धान की ऊंची उपज दर वाली जीनोम एडिटेड किस्में जारी

05-May-2025 12:47 PM

नई दिल्ली। एक महत्वपूर्ण क्रम के तहत केन्द्र सरकार ने दुनिया में पहली बार जीनोम सम्पादित (एडिटेड) धान की दो ऐसी नई किस्में जारी की हैं जिसे पानी की कम आवश्यकता पड़ती है लेकिन फिर भी जिसकी औसत उपज दर ऊंची होती है।

कमला- डीआरआर धान- 100 तथा पूसा डीएसटी राइस-1 नामक धान की किस्मों को व्यावसायिक खेती के लिए उपलब्ध करवाने का फैसला किया गया है।

इसकी खेती से ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में कटौती करने में सहायता मिलेगी। धान की इन दो नई किस्मों की औसत उपज दर वर्तमान समय में प्रचलित किस्मों की तुलना में 30 प्रतिशत तक ऊंची रहने की उम्मीद है जबकि ये किस्में सामान्य प्रजातियों के मुकाबले पकने में 15-20 दिन का कम समय ले सकती है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्री के अनुसार धान की इन दोनों नई किस्मों को सिंचाई के लिए पानी की कम आवश्यकता पड़ेगी और पर्यावरण संरक्षण में भी सहायता मिलेगी।

लेकिन किसानों तक पहुंचने में इसे कम से कम 4-5 वर्षों का समय लग सकता है क्योंकि उससे पूर्व बीडर का सामान्य चक्र पूरा करना होगा, फाउंडेशन बीज का निर्माण किया जाएगा और अंत में प्रमाणित या सर्टिफाइड बीज का बड़े पैमाने पर उत्पादन आरंभ किया जाएगा।

इन किस्मों का प्रमाणित बीज भारतीय किसानों को जल्दी से जल्दी उपलब्ध करवाने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है ताकि उसे उच्च उपज दर का लाभ प्राप्त हो सके।

धान की ये दोनों किस्में जीनोम एडिटेड तो है मगर जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) श्रेणी की नहीं हैं। जीएम किस्मों में बाहरी जीन का इस्तेमाल होता है जबकि जीनोम एडिटेड किस्मों में इसका उपयोग नहीं किया जाता है बल्कि पहले से मौजूद जीन को ही व्यवस्थित किया जाता है। 

केन्द्र सरकार ने कृषि फसलों में जीनोम एडिटिंग के लिए 2023-24 के केन्द्रीय आम बजट में 500 करोड़ रुपए का आवंटन किया था। धान के अलावा करीब 24 अन्य कृषि फसलों तथा 15 बागवानी फसलों के लिए जीनोम एडिटिंग की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में जारी है। यह एक नया क्षेत्र है और इससे देश में कृषि उत्पादन बढ़ाने में अच्छी सहायता मिलने की उम्मीद है।