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21-Oct-2026 03:45 PM
हैदराबाद। हालांकि उत्तर-पूर्व मानसून 16 अक्टूबर से ही दक्षिण भारत में सक्रिय है और वहां आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल एवं पांडीचेरी जैसे राज्यों में अच्छी वर्षा भी हुई है जिससे खरीफ फसलों को सूखे से कुछ राहत मिली है।
लेकिन कृषि विषेशज्ञों का कहना है कि दक्षिणी प्रायद्वीप में अभी और बारिश की आवश्यकता है। दरअसल दक्षिण पश्चिम मानसून के सीजन में उपरोक्त राज्यों में वर्षा सामान्य औसत से काफी कम हुई और तापमान काफी ऊंचा रहा जिससे खेतों की मिटटी में नमी गायब होने लगी। इससे खरीफ फसलों की बिजाई एवं प्रगति में बाधा पड़ी।
कर्नाटक तथा महाराष्ट्र के अधिकांश भाग को पहले ही सूखा ग्रस्त क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। इन दोनों प्रांतों में खासकर तुवर, गन्ना, कपास एवं सोयाबीन का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है।
सूखे की वजह से इन फसलों को काफी नुकसान होने की आशंका है। इतना ही नहीं बल्कि नमी के अभाव के कारण वहां रबी फसलों की बिजाई में भी काफी देर होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
दक्षिणी राज्यों में हाल की बारिश से स्थिति में कुछ सुधार हुआ है मगर महाराष्ट्र में सूखे की हालत चिंताजनक बनी हुई है। उत्तरी भारत का परिदृश्य अपेक्षाकृत बेहतर है और यहां रबी फसलों की बिजाई सही समय पर आरंभ हो चुकी है।