धान और गेहूं की खेती पर किसानों का ज्यादा जोर होने से अन्य फसलों का उत्पादन कम
12-May-2025 05:24 PM
नई दिल्ली। दलहनों और खाद्य तेलों के विशाल आयात तथा इस पर होने वाले भारी-भरकम खर्च से चिंतित केन्द्र सरकार दलहनों-तिलहनों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने का हर संभव प्रयास कर रही है और इसके लिए आगामी खरीफ सीजन के दौरान धान के उत्पादन क्षेत्र में 50 लाख हेक्टेयर की कटौती करने उसमें दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती करने का प्लान बना रही है।
लेकिन यह काम आसान नहीं है क्योंकि भारतीय किसान धान की खेती से पूरी तरह चिपके हुए हैं और उसे इसकी खेती में कटौती करने के लिए राजी करना बहुत मुश्किल है।
दूसरी तरफ सरकार को उम्मीद है कि यदि धान का रकबा 50 लाख हेक्टेयर घट गया तो उस पर 2000 किलो प्रति हेक्टेयर की औसत उपज दर के साथ 100 लाख टन दलहन-तिलहन का अतिरिक्त उत्पादन हो सकता है। इससे दलहनों एवं खाद्य तेलों का आयात घटाने में सहायता मिलेगी।
दरअसल केन्द्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से प्रतिवर्ष धान की विशाल खरीद करती है। यह एक तरह से एमएसपी की वैधानिक गारंटी और सरकार की विवशता है क्योंकि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार को खाद्यान्न के विशाल स्टॉक की जरूरत पड़ती है। किसानों को पता है कि उसका धान एमएसपी पर अवश्य खरीदा जाएगा।
एमएसपी में नियमित रूप से बढ़ोत्तरी हो रही है जिससे इसकी खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण बढ़ता जा रहा है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उड़ीसा, तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में अत्यन्त विशाल क्षेत्रफल में धान की खेती होती है। धान संभवतः एकमात्र ऐसा कृषि उत्पाद है जिसकी खेती देश के सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों में होती है।
हालांकि पिछले एक दशक के दौरान दलहन-तिलहन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भी अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है और इसलिए उत्पादन में कुछ सुधार आया है लेकिन इसकी सरकारी खरीद में समस्या बनी रहती है।
अधिकांश किसानों को खुले बाजार भाव पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश होना पड़ता है जिसमें अक्सर उतार-चढ़ाव आता रहता है। एमएसपी पर सरकारी खरीद सीमित होती है और ऊंचा बाजार भाव में संदेह रहता है।
सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर तुवर, उड़द एवं मसूर के 100 प्रतिशत भाग की खरीद करने की गारंटी दी है मगर अन्य दलहनों का बाजार अनिश्चित छोड़ दिया है।
तिलहन फसलों की खरीद पिछले खरीफ और रबी सीजन में बढ़ाई गई लेकिन असंख्य किसानों को एमएसपी से नीचे दाम पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
ऐसी हालत में वे धान की खेती छोड़कर दलहन-तिलहन की खेती को प्राथमिकता नहीं देना चाहेंगे। सरकार को उसके लिए कोई बड़ा प्रोत्साहन देना पड़ेगा।
