10 हजार करोड़ रुपए की राशि के साथ राष्ट्रीय तिलहन मिशन की शुरुआत को मंजूरी

04-Oct-2024 12:49 PM

नई दिल्ली। आर्थिक मामलों की केंद्रीय कैबिनेट समिति ने 3 अक्टूबर की अपनी बैठक में कुछ महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान कर दी। कृषि मंत्रालय ने ऐसी 18 स्कीम को समानीकृत करते हुए उसे दो संवर्ग में शामिल किया गया। ये सभी योजनाएं केंद्र द्वारा प्रायोजित हैं। इसके लिए 1,01,321 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गयी। इसके अलावा कैबिनेट समिति ने 10,103 करोड़ रुपए की राशि के साथ राष्ट्रीय तिलहन मिशन को आरम्भ करने की मंजूरी भी दे दी। लम्बे समय से इसकी चर्चा हो रही थी जिसे अब सरकार की हरी झंडी मिल गयी है।

दो मूल का आधारभूत संवर्ग - प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना तथा कृषि उन्नति  योजना में उन 18 स्कीमों को समाहित कर दिया गया है। इससे राज्यों को धन का आवंटन करने में और अधिक लचीलापन आएगा और एक खंड (अवयय) से दूसरे खंड में धनराशी (फण्ड) के पुनरावंटन का रास्ता साफ़ हो जाएगा जो उसकी जरुरत पर आधारित होगा।

इस दोनों संवर्ग की योजनाओं के लिए कुल 1,01,321 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया गया है जिसमें केंद्र सरकार का योगदान 69,088.98 करोड़ रुपए और राज्य सरकारों का योगदान 32,232.63 करोड़ रुपए का निश्चित किया गया है।

जहां तक राष्ट्रीय तिलहन मिशन का सवाल है तो इसे सात वर्षों के दौरान लागू (क्रियान्वित) किया जाएगा जिसकी अवधि वित्त वर्ष 2024-25 से 2030-31 के बीच होगी। इसका उद्देश्य तिलहन फसलों का घरेलू उत्पादन 2022-23 सीजन के 390 लाख टन से बढ़ाकर 2030-31 तक 697 लाख टन पर पहुंचाना है। इसके तहत तिलहन फसलों की औसत उत्पादकता 1353 किलो प्रति हेक्टेयर के वर्तमान स्तर से बढ़ाकर अगले सात वर्षों में 2112 किलो प्रति हेक्टेयर पर पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। इसी तरह स्वदेशी स्रोतों से खाद्य तेलों का उत्पादन समीक्षाधीन अवधि में 127 लाख टन से बढ़ाकर 202 लाख टन तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।

इस मिशन के माध्यम से देश में 40 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि में तिलहन फसलों की खेती शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत धान तथा आलू की फसल की कटाई के बाद जो खेत खाली होंगे उसमें तिलहन फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके साथ-साथ अंतर्फसलीय कृषि पद्धति को बढ़ावा दिया जाएगा जिससे एक ही खेत में एक ही साथ अन्य फसलों के साथ तिलहनों की बिजाई भी संभव हो सकेगी। फसल विविधिकरण योजना पर भी जोर दिया जाएगा।