दलहनों के उत्पादन में कमी की आशंका से आयात जारी रहने की संभावना

22-Nov-2025 12:11 PM

नई दिल्ली। बेशक रबी कालीन दलहन फसलों की बिजाई में अच्छी प्रगति देखी जा रही है मगर इसके बेहतर उत्पादन के लिए आगामी महीनों के दौरान मौसम का अनुकूल होना आवश्यक है।

खरीफ कालीन दलहन फसलों की हालत उत्साहवर्धक नहीं रही। हालांकि कुल मिलाकर उसका बिजाई क्षेत्र लगभग सामान्य रहा मगर प्राकृतिक आपदाओं से फसल को क्षति हुई। इससे खासकर तुवर, उड़द एवं मूंग का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि 2024-25 के खरीफ सीजन के दौरान 36.24 लाख टन तुवर, 13.41 लाख टन उड़द एवं 17.74 लाख टन मूंग सहित कुल 77.33 लाख टन दलहनों का उत्पादन हुआ जो 2023-24 के खरीफ उत्पादन 69.74 लाख टन से कुछ अधिक रहा।

इसके मुकाबले 2025-26 के खरीफ सीजन में तुवर का उत्पादन घटकर 30-32 लाख टन पर सिमट जाने की संभावना है।

उड़द एवं मूंग का उत्पादन भी घटने की संभावना है लेकिन इसकी खेती रबी तथा जायद सीजन में भी होती है इसलिए सकल उत्पादन का अनुमान लगाना अभी कठिन है। रबी कालीन उड़द एवं मूंग की बिजाई पहले ही आरंभ हो चुकी है जिस पर सबका ध्यान केन्द्रित है। 

सरकार ने पीली मटर पर 30 प्रतिशत एवं देसी चना तथा मसूर पर 10-10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा रखा है जबकि तुवर एवं उड़द का आयात अभी तक शुल्क मुक्त है।

निर्यातक देशों में कयास लगाया जा रहा है कि भारत सरकार मसूर पर आयात शुल्क को बढ़ाकर 30  प्रतिशत नियत कर सकती है।

वैश्विक बाजार में विभिन्न दलहनों का भाव घटकर काफी नीचे आ गया है क्योंकि शानदार उत्पादन के कारण निर्यातक देशों के बीच प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है।

सभी देशों की नजर भारत पर केन्द्रित है जो दलहनों का सबसे बड़ा उत्पादक एवं उपभोक्ता के साथ सबसे प्रमुख आयातक देश भी बना हुआ है।

घरेलू उत्पादन कमजोर होने तथा वैश्विक बाजार भाव नरम रहने से भारत में मूंग को छोड़कर अन्य प्रमुख दलहनों का आयात निरन्तर जारी रहेगा।

रबी दलहनों के उत्पादन की तस्वीर स्पष्ट होने के बाद ही विदेशी आयात का आंकलन संभव हो पाएगा। नया माल अगले साल से आना शुरू होगा।