आपूर्ति की स्थिति बेहतर होने से दलहन बाजार में स्थिरता रहने की संभावना
22-Dec-2025 04:06 PM
नई दिल्ली। घरेलू प्रभाग में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति बेहतर होने तथा विदेशों से सस्ते माल का आयात नियमित रूप से जारी रहने के कारण दाल-दलहन का भाव एक निश्चित सीमा में लगभग स्थिर बना हुआ है।
रबी कालीन दलहन फसलों के बिजाई क्षेत्र में कुछ बढ़ोत्तरी हुई है और सरकार भी 20 लाख टन दलहनों का बफर स्टॉक बनाने की दिशा में सक्रिय है। निर्यातक देशों में दलहनों का भाव नरम चल रहा है। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, म्यांमार, रूस तथा अफ्रीकी देशों में दलहनों के शानदार उत्पादन के संकेत मिल रहे हैं।
उपभोक्ता मामले विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उपरोक्त कारणों से आगामी महीनों में दलहन बाजार काफी हद तक स्थिर रह सकता है।
रबी कालीन दलहन फसलों की हालत अच्छी नजर आ रही है जिससे खासकर चना और मसूर का बेहतर उत्पादन हो सकता है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार दलहनों की कीमतों में अगले कुछ महीनों तक जोरदार तेजी आने की उम्मीद नहीं है क्योंकि बाजार पर दबाव बनाये रखने के लिए तमाम परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।
केन्द्रीय एजेंसियां किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीफ कालीन दलहनों-तुवर, उड़द एवं मूंग की खरीद कर रही हैं और आवश्यकता पड़ने पर रबी कालीन दलहनों की खरीद भी की जाएगी।
रबी कालीन दलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष की तुलना में इस बार 14.5 प्रतिशत बढ़कर 134 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है।
प्राइवेट व्यापारियों / दाल मिलर्स के पास दलहनों का अच्छा खासा स्टॉक मौजूद है जो उसने खरीफ उत्पादन की खरीद तथा विदेशों से आयात के जरिए बनाया है। इसके फलस्वरूप घरेलू बाजार में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी हुई है।
फरवरी 2025 से ही दाल-दलहनों में महंगाई की दर ऋणात्मक बनी हुई है। ज्ञात अगस्त 2024 में यह 113 प्रतिशत के शीर्ष स्तर पर पहुंची थी जो नवम्बर 2025 तक आते-आते घटकर 15.86 प्रतिशत रह गई।
आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति में सुधार आने के कारण पिछले 10 महीनों से दलहनों की महंगाई दर में गिरावट का माहौल बना हुआ है।
इस बीच सरकार ने म्यांमार, मोजाम्बिक एवं मलावी जैसे देशों से तुवर एवं उड़द के शुल्क मुक्त आयात के समझौते की अवधि को अगले पांच वर्ष के लिए बढ़ाने का संकेत दिया है।
