आयात शुल्क में बढ़ोत्तरी होने से खाद्य तेलों का भाव उछलने की संभावना

01-Oct-2024 06:54 PM

मुम्बई । केन्द्र सरकार ने सोयाबीन का बाजार भाव ऊंचा उठाने के उद्देश्य से एक तरफ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं तेलंगाना में किसानों से 4892 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर इस महत्वपूर्ण तिलहन की खरीद करने का निर्णय लिया तो दूसरी ओर ऑयल पाम, सोयाबीन तथा सूरजमुखी के क्रूड एवं रिफाइंड खाद्य तेलों पर बुनियादी आयात शुल्क में 20 प्रतिशत बिंदु की भारी बढ़ोत्तरी की घोषणा भी कर दी।

सरकार के निर्णय से सोयाबीन के थोक मंडी भाव में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई और यह बढ़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य के करीब और कहीं-कहीं उससे ऊपर पहुंच गया है लेकिन साथ ही साथ खाद्य तेलों के दाम में भी आगे बेतहाशा वृद्धि होने की आशंका है जिससे आम उपभोक्ताओं की कठिनाई काफी बढ़ जाएगी। 

एक अग्रणी उद्योग समीक्षक के अनुसार आमतौर पर भारत में शुल्क कटौती के बाद खाद्य तेलों के प्रमुख निर्यातक देशों में निर्यात शुल्क घटा दिया जाता है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ और उम्मीद के विपरीत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है।

इसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ना तय है। ऊंची कीमतों का खाद्य तेलों के आयात की मात्रा पर तो शायद ज्यादा असर नहीं पड़ेगा अगर इसके दाम में जोरदार इजाफा होने का खतरा बना रहेगा। सरकार को इस हकीकत की जानकारी है और इसलिए उसने विकल्पों की तलाश शुरू कर दी है।

चावल, गेहूं, चीनी एवं दालों के विपरीत खाद्य तेलों का दाम 14 सितम्बर से पहले लगभग स्थिर बना हुआ था मगर अब इसमें आने वाली जोरदार तेजी को नियंत्रित करना आसान नहीं होगा। 

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने खाद्य तेलों पर आयात शुल्क की संरचना को गतिशील बनाने का सुझाव दिया था जिसे सरकार लागू कर सकती है।

आमतौर पर नियम यह है कि जब खाद्य तेलों का वैश्विक बाजार भाव ऊंचा हो तब भारत में आयात शुल्क घटा दिया जाए और अब नीचे हो तब शुल्क में बढ़ोत्तरी की जाए ताकि घरेलू बाजार में विदेशों से आयातित खाद्य तेलों का दाम स्वदेशी खाद्य तेल के नीचे न आ सके। लेकिन ऐसा लगता है कि इस बार सरकार का दांव उल्टा पड़ गया है और निर्यातक देश इसका भरपूर फायदा उठा रहे हैं।