उत्तरी राज्यों में बिजाई घटने से कपास का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से पीछे
20-Jul-2024 05:26 PM
नई दिल्ली। उत्तरी क्षेत्र के तीनो प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में इस बार रोगो कीड़ो के डर से किसानो ने इस महत्वपूर्ण औद्योगिक फसल का रकबा घटा दिया। संयुक्त उत्पादन क्षेत्र में करीब 6 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई है और यह पिछले साल की 16 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 10.23 लाख हेक्टेयर के करीब रह गया। उधर सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य-गुजरात में भी कपास के बिजाई क्षेत्र में कुछ गिरावट आने की संभावना है। वैसे महाराष्ट्र एवं तेलंगाना जैसे प्रांतो में रकबा बढ़ने के संकेत मिल रहे है। मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु में कपास के बिजाई क्षेत्र में कुछ बदलाव होने की उम्मीद है।
अखिल भारतीय स्तर पर कपास उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 105.66 लाख हेक्टेयर से 3.61 लाख हेक्टेयर घटकर इस बार 102.05 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया। सरकार ने कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य पिछले साल के मुकाबले 7.6 प्रतिशत बढ़ाकर इस बार 7121 रूपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है जो मीडियम रेशे वाली किस्म के लिए है।
पिछले साल के मुकाबले चालू खरीफ सीजन के दौरान कपास का उत्पादन क्षेत्र राजस्थान में 8.35 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 4.75 लाख हेक्टेयर, हरियाणा में 5.75 लाख हेक्टेयर से घटकर 4.50 लाख हेक्टेयर तथा पंजाब में 1.75 लाख हेक्टेयर से गिरकर 99 हजार हेक्टेयर रह गया है। इन राज्यों में कपास की अथैति बिजाई होती है। पंजाब में अस्सी तथा नब्बे के दशक में 7-8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बिजाई होती थी जबकि इस बार रकबा फघटकर एक लाख हेक्टेयर से भी नीचे आ गया है। इस राज्य में पिछले बार वर्षो से कपास के क्षेत्रफल में गिरावट का माहौल देखा जा रहा है।
