

इसके इसके फलस्वरूप दोनों फसलों के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है। सरसों का क्षेत्रफल गत वर्ष के आसपास ही रहने की संभावना है। मसूर, मटर तथा जौ के क्षेत्रफल में भी ज्यादा उतार-चढ़ाव आना मुश्किल लगता है।