वनस्पति तेलों के 31 प्रतिशत वैश्विक उत्पादन का उपयोग जैव ईंधन निर्माण में होने का अनुमान

20-Jul-2024 03:15 PM

नई दिल्ली। इंडियन वैजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईवीपीए) द्वारा 18-19 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित तीसरे ग्लोबल राउंड टेबल कांफ्रेंस में जो आंकड़े सामने आए उससे पता चलता है कि वर्ष 2024 के दौरान विश्व स्तर पर चार प्रमुख खाद्य तेल-पाम तेल, सोयाबीन तेल, रेपसीड-कैनोला तेल, तथा सूरजमुखी तेल का संयुक्त उत्पादन 2020.50 लाख टन हो सकता है। इसमें से 626.70 लाख टन या 31.02 प्रतिशत का उपयोग जैव ईंधन निर्माण में तथा शेष 1393.80 लाख टन या 68.98 प्रतिशत का इस्तेमाल प्रत्यक्ष खाद्य उद्देश्य में होने की उम्मीद है। 

प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक चालू वर्ष के दौरान विश्व स्तर पर 834.80 लाख टन पाम तेल, 644 लाख टन सोयाबीन तेल, 307.70 लाख टन रेपसीड/कैनोला तेल तथा 234 लाख टन सूरजमुखी तेल का उत्पादन होने का अनुमान है। जैव ईंधन निर्माण में पाम तेल का उपयोग 213.40 लाख टन या 25.56 प्रतिशत, सोयाबीन तेल का उपयोग 146.0 लाख टन या 22.69 प्रतिशत, रेपसीड/कैनोला तेल का उपयोग 88.80 लाख टन या 28.86 प्रतिशत तथा सूरजमुखी तेल का उपयोग 7.60 लाख टन या 3.25 प्रतिशत होने के आसार है। 

उइसके बाद खाद्य उद्देश्य के लिए 621.40 लाख टन (74.44 प्रतिशत) पाम तेल, 497.90 लाख टन  (77.31 प्रतिशत) सोयाबीन तेल, 218.90 लाख टन (71.14 प्रतिशत) रेपसीड/कैनोला तेल तथा 226.40 लाख टन (96.75 प्रतिशत) सूरजमुखी तेल का स्टॉक उपलब्ध रहेगा। संक्षेप में कहा जाये तो वर्ष 2024 में लगभग 14 करोड़ टन खाद्य तेल का स्टॉक प्रत्यक्ष मानवीय खाद्य उद्देश्य के लिए मौजूद रहेगा जबकि लगभग 6.27 करोड़ टन का इस्तेमाल जैव ईंधन निर्माण में किया जा सकता है। 

पाम तेल के प्रमुख उत्पादक देशो में इंडोनेशिया, मलेशिया एवं थाईलैंड शामिल है जबकि ब्राजील, अमरीका तथा अर्जेंटीना सोयाबीन तेल के शीर्ष उत्पादक देश है। रूस, यूक्रेन, अर्जेंटीना एवं रोमानिया में सूरजमुखी तेल का तथा कनाडा में कैनोला तेल का सर्वाधिक उत्पादन होता है।