20 से 30 लाख टन तक गेहूं के आयात की पड़ सकती है आवश्यकता

19-Sep-2024 03:51 PM

मुम्बई । एक भूतपूर्व केन्द्रीय कृषि सचिव ने कहा है कि घरेलू प्रभाग में आपूर्ति- उपलब्धता की स्थिति को सुगम बनाने तथा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए देश में 20 से 30 लाख टन तक गेहूं के आयात की आवश्यकता पड़ सकती है।

कीमतों में तेजी आने के बावजूद सरकार ने अब तक गेहूं के आयात शुल्क को क्यों नहीं हटाया है यह समझ से परे है। वे स्वयं इस संबंध में सरकार को कई बार लिख चुके हैं।

अन्य महत्वपूर्ण कृषि एवं खाद्य जिंसों का दाम भी इसकी सहानुभूति में ऊंचा एवं तेज चल रहा है। गेहूं के दाम में हुई बढ़ोत्तरी का प्रभाव मक्का तथा चावल सहित अन्य खाद्य उत्पादों पर भी पड़ रहा है। 

पूर्व कृषि सचिव के मुताबिक वर्तमान समय में गेहूं का भाव दिल्ली में 2840 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास तथा राजस्थान की बेंचमार्क कोटा मंडी में 2600-2650 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है।

उन्होंने सरकार को गेहूं उत्पादन अनुमान पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि यह वास्तविकता से करीब 50 लाख टन ज्यादा है।

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों पर भरोसा किया जाए तो गेहूं एवं चावल में महंगाई की दर दो अंकों में नहीं होनी चाहिए।

इसका मतलब यह हुआ कि या तो इस कार्यालय की खपत का अनुमान कम करके आंका गया है या फिर कृषि मंत्रालय का उत्पादन अनुमान हकीकत से बढ़ा है।  

केन्द्र सरकार ने 2023-24 सीजन के दौरान देश में 1129 लाख टन गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन की संभावना व्यक्त की है जबकि उद्योग-व्यापार क्षेत्र का अनुमान 1040 लाख टन से कम का ही है।

सरकारी गोदामों में गेहूं का स्टॉक घट रहा है। सरकार ने पीडीएस के तहत 35 लाख टन गेहूं का अतिरिक्त स्टॉक छोड़ने का निर्णय लिया है जिससे 20 करोड़ लोगों को फायदा होगा।