उत्तर प्रदेश में गन्ना की कम आपूर्ति होने से चीनी का उत्पादन घटा
05-Feb-2026 01:44 PM
लखनऊ। देश के सबसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य- उत्तर प्रदेश में चालू मार्केटिंग सीजन के दौरान पहली बार जनवरी 2026 में चीनी के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई। वहां गन्ना की क्रशिंग की गति धीमी चल रही है और कुछ इकाइयों को समुचित मात्रा में कच्चा माल भी हासिल नहीं हो रहा है।
हालत यह है कि उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन की सबसे बड़ी कम्पनी की एक इकाई को गन्ना के अभाव में 27 जनवरी 2026 को बंद कर देना पड़ा।
उत्तर प्रदेश में इस बार किसान गन्ना की औसत उपज दर में भारी गिरावट आने की शिकायत कर रहे हैं। कुछ इलाकों में पुरानी फसल के गन्ना की उत्पादकता में 30 प्रतिशत तक की गिरावट आई है जबकि नई फसल की उपज दर 10 प्रतिशत तक घट गई है।
यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर का कहना है कि चालू मार्केटिंग सीजन के दौरान उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन पूर्व अनुमान से कम हो सकता है
लेकिन फिर भी पिछले मार्केटिंग सीजन के उत्पादन के आसपास पहुंच जाएगा। उत्तर प्रदेश में पहले 2024-25 सीजन के मुकाबले 2025-26 सीजन के दौरान चीनी के उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी होने की संभावना व्यक्त की गई थी क्योंकि वहां गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर में सुधार आने के संकेत मिल रहे थे।
एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि फिलहाल राज्य में चीनी के उत्पादन के बारे में निश्चित अनुमान लगाना कठिन है और इसलिए इस बात का इंतजार करना पड़ेगा कि आगामी समय में गन्ना की फसल कैसी रहती है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फसल की उपज दर में कमी आने की सूचना मिल रही है। शामली जिले में कहीं-कहीं रातून गन्ना की उत्पादकता पिछले सीजन के 55 क्विंटल प्रति बीघा से घटकर इस बार 48 क्विंटल रह गई है।
उद्योग समीक्षकों के मुताबिक रातून गन्ना की औसत उपज दर में 15-20 प्रतिशत की गिरावट आने की संभावना है लेकिन कुल मिलाकर उत्पादकता में गिरावट का अनुमान लगाना अभी कठिन है।
एक प्राइवेट फर्म द्वारा उत्तर प्रदेश की 52 चीनी मिलों पर किए गए सर्वेक्षण से पता चला कि 67 प्रतिशत इकाइयां चीनी उत्पादन के लिए सी-हैवी शीरा का और केवल 33 प्रतिशत मिलें बी-हैवी शिरा का इस्तेमाल कर रही है।
